वाराणसी: मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति पर बीएचयू ने दी ये सफाई
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी यानी बीएचयू ने संस्कृत विभाग में मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर अपनी सफाई दी है। इसमें कहा गया कि धर्म, जाति का भेदभाव न करत हुये सभी को अवसर दिया जाता है

वाराणसी, एजेंसी। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) ने संस्कृत विभाग में मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति का शुक्रवार को बचाव किया और कहा कि वह धर्म, जाति, समुदाय अथवा लैंगिक भेदभाव किए बिना हर व्यक्ति को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
बीएचयू का यह बयान तब आया जब आरएसएस की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने संस्कृत साहित्य विभाग में फिरोज खान का सहायक प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति का विरोध किया। बीएचयू ने एक बयान में कहा कि प्रशासन ने पहले ही साफ कर दिया है कि चयन समिति ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार सर्वसम्मति से उम्मीदवार के चयन की अनुशंसा की है।
इसमें कहा गया है कि कुलपति राकेश भटनागर की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने पांच नवंबर को मुलाकात की और इंटरव्यू में आवदेक के प्रदर्शन को देखते हुए इस पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार की अनुशंसा की।
कुछ छात्र संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान (एसवीडीवी) के साहित्य संकाय में खान के चयन के विरोध में कुलपति के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। कुलपति और वरिष्ठ अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से दो घंटे से अधिक समय तक बातचीत की थी। कुलपति ने छात्रों को आश्वासन दिया कि प्रशासन धर्म,जाति,समुदाय अथवा लैंगिक भेदभाव किए बिना हर व्यक्ति को शिक्षा तथा शिक्षण के समान अवसर उपलब्ध कराने के विश्वविद्यालय के उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रतिबद्ध है ।
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