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कलाकार और किस्से : साधना शिवदासानी- एक गुनगुनता गीत या एक रुका हुआ मुकाम

साधना शिवदासानी बचपन से ही एक्टिंग करना चाहती थी। तो उनके पिता ने फिल्म इंडस्ट्री में उनके लिए कोशिश की और वो 1955 की फिल्म श्री 420 के एक गाने नजर आई। गाने का नाम था, इचक दाना बिचक दाना।

साधना जिनकी ज़िंदगी की शुरूआत तो बहुत हसीन और खूबसूरत थी। एक महकते हुए खिलखिलाते हुए फूल की तरह, लेकिन अंजाम जिंदगी का बहुत बुरा हुआ। एक मुरझाए हुए फूल की तरह। आज कलाकार औऱ किस्से में बात होगी इसी मशहूर अदाकार की साधना की।

कलाकार और किस्से : साधना शिवदासानी- एक गुनगुनता गीत या एक रुका हुआ मुकाम

बचपन से ही इन्हें एक्टिंग का शोक था। माथा ज़रा चोड़ा था। साधना जी का जन्म 2 सितंबर 1941 में हुआ। एक सिंधी परिवार में जन्मीं साधना अपने मां बाप की एक इकलौती बेटी थी। इसलिए मां बाप ने उन्हें बहुत ही लाड प्यार से पाला था। उनके पिता ने उनका नाम साधना इसलिए रखा क्योंकी साधना बोस उनकी फेवरेट एक्टर हुआ करती थी। साधना जब बड़ी हो रही थी उसी दौरान हिंदुस्तान का बंटवारा हुआ और इसके बाद वो कराची से मुंबई आ गई। क्योंकि साधना जी बचपन से ही एक्टिंग करना चाहती थी। तो उनके पिता ने फिल्म इंडस्ट्री में उनके लिए कोशिश की और वो  1955 की फिल्म श्री 420 के एक गाने नजर आई। गाने का नाम था, इचक दाना बिचक दाना। ये रोल इतना छोटा था कि साधना पर किसी की नजर नहीं पड़ी। सिर्फ 15 साल की उम्र में उन्होने कॉलेज के ड्रामा में हिस्सा लेना शुरू किया। इनका टैलेंट ज्यादा दिन तक नहीं छिपा। एक प्रोड्यूसर की नजर इन पर पड़ी और इन्हें एक रूपए का टोकन अमाउंट देकर एक सिंधी फिल्म अबाना के लिए साइन किया गया और यहां पर किस्मत ने एक अलग ही खेल खेला।

कलाकार और किस्से : साधना शिवदासानी- एक गुनगुनता गीत या एक रुका हुआ मुकाम

अबाना फिल्म के प्रमोशन के दौरान इनकी फोटो एक मैगजीन में छपी और तब उस ज़माने के बड़े प्रोड्यूसर शशिधर मुखर्जी की नज़र इस तस्वीर पर पड़ी। मुखर्जी जी, इन्हे फिल्मालय एक्टिंग स्कूल ले गए और अपने बेटे जॉय मुखर्जी के साथ फिल्म ‘’लव इन शिमला’’ में इन्हे लॉन्च किया। जिसे डायरेक्ट किया था आर के नैयर ने। ये फिल्म सुपरहिट साबित हुई और फिर साधना ने कभी पलट कर नहीं देखा। चाहे बिमल राय के साथ आई फिल्म पर्ख हो, देवानंद के साथ आई फिल्म हम दोनों हो या फिर राजेंद्र कुमार के साथ आई फिल्म मेरे महबूब हो। हर फिल्म में साधना ने अपनी एक्टिंग से कमाल कर दिया था। राज खोसला के साथ इनकी जोडी खूब जमी।

कलाकार और किस्से : साधना शिवदासानी- एक गुनगुनता गीत या एक रुका हुआ मुकाम

फिल्म वो कौन थी को भला कौन भूल सकता है। उस फिल्म के सारे गाने हिट हुए। मदन मोहन साहब का संगीत, लता जी की आवाज, राजा मेंहदी अली खान साहब के बोल और साधना जी का अभिनय। सब कुछ कमाल था। ये किस्सा भी मशहूर रहा कि जब फिल्म मेरे महबूब इन्हें ऑफर की गई तब साधना जी ने इस फिल्म में काम करने से इंकार कर दिया था और उस ज़माने के मशहूर डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी से कहा कि समझ नहीं आता कि फिल्म मेरे महबूब क्यों साइन करूं। ऋषिकेश मुखर्जी ने उनसे पूछा कि फिल्म का हीरो कौन है। उन्होंने कहा राजेंद्र कुमार और तब ऋषि दा ने कहा..कि साधना तुम इस फिल्म को ज़रूर साइन करो क्योकि राजेंद्र कुमार हमेशा अच्छी स्क्रिप्ट ही चुनते हैं और ये फिल्म भी बडी कामयाब होगी। ठीक वैसा ही हुआ। साधना ने मल्टीस्टारर फिल्म वक्त में भी साथ काम किया था।

कलाकार और किस्से : साधना शिवदासानी- एक गुनगुनता गीत या एक रुका हुआ मुकाम

इसी बीच इन्हे थाइरॉइड हो गया और वो इलाज करवाने अमेरिका चलीं गईं। सबको लगा कि अब साधना कभी लौट कर नही आएंगी। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया है, लेकिन वो वापस आईं और वापस आ कर उन्होने इंतकाम लिया...यानि फिल्म इंतकाम में काम किया। ये फिल्म सुपरहिट साबित हुई। इसी के साथ आई फिल्म ‘’एक फूल और दो माली’’ और ‘’गीता मेरा नाम’’। इन दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर खुब कमाई की और फिर इसके बाद साधना जी फिल्मों से धीरे धीरे दूर हो गई। उनका कहना था कि मैं सिर्फ बतौर हीरोइन ही फिल्मों में काम करूंगी। किसी भी हालात में चरित्र अभिनेत्री बनकर नजर नहीं आउंगी। हर हीरो के साथ इनकी जोडी खूब हिट रही। चाहे वो शम्मी कपूर हों, संजय खान, देवानंद,राजेन्द्र कुमार या फिर सुनील दत्त। गौर करने वाली बात ये है कि एक्ट्रेस बबीता इनकी रिश्तेदार हैं। करीना कपूर और करिशमा कपूर भी इनके रिशतेदार ही है। साधना पहली बार राज कपूर की फिल्म श्री 420 में बतौर एक कोरस सिंगर नजर आई थीं। फिल्म के सेट पर राज कपूर से उनकी छोटी सी बात पर अनबन हो गई थी और इसके बाद से साधना राज कपूर से नफरत करने लगी थीं। शूटिंग के दौरान साधना अपने हेयर स्टाइल पर काफी ध्यान देती थी और ये बात राज कपूर को पसंद नहीं थी। उन्होने साधना को मना किया। लेकिन वो नहीं मानी। इस पर राज कपूर को गुस्सा आ गया और राज कपूर ने गुस्से में साधना से कहा वो एक्टिंग छोड कर शादी कर लें और घर बसा लें। ये सुन कर साधना गुस्से में सेट छोड कर चली गई। हालांकि बाद में दोनों ने दुल्हा दुल्हन में साथ काम किया था।

कलाकार और किस्से : साधना शिवदासानी- एक गुनगुनता गीत या एक रुका हुआ मुकाम

60 और 70 के दशक में जहां साधना के दीवानों की कोई कमी नहीं थी। वहीं साधना का दिल अपनी ही फिल्मों के डायरेक्टर आर के नैयर पर आ गया था और बाद में साधना ने नैयर जी से ही शादी की। दरअसल साधना को अभिनेत्री साधना बनाने में आर के नैयर का बहुत बड़ा हाथ था। वो आर के नैयर ही थे जिन्होंने साधना को उनकी पहली फिल्म में डायरेक्ट किया और उन्हे एक नई पहचान दी। बाद में साधना का हेयर स्टाइल साधना कट के नाम से मशहूर हुआ था। ये हेयर कट आर के नैयर की ही खोज थी। डायरेक्टर आर के नैयर ने साधना के लुक्स के साथ काफी एक्सपेरिमेंट किया था। उन्होंने नई नवेली हीरोइन साधना को इसी हेयर कट के साथ सिनेमा के पर्दे पर उतारा। साधना ने टाइट चूडी दार कुर्ता और सलवार कमीज़ से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई थी। जो 70 के दशक का फैशन ट्रेड मार्क भी बना रहा। साधना और आर के नैयर की कैमिस्ट्री लाजवाब थी। दोनों एक दूसरे को अच्छी तरह समझते भी थे। तभी तो साधना ने आर के नैयर को अपना हमसफर चुना था।

कुछ दिलचस्प किस्से

साधना 30 सालों तक आर के नैयर के साथ रहीं। लेकिन अफसोस की बात तो ये है कि 1995 में आर के नैयर ये दुनिया छोड तक चले गए और साधना बिल्कुल अकेली रह गई। अकेली इसलिए क्योंकि उनकी कोई संतान नहीं थी।

अपने पति आर के नैयर की मौत के बाद 20 सालों तक साधना बिल्कुल अकेली रही। वो कहती थी जिस लडकी के साथ उसका पिता ना हो, भाई ना हो और पति ना हो तो दुनिया उसे बहुत ही खुंखार नजरो से देखती है। बहुत सताती है, बहुत रुलाती है और बहुत तड़पाती है।

लोग बिल्कुल सही कहते हैं कि मुसीबत जब आती है। तो चारों तरफ से आती है। आखिरी दिनों में साधना बहुत ज्यादा बीमार हो गई थी और बहुत परेशान रहने लगी थी। परेशानी की वजह ये थी कि जिस घर में वो रहती थी। उस घर पर मुकदमा चल रहा था। रोज़ रोज़ पुलिस के और अदालत के चक्कर लगाने पडते थे और वो भी बीमारी की हालत में।

साधना कि जिंदगी में उनके पति आर के नैयर उनके सपनों के राज कुमार बन कर आए थे। आए भी और चले भी गए। सुंदर सपना टूट गया और साधना बिल्कुल टूट गई।

फिल्मों से संन्यास के बाद साधना जी फिल्मों की तरफ नहीं लौटीं।  हालांकि इनकी इच्छा बतौर डायरेक्टर या प्रोड्यूसर फिल्मों से जुड़ने की भी थी। आपको बता दें इनको कोई अवॉर्ड भी नहीं दिया गया, लेकिन साल 2002 में इन्हें लाइफ टाइम अचिवमेंट अवार्ड से नवाज़ा गया। यकीनन साधना जी का अभिनय, इनकी मुस्कुराहट, इनके ज़ज्बाती सीन, इनका डांस सब कुछ शानदार रहा। भारतीय सिनेमा के इतिहास में साधना जी.. जैसी ना कोई थी और ना ही कोई होगी।

25 दिसंबर साल 2015 में साधना ये दुनिया छोड कर चली गई और फिल्मी गुलशन का एक महकता हुआ फुल, खिलखलाता हुआ फुल मुर्झा गया। लेकिन वो आज भी अपने चाहने वालों के दिलों में जिंदा हैं और हमेशा रहेंगी

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