वक्फ कानून के बीच कांग्रेस विधायक ने उठाए बदरी केदार समिति की संपत्तियों पर सवाल, जानें- क्या कहा?
Waqf Amendment Act: उत्तराखंड में कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने वक्फ कानून को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए बदरी केदार समिति की संपत्ति पर भी सवाल उठाए हैं.

Waqf Amendment Act: वक्फ संशोधन कानून को लेकर मचे घमासान के बीच कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. उत्तराखंड के मंगलौर से कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह से वक्फ संपत्तियों की भाजपा चिंता कर रही है, क्या वह उसी तरह हिंदुओं के प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों की संपत्तियों पर हो रहे अतिक्रमण की भी चिंता कर रही है?
काजी निजामुद्दीन ने इस दौरान उत्तराखंड की प्रमुख धार्मिक संस्था बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की संपत्तियों का मुद्दा उठाते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद बदरीनाथ और केदारनाथ जैसे धामों की करोड़ों की संपत्ति को आज तक पूरी तरह से सुरक्षित नहीं किया जा सका है. बदरी-केदार मंदिर समिति की संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे हुए हैं. लेकिन, सरकार अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई है.
कांग्रेस नेता ने बीजेपी से पूछा सवाल
कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि जब वक्फ संपत्तियों पर कार्रवाई की जा रही है, तो बीकेटीसी की संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए बुलडोजर क्यों नहीं चलाया जा रहा? अगर बीकेटीसी की जमीनों के मामलों पर न्यायालयों में सुनवाई चल रही है, तो सरकार को चाहिए कि उनकी मजबूती से पैरवी करे. उन्होंने कहा कि यदि सरकार बदरी-केदार मंदिर समिति की संपत्तियों को अतिक्रमण मुक्त कराने में सफल होती है, तो यह देश और दुनिया के लिए एक सकारात्मक संदेश होगा.
बदरी-केदार समिति के पास इतनी संपत्ति
बदरी-केदार मंदिर समिति के पास उत्तराखंड से लेकर अन्य राज्यों और यहां तक कि नेपाल तक भी संपत्तियां मौजूद हैं. जानकारी के अनुसार
- बदरीनाथ में 217 नाली और 3 मुट्ठी जमीन समिति के नाम दर्ज है.
- माणा गांव में 133 नाली 8 मुट्ठी, बामणी गांव में 239 नाली 8 मुट्ठी जमीन दर्ज है.
- ज्योतिर्मठ में 169 नाली, पांडुकेश्वर में 6 नाली 4 मुट्ठी, अणिमठ में 43 नाली, टंगणी में 4 नाली 12 मुट्ठी जमीन है.
- गोपेश्वर, मंडल, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग जैसे स्थलों पर भी जमीनें हैं.
- रुद्रप्रयाग और सेरा भरदार में भी मंदिर समिति के नाम पर जमीनें दर्ज हैं.
इसके अलावा, हल्द्वानी, रामनगर, लखनऊ, फतेहपुर और बुलडाना (महाराष्ट्र) में भी बीकेटीसी की संपत्तियां हैं.
कुल मिलाकर समिति के नाम 1846.5 नाली और 3,69,312 वर्ग मीटर से अधिक भूमि दर्ज है. इनमें से कई संपत्तियों पर कथित तौर पर अतिक्रमण हुआ है या फिर भूमि विवाद अदालतों में लंबित हैं.
बदरी केदार मंदिर समिति के सीईओ विजय थपलियाल ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि समिति अपनी संपत्तियों के संरक्षण को लेकर पूरी तरह सतर्क है. जहां-जहां मंदिर समिति की जमीनें हैं, वहां उनका प्रबंधन किया जा रहा है. कुछ जगहों पर जमीनों को लेकर विवाद अदालत में लंबित हैं, लेकिन समिति उनकी कानूनी पैरवी कर रही है और जल्द ही समाधान निकलने की उम्मीद है.
बीकेटीसी ने दी आरोपों पर सफाई
थपलियाल ने इस बात से इनकार किया कि बीकेटीसी की संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा है. उन्होंने कहा कि समिति अपनी सभी संपत्तियों को लेकर गंभीर है और कोई भी कदम कानूनी दायरे में रहकर उठाया जा रहा है. समिति न केवल बदरीनाथ और केदारनाथ धामों का प्रबंधन करती है, बल्कि 51 अन्य मंदिरों की देखरेख भी करती है. इनमें तपोवन, जोशीमठ, त्रियुगीनारायण, गुप्तकाशी, उखीमठ जैसे धार्मिक स्थल शामिल हैं. अभी तक समिति के अध्यक्ष का पद रिक्त है. पूर्व में अजेंद्र अजय इस पद पर थे, जिनका कार्यकाल पूरा हो चुका है.
इधर कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है. पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष ज्योति प्रसाद गैरोला ने कहा कि काजी निजामुद्दीन ने वक्फ संशोधन एक्ट को सही से पढ़ा नहीं है. सरकार ने वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन सुधारने के लिए संशोधन किया है ताकि ये संपत्तियां पसमांदा और गरीब मुसलमानों के हित में उपयोग हो सकें. यदि कहीं भी किसी भी धार्मिक स्थल की संपत्ति पर अतिक्रमण है, तो सरकार उस पर भी सख्त कार्रवाई करेगी.
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Source: IOCL
























