सरकार की योजना के बाद फिर चमकेगा एटा का घंटी-घुंघरू उद्योग, दुनिया भर में है इसकी मांग
एटा का घुंघरू उद्योग एक बार फिर से दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा. यहां की घंटे-घंटिया और घुंघरू का विदेशों तक निर्यात किया जाता है. अब सरकार इस उद्योग के लिये नई योजना लेकर आई है.

एटा. विश्व भर में प्रसिद्ध एटा जनपद के घुंघरू की खनक एक बार फिर दुनिया भर में गूंजेगी. एक समय में दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुका एटा की घुंघरू घंटी नगरी जलेसर का घुंघरू एवं घंटा उद्योग सरकारी मदद के बिना दम तोड़ गया था और लगभग मृत प्राय हो गया था पर उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना एक जिला एक उत्पाद में सरकार द्वारा एटा जनपद से घुंघरू घंटी उद्योग का चयन करके एटा के घुंघरू घंटी के व्यापारियों को बड़ी सौगात दी है. सरकारी वित्तीय सहायता, श्रमिकों को प्रशिक्षण और अन्य सुविधाएं मुहैया कराए जाने के कारण अब यहां के व्यापारी दोबारा से इस पुराने काम को शुरू कर रहे हैं. प्रदेश सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से घुंघरू और घंटी की दुनिया भर में ब्रांडिंग कर रही है, जिससे दुनिया भर के देशों में एटा के बने घुंघरुओं और घंटियों की मांग बढ़ रही है. देश विदेश में घुंघरू की मांग बढ़ने से यहां के घुंघरू कारीगरों, व्यापारियों और इससे जुड़े लोगों के दिन बहुरेंगे.
घंटे से निकलती है ओम की ध्वनि
उत्तर प्रदेश का एटा जनपद देश विदेश में घुंघरू और घंटियों के लिए जाना जाता है. पूरी दुनिया में यहां का बना घुंघरू और घंटे सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. यहां के घंटे की जो सबसे बड़ी विशेषता है, वो ये कि इसको बजाने से ओम की ध्वनि निकलती है, जो दुनिया भर के किसी घंटे में नहीं निकलती.
विदेशों में होता है निर्यात
यहां के व्यापारियों का कहना है कि घुंघरू और घंटे के निर्माण में यहां की मिट्टी बहुत उपयुक्त है. रेतीली मिट्टी से ही इसका सांचा बनाया जाता है और मिट्टी की ही विशेषता है कि घुंघरू और घंटे के सांचे यहां बेजोड़ बनते हैं. यहां के बने हुए घंटे अमेरिका, ब्रिटेन, लंदन, पेरिस, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, सिंगापुर, मलेशिया, कंबोडिया, जॉर्डन, सऊदी अरब, यू ए ई जैसे देशों में निर्यात होते हैं. भारत में इनकी मुख्य मांग उज्जैन, महाराष्ट्र, दिल्ली, मुंबई, इंदौर, पूना, आगरा, मथुरा, मुरादाबाद, कानपुर के साथ साथ दक्षिण भारत में है.
पीएम मोदी ने यहां का घंटा केदारनाथ में चढ़ाया था
केदारनाथ के मंदिर में भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने जो घंटा चढ़ाया था वो एटा जनपद का ही बना हुआ था. वर्तमान में एटा जनपद के जलेसर में घुंघरू घंटा के व्यापारी आदित्य मित्तल ने अपने कारखाने से अयोध्या के निर्माणाधीन राम मंदिर के लिए दुनिया का सबसे बड़ा 2100 किलो का घंटा बनवाया है जो वे शीघ्र ही मंदिर कमेटी को समर्पित करेंगे.
बदलेगी सूरत
एटा की घुंघरू घंटी नगरी में घुंघरू और घंटी बनाने के पुस्तैनी कारीगर है जो कई पीढ़ियों से ये काम करते चले आ रहे हैं. ये एक दिन में 250 से 300 रुपये प्रतिदिन तक कमा लेते हैं, जिससे इनका बमुश्किल गुजारा होता है. पुराने कारीगर राजा का कहना है कि यदि सरकार इस उद्योग में सहायता करेगी तो उनकी जिंदगी में भी बदलाव आएगा, उनकी आय भी बढ़ेगी. अभी तक पीढ़ी दर पीढ़ी इनके परिवार के लोग घुंघरू घंटे बनाने का ही काम करते आये हैं पर अब इनका कहना है कि इसमे उनको भविष्य सुरक्षित न देख अब उनके बच्चे इस काम को नहीं करना चाहते हैं. वे पढ़ रहे हैं और कुछ अन्य काम करेंगे.
क्या कहना है व्यापारियों का
पुस्तैनी कारीगर शेर सिंह पिछले 30 -35 सालों से जलेसर में घुंघरु घंटी बनाने का काम करते हैं. उनसे जब पूछा गया कि अब सरकार इस उद्योग को सहायता दे रही है तो उनका कहना था कि यहां कोई सहायता नहीं आ रही है और हमारे जीवन में कोई बदलाव नहीं आया है. उनके कारखाने में 30 से 40 कारीगर काम करते हैं और प्रतिदिन 12000 से 13000 किलो माल बना लेते हैं. जिन्होंने 200 किलो के घंटे भी बनाये हैं.
घंटा बनाने की प्रक्रिया बताते हुए पुराने कारीगर राजा कहते हैं कि पहले हम मिट्टी का सांचा बनाते हैं. फिर पीतल को उसमे पिघला कर भर देते है और फिर सांचे को तोड़कर घंटा निकाल लेते हैं. इस काम मे हुनर और सावधानी की बहुत आवश्यकता है. भारतीय फिल्मों में फिल्माए गए अधिकांश नृत्य सीन और मुजर जलेसर एटा के बने घुंघरुओं पर ही फिल्माए गए हैं. पुराने समय में राजाओं के दरबारों की शान भी एटा के बने घुंघरु रहे हैं.
जलेसर एटा के घुंघरु घंटी के व्यापारी आशीष गुप्ता कहते हैं कि इनके यहां 1966 से इनके दादाजी के समय से ये काम हो रहा है, उस समय एक्सपोर्ट बहुत था। अभी कुछ सालों पहले इसका निर्यात कम हो गया था. पर उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री द्वारा इस उद्योग को बढ़ावा देने से इसकी मांग बढ़ी है और यूएसए, सिंगापुर, मलेशिया, कंबोडिया, आदि से आर्डर आने शुरू हुए हैं. ये मुख्यमंत्री के इस प्रयास का स्वागत तो करते हैं परंतु कहते हैं कि यहां कच्चे माल का डिपो न होने से माल दिल्ली, मुंबई, चेन्नई से कच्चा माल मंगाना पड़ता है. वे कहते हैं कि यहां बैंकों में नेटवर्क चला जाता है. शाम के बाद यहां कोई कनेक्टिविटी न होने से यहां एक्सपोर्टर और खरीददार आ नहीं पाता. कच्चे माल पर टैक्स ज्यादा है और बने हुए माल की बिक्री पर कम है. पर इस सबके बाद भी ये आशान्वित हैं कि मुख्यमंत्री जी की पहल से स्थितियां सुधरेंगी.
घुंघरु के पुराने व्यापारी कृष्ण गोपाल गुप्ता कहते हैं कि इस उद्योग के एक जिला एक उत्पाद में चयनित होने से बहुत फायदा होगा. पर वे कहते हैं कि कच्चे माल पर 18 फीसदी टैक्स है और प्रोडक्ट बनाकर बेचने पर 12 फीसदी टैक्स है. वे कहते हैं कि हमारा 6 फीसदी टैक्स पिछले ढाई तीन सालों से वापस नहीं मिला है. वे कहते हैं कि जैसे जैसे कोरोना खत्म हो रहा है, इस व्यापार में सुधार हो रहा है. वे कहते हैं कि पहले हमारा माल यूएसए, लंदन, पेरिस, यूएई खूब जाता था पर बाद में हमारी लागत अधिक आने से चाइना ने हमे पीछे कर दिया. अब जब सुविधाएं मिलेंगी तो हम चाइना का प्रभाव कम करके दुबारा स्थापित होंगे.
एटा में घुंघरु घंटी के एक और व्यापारी आदित्य मित्तल भी प्रदेश सरकार के इस उद्योग के संवर्धन के प्रयास की सराहना करते हैं, लेकिन उनका कहना है कि बैंक व्यापारियों को सपोर्ट नहीं करते हैं, जिससे इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. उनका कहना है कि यहां 25 व्यापारियों ने इस उद्योग के लिए बैंक से ऋण के लिए अप्लाई किया, फ़ाइल कम्पलीट हुई पर बैंक ने एक भी लोन नहीं किया, जिससे सरकार की योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा. वे कहते हैं कि यदि ये योजना ठीक से लागू हो जाये तो ये उद्योग पुनर्जीवित हो जाएगा. कुल मिलाकर प्रदेश सरकार की इस नई योजना से एटा की घुंघरु घंटी नगरी जलेसर के दिन बहुरने वाले हैं. एटा जनपद की पहचान उसको दुबारा मिलने वाली है. इसको लेकर यहां के लोग काफी उत्साहित हैं.
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Source: IOCL























