Earthquake: उत्तराखंड में तुर्की जैसे विनाशकारी भूकंप की आशंका ने बढ़ाई चिंता, अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा?
Earthquake: डॉ सुशील कुमार ने कहा कि उत्तराखंड जोन 4 और जोन 5 पर आता है जो भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है, लेकिन ये कब आएगा इसका सही समय नहीं बताया जा सकता है.

Uttarakhand Earthquake: नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (National Geophysical Research Institute) द्वारा उत्तराखंड (Uttarakhand) में तुर्की (Turkey) जैसे भूकंप की संभावनाओं के बाद सबकी चिंता और ज्यादा बढ़ गईं है. दरअसल एनजीआरआई (NGRI) के वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि उत्तराखंड में भी इस तरह के भूकंप का खतरा मंडरा रहा है. बता दें कि 1905 के कांगड़ा भूकंप और 1934 का बिहार-नेपाल के सीमा में आए भूकंप के बाद इस हिमालय क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप (Earthquake) नहीं आया है, लेकिन ये अंदेशा अब लोगों को और डराने लगा है. इसकी पूरी हकीकत क्या है, चलिए आपको बताते हैं.
ये कोई नई बात नहीं है कि उत्तराखंड में किसी बड़े भूकंप की बात कही गई हो, लेकिन जब वर्तमान में तुर्की की तबाही हम सबके सामने हो और एक बड़ी रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक ऐसा भूकंप उत्तराखंड में आने की संभावना जता रहे हों, तो किसी बड़े खतरे को सीधे नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता. इसकी वजह है कि उत्तराखंड सेंट्रल सिस्मिक गैप है, लंबे समय से हिमालयी क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया हैं. उत्तर-पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में भूकंपीय ऊर्जा भूगर्भ में इकट्ठी है. यहां पर 1991 में उत्तरकाशी और 1999 में चमोली में दो बड़े भूकंप आ चुके हैं.
उत्तराखंड में बड़े भूकंप का ख़तरा
वैज्ञानिक डॉ सुशील कुमार रोहिल्ला का कहना है कि 1905 के कांगड़ा और 1934 के बिहार नेपाल की सीमा पर भूकंप आए. इसके बाद उत्तराखंड का ही क्षेत्र ऐसा है जहां भूकंप आने का खतरा हो सकता है, लेकिन दुनिया में ऐसी कोई अभी टेक्नोलॉजी नहीं है जो यह बता सके कि भूकंप किस निश्चित समय पर आएगा. हालांकि उत्तराखंड में बड़ा भूकंप आएगा, इस बात को लेकर भी उन्होंने मना नहीं किया है.
डॉ सुशील कुमार ने कहा कि उत्तराखंड जोन 4 और जोन 5 पर आता है जो भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है. सुशील कुमार का कहना है कि भूकंप के खतरे से बचा जरूर जा सकता है और इसके लिए घरों का डिजाइन इस तरीके से बनाना चाहिए ताकि बड़े भूकंप आने के बाद भी घरों को नुकसान न हो. डॉ सुशील कुमार का कहना है कि वैज्ञानिक पूर्व में आए भूकंप और उस क्षेत्र के भूगर्भीय हलचलों के आधार पर ही इस बात पर रिसर्च करते हैं कि इस क्षेत्र में भूकंप का खतरा है या नहीं.
साफ है उत्तराखंड में बड़ा भूकंप आने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन ये कब आएगा इसका कोई सही समय नहीं बता सकता. सबसे महत्वपूर्ण है कि इसको लेकर आखिर हम कितने तैयार हैं ? उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव डॉ रंजीत सिन्हा का कहना है कि विश्व में कहीं भी ऐसी कोई तकनीक नहीं है जिससे ये पता चल सके कि भूकंप कब और कितना बड़ा होगा, लेकिन भूकंप के दौरान अलर्ट और अर्ली वार्निंग सिस्टम पर उत्तराखंड में काफी काम किया जा रहा है.
सचिव आपदा रंजीत सिन्हा का कहना है कि उत्तराखंड आपदा प्रबंधन और आईआईटी रुड़की के द्वारा भूकंप का जो ऐप तैयार किया गया है वह बेहतर तरीके से कार्य कर रहा है. प्रदेश में 180 से ज्यादा क्षेत्रों में सायरन भी इंस्टॉल किए गए हैं. 5 मेग्नीट्यूड तीव्रता से ज्यादा भूकंप अगर आएगा तो सभी जगह सायरन भी बजेगा. जिससे लोगों को अलर्ट किया जा सकता. 5 मेग्नीट्यूड से कम के भूकंप पर मोबाइल में बीप का सायरन बजेगा.
तुर्की के भूकंप के बाद उत्तराखंड समेत देश के पहाड़ी राज्यों में सभी को इस बात की चिंता है कि अगर इतना बड़ा भूकंप भारत में आएगा तो फिर क्या स्थिति होगी. वहीं उत्तराखंड भूकंप के लिहाज से जोन 5 में आता है. ऐसे में उत्तराखंड में भूकंप के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग भी तैयारियों की बात कह रहा है. हां ये सच है कि उत्तराखंड में बड़े भूकंप की संभावना से इंकार तो नहीं ही किया जा सकता है.
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