UP: मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, 48 अयोग्य कोर्स कोऑर्डिनेटर, 6.91 करोड़ की चपत
Lucknow News: साल 2022 में समाज कल्याण विभाग ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत हर जिले में कोचिंग सेंटर शुरू किए. इन केंद्रों के लिए 79 कोर्स कोऑर्डिनेटर पदों पर भर्ती होनी थी.

उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. गरीब परिवार के बच्चों को IAS/PCS और मेडिकल-इंजीनियरिंग की तैयारी कराने के लिए शुरू की गई इस योजना में कोर्स कोऑर्डिनेटर की भर्ती के दौरान भारी अनियमितताएं पाई गई हैं. विभागीय जांच में सामने आया है कि चयनित 69 में से 48 कोर्स कोऑर्डिनेटर शैक्षिक योग्यता पूरी नहीं करते थे, इसके बावजूद उन्हें दो वर्षों तक मोटी तनख्वाह दी गई.
साल 2022 में समाज कल्याण विभाग ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत हर जिले में कोचिंग सेंटर शुरू किए. इन केंद्रों के लिए 79 कोर्स कोऑर्डिनेटर पदों पर भर्ती होनी थी जिसमे 10 पहले से थे, इसमे फिर 69 पद भरे गए. योग्यता के तौर पर संघ लोक सेवा आयोग या अन्य लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य था.
जेम पोर्टल के जरिए हुई नियुक्ति
यह भर्ती जेम पोर्टल के जरिए आउटसोर्सिंग पर हुई, जिसमें अवनी परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड को चयनित किया गया. ऑनलाइन आवेदन में 8658 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, 1998 को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया. 13 से 16 दिसंबर 2023 के बीच समाज कल्याण विभाग की दो समितियों ने इंटरव्यू लिए.
48 अभ्यर्थी अयोग्य पाए गए
जांच में सामने आया कि 69 चयनित अभ्यर्थियों में केवल 21 ही मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण थे, वहीं 48 अभ्यर्थी अयोग्य पाए गए. इनमें 4 मुख्य परीक्षा में फेल थे, 42 अभ्यर्थियों ने फर्जी मार्कशीट/नंबर तालिका लगाकर चयन हासिल किया. हर कोर्स कोऑर्डिनेटर को ₹60,000 प्रतिमाह वेतन दिया गया. इस तरह 48 अयोग्य अभ्यर्थियों को दो वर्षों में करीब ₹6 करोड़ 91 लाख 20 हजार रुपये सरकारी खजाने से भुगतान कर दिया गया.
मामले का खुलासा समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण को मिले एक गोपनीय पत्र से हुआ, जिसमें फर्जीवाड़े के पुख्ता सबूत थे. मंत्री असीम अरुण ने तुरंत सभी चयनित अभ्यर्थियों के वेरिफिकेशन का आदेश दिया. जांच की जिम्मेदारी छत्रपति शाहूजी महाराज शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक आनंद कुमार सिंह को सौंपी गई. जांच के बाद लखनऊ के गोमतीनगर थाने में आउटसोर्स कंपनी अवनी परिधि के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई.
मंत्री ने दिए कार्रवाई के आदेश
मंत्री असीम अरुण ने कहा इस मामले में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता. उनकी भी जांच कराई जा रही है. अयोग्य अभ्यर्थी सीधे लाभार्थी हैं, इसलिए उनसे दो साल की तनख्वाह की वसूली होगी. आउटसोर्स कंपनी से भी रिकवरी की जाएगी.
कंपनी ने विभाग पर ही उठा दिए सवाल
अवनी परिधि के डायरेक्टर अज्ञात गुप्ता ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि कंपनी का चयन प्रक्रिया में कोई सीधा रोल नहीं था. इंटरव्यू समाज कल्याण विभाग की समितियों ने लिया. डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन विभाग की जिम्मेदारी थी. उनका कहना है कि कंपनी ने स्वयं उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन के लिए पत्र लिखे थे, लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया कि वह किसी निजी कंपनी से सीधे पत्राचार नहीं करता.
डायरेक्टर का आरोप है कि यह मामला समाज कल्याण विभाग के भीतर अफसरों की गुटबाजी का नतीजा है और कंपनी को गलत तरीके से फंसाया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि विभाग की ओर से आउटसोर्सिंग का पूरा भुगतान अब तक नहीं हुआ है, उल्टा FIR और ब्लैकलिस्ट करने की धमकी दी जा रही है.
Source: IOCL























