रायबरेली: बीज देने में घपलेबाजी, चहतों को अच्छे और सामान्य किसानों को मिल रहा है दोयम दर्जे का बीज
रायबरेली में किसानों ने उद्यान विभाग पर गंभीर आरोप लगाये हैं. उनका कहना है कि कुछ लोगों को अच्छी किस्म के बीज दिये जा रहे हैं और वहीं, सामान्य किसानों को निम्न क्वालिटी का बीज दिया जा रहा है.

रायबरेली: जहां एक तरफ देश के प्रधानमंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री किसानों को सुदृढ़ बनाने के लिए तरह तरह की योजनाएं ला रहे हैं और उन्हें सुविधाएं प्रदत्त करने के लिए सरकारी मशीनरी को निर्देश दे रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ वही सरकारी मशीनरी किसानों का शोषण करने से बाज नहीं आ रही है. इतना ही नहीं किसानों को मिलने वाले बीज अपने चहेतों को देकर सामान्य किसानों को इससे वंचित कर रही है. मामला उद्यान विभाग का है, जहां किसानों को पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है और जो बीज मिल भी रहा है उसकी रसीद किसानों को नहीं दी जा रही है. ऐसे ढेर सारे आरोप किसानों ने उद्यान विभाग पर लगाए हैं.
बीज देने में किया जा रहा है भेदभाव
रायबरेली जनपद का उद्यान विभाग इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है. प्रदेश सरकार ने किसानों को उचित मूल्य पर बीज मुहैया कराने का निर्देश दिया था. जिसके बाद उद्यान विभाग ने पंजीकृत किसानों को बुलाकर बीज वितरण की कार्रवाई शुरू की, लेकिन वह अपने चहेते किसानों को अधिक मात्रा में बीज देकर सामान्य किसानों को उनके अधिकार से वंचित कर दी और उन्हें पर्याप्त मात्रा में आलू के बीज नहीं मिल पाए. इतना ही नहीं किसानों को वितरित किए जा रहे बीज की रसीद भी किसानों को नहीं दी जा रही. जब कोई किसान रसीद मांगता है तो उसे या तो भगा दिया जाता है या फिर सादे पेपर पर हाथ से लिख कर रसीद दी जाती है जो शासनादेश के बिल्कुल विपरीत है.
चहेतों के अच्छे बीज
किसानों ने उद्यान विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों पर आरोप लगाया कि यहां आलू के बीज वितरण में जमकर घपलेबाजी की गई है. अपने चहेते किसानों को वे बीज दे दिए गए जिसमें एक बीज में दो नए बीज तैयार होते हैं. जबकि सामान्य किसानों को ओवरसाइज वाला आलू वितरित किया गया. किसानों ने उद्यान विभाग पर आरोप लगाया कि 2455 रुपए प्रति कुंतल वाले आलू का दाम 3150 रुपए लिया गया जो सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है. इस तरह के ढेर सारे आरोप किसानों ने उद्यान विभाग पर लगाए. आलू बीज वितरण के समय काफी लंबी लंबी लाइने देखने को मिली और उस समय भी किसानों ने उद्यान विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों पर आरोप लगाया कि जो लोग लाइन में पहले से खड़े थे उनको बीज का वितरण बाद में किया गया जबकि अपने चहेते लोगों को बैक डोर से दे दिया गया.
क्या कहना है किसानों का
किसान सुशील ने जब इसकी शिकायत डीएचओ केशवराम चौधरी से की तो उन्होंने मामले को टाल दिया. जब सुनवाई नहीं हुई तब किसान सुधीर कुमार त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री पोर्टल का सहारा लिया उस पर शिकायत होने के बाद बिना किसान से उसका बयान लिए व समस्या जाने पोर्टल पर सीधे ही उद्यान विभाग द्वारा रिपोर्ट लगा दी गई कि किसान संतुष्ट है जो कि किसान अभी भी दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर है. इस तरह उद्यान विभाग में जमकर घपलेबाजी व किसानों का शोषण चल रहा है जो मुख्यमंत्री की मंशा पर पलीता लगाने के लिए काफी है.
एक अन्य किसान ने बताया कि बीज वितरण में उद्यान विभाग द्वारा काफी घोटाला किया गया. अपने चहेते किसानों को बीज दे दिया गया और जो सामान्य किसान थे उनको ओवरसाइज बीज दिया गया. उसकी कीमत भी ज्यादा ली गई. जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऊपर का आदेश है. रसीद भी नहीं दी गई जब रसीद मांगी गई तो उन्होंने सादे कागज पर लिखकर मुहर लगाकर दे दिया. इसकी शिकायत हमने पहले जिला उद्यान अधिकारी से किया जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री के पोर्टल पर आईजीआरएस किया. जिसकी रिपोर्ट भी इन लोगों ने अपने मन से लगा कर भेज दी कि किसान संतुष्ट है जबकि मुझसे कोई बात किसी ने नहीं की.
आलू वितरण किसानों को किया गया. जिन किसानों ने रसीद मांगी उनको रसीद दी गई जिनको आवश्यकता नहीं थी उनको नहीं दी गई. जब बल्क में वितरण होता है तो रसीद देना संभव नहीं होता है जो मांगता है उसे दे दिया जाता है. आईजीआरएस के सवाल पर कहा कि किसान से मिलकर ही आइजीआरएस की रिपोर्ट लगती है.
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Source: IOCL























