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देहरादून: वक्फ बोर्ड से नोटिस के बाद आजाद नगर में हड़कंप, अतिक्रमण हटाने के निर्देश

Uttarakhand News: उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का दावा है कि इस क्षेत्र में स्थित भूमि वक्फ की संपत्ति है, जिस पर स्थानीय निवासियों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है.

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सहस्त्रधारा क्रॉसिंग स्थित आजाद नगर कॉलोनी में रहने वाले 150 से अधिक लोगों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने चूना-भट्टा क्रॉसिंग क्षेत्र में स्थित मुस्लिम कब्रिस्तान के आसपास लगभग 100 बीघा भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित करते हुए बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए हैं, इसके अनुसार इस कॉलोनी में ज्यादातर निर्माण अतिक्रमण की जद में हैं और इन्हे जल्द ही खाली करवाया जाएगा. 

वक्फ बोर्ड का क्या है आरोप?

वक्फ बोर्ड का दावा है कि इस क्षेत्र में स्थित भूमि वक्फ की संपत्ति है, जिस पर स्थानीय निवासियों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है. बोर्ड के अनुसार लगभग 100 बीघा भूमि जो वक्फ बोर्ड की संपत्ति है, उस पर अवैध रूप से कब्जा कर यहां रहने वाले निवासियों ने इस भूमि पर मकान, दुकान और प्रतिष्ठान खड़े कर दिए हैं. वक्फ बोर्ड द्वारा ऐसे 150 से अधिक लोगों को कब्जा खाली करने के नोटिस दिए गए हैं. यदि इन कब्जों को खाली नहीं किया जाता तो निकट भविष्य मे प्रशासन की मदद से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा सकती है.

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने क्या कहा?

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने स्पष्ट किया कि चूना भट्टा क्रॉसिंग पर स्थित वक्फ संपत्ति पर जिन लोगों द्वारा अनधिकृत निर्माण किए गए, उन पर वक्फ बोर्ड और प्रशासन की ओर से संयुक्त रूप से कार्रवाई की जाएगी. वक्फ अध्यक्ष शादाब शम्स ने बताया, ''बीते कुछ वक्त से आजाद नगर के निवासियों को लगातार नोटिस दिए जा रहे हैं और जेसा मुख्यमंत्री धामी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं 'सही को छेड़ना नहीं है और गलत को छोड़ना नहीं है'. उसी मत के अनुसार वक्फ बोर्ड वक्फ की संपत्ति कब्जाने वाले लोगों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा.

क्या कहते हैं आजाद नगर कॉलोनी के निवासी?

आजाद नगर कॉलोनी के आक्रोशित निवासियों का कहना है कि उनके पूर्वज 1947 से यहां रह रहे हैं. उस दौर में वक्फ बोर्ड को नियमित रूप से किराया भी दिया जाता था. हालांकि, बीच के वर्षों में वक्फ बोर्ड ने खुद ही किराया लेना बंद कर दिया. अब अचानक नोटिस भेजकर कार्रवाई की धमकी देना नाइंसाफी है.

स्थानीय लोगों का तर्क है कि अगर यह बस्ती अवैध होती, तो सरकार यहां बिजली-पानी के कनेक्शन क्यों देती? इन बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता ही इस बात का सबूत है कि यह एक मान्यता प्राप्त आवासीय क्षेत्र है. जब निवासियों से वक्फ बोर्ड की किराएदारी के दस्तावेज मांगे गए, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई. विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, पूरे चूना-भट्टा क्रॉसिंग क्षेत्र में केवल 8 से 10 लोगों के पास ही वक्फ की किराएदारी के कागजात हैं.

बाकी सभी निवासी बिना किसी औपचारिक किराया समझौते के वक्फ की संपत्तियों पर रह रहे हैं. यह स्थिति उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ा सकती है. खासकर जब वक्फ बोर्ड इस बार किसी प्रकार की नरमी दिखाने के मूड में नहीं दिख रहा. निवासियों ने वक्फ पर एक गंभीर आरोप लगाया है कि वक्फ संशोधन से जुड़ा मामला अभी अदालत में विचाराधीन है. ऐसे में कोर्ट के फैसले से पहले ही इस तरह की एकतरफा कार्रवाई करना कोर्ट की अवमानना के दायरे में आता है.

विशेष समुदाय के खिलाफ एजेंडा चलाने का आरोप

स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्हें जो भी नोटिस मिले हैं, उन सभी का उचित जवाब वक्फ बोर्ड को न्यायालय में दिया जाएगा. कॉलोनी के निवासियों ने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड सरकार लंबे समय से एक विशेष समुदाय के खिलाफ एजेंडा चला रही है. उनका कहना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक प्रेरित है और किसी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं. निवासियों ने कहा, "मुसलमान भी इसी प्रदेश और देश के नागरिक हैं. फिर उनके साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है?

 

 

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