अमेरिकी टैरिफ से फिरोजाबाद के कांच करोबार को झटका, 700 करोड़ रुपये का माल स्टॉक में
Firozabad News: फिरोजाबाद से हर साल क्रिसमस सीजन से पहले अमेरिका को 1200-1500 करोड़ रुपये के ग्लास आइटम्स निर्यात करता था. लेकिन नई टैरिफ नीति ने इस उद्योग को संकट में डाल दिया है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लागू करने की घोषणा ने उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद कांच उद्योग को गहरा झटका दिया है. इस फैसले के बाद अमेरिकी कंपनियों ने फिरोजाबाद से होने वाले ग्लास उत्पादों के ऑर्डर कैंसिल कर दिए हैं, जिससे 700 करोड़ रुपये का माल होल्ड पर पड़ा है.
फिरोजाबाद जोकि कांच नगरी के नाम से प्रसिद्ध है, हर साल क्रिसमस सीजन से पहले अमेरिका को 1200-1500 करोड़ रुपये के ग्लास आइटम्स निर्यात करता था. लेकिन नई टैरिफ नीति ने इस उद्योग को संकट में डाल दिया है.
प्रभावित निर्यात और ऑर्डर कैंसलेशन
बता दें कि फिरोजाबाद में निर्मित ग्लास बेल, सेंट टी लाइट, और हैंडीक्राफ्ट आइटम्स की अमेरिका में भारी मांग रहती है. स्थानीय कारोबारी मुकेश बंसल टोनी के अनुसार क्रिसमस से पहले होने वाला निर्यात अब ठप हो गया है. 200 से अधिक एक्सपोर्टर्स के पास 700 करोड़ रुपये का माल स्टॉक पर पड़ा है, जिसे बेचने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा. ट्रंप के 50% टैरिफ के बाद अमेरिकी कंपनियों ने इन ऑर्डर को रद्द कर दिया, जिससे उद्योग पर गंभीर संकट छा गया है.
कारोबारियों की चिंता और रोजगार पर असर
फिरोजाबाद के कांच उत्पाद अपनी कारीगरी के लिए विश्वविख्यात हैं और अमेरिकी बाजार इनका प्रमुख गंतव्य रहा है. इस टैरिफ के चलते लगभग तीन लाख लोगों से जुड़े इस उद्योग पर बुरा असर पड़ा है. कारोबारियों का कहना है कि अमेरिकी बाजार से बाहर होने के बाद ताइवान, चीन, और वियतनाम जैसे देशों के ग्लास उत्पाद अमेरिका में जगह ले सकते हैं, जो भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती है.
नए बाजारों की तलाश
हालांकि भारतीय व्यापारी इस संकट से उबरने के लिए दक्षिण अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों में नए बाजार तलाश रहे हैं. मुकेश बंसल ने बताया कि हमें वैकल्पिक मार्केट्स पर ध्यान देना होगा, लेकिन अमेरिकी टैरिफ के झटके से उबरने में समय लगेगा. फिरोजाबाद के कारीगरों और श्रमिकों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए उद्योग संगठनों ने सरकार से राहत पैकेज और निर्यात प्रोत्साहन योजना की मांग की है.
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Source: IOCL






















