Ayodhya News: 74वें प्रकटोत्सव शोभायात्रा में हनुमान संग रथ पर निकले रामलला, कोरोना महामारी के बाद लौटी रौनक
UP News: रथ पर आगे हनुमान के स्वरूप विराजमान थे तो पीछे हनुमानगढ़ी के निशान के साथ साधु-संत और पीले कपड़ो से सजे धजे वेद पाठी बच्चे चल रहे थे.

Uttar Pradesh News: श्री राम जन्मभूमि परिसर में रामलला का 74वां प्रकट उत्सव भव्य शोभायात्रा के साथ शुरू हुआ. यह शोभायात्रा अयोध्या में रामकोट के चारों तरफ परिक्रमा करती है. 3 दिवसीय इस कार्यक्रम में अंतिम दिन 25 दिसंबर को रामलला के गर्भगृह में स्थापित कलश के साथ भगवान श्री राम के बाल स्वरूप बाकायदा रथ पर सवार होकर बैंड बाजे के साथ निकले. रथ पर आगे हनुमान के स्वरूप विराजमान थे तो पीछे हनुमानगढ़ी के निशान के साथ साधु-संत और पीले कपड़ो से सजे धजे वेद पाठी बच्चे चल रहे थे.
श्री रामजन्मभूमि परिसर में 1949 में इसी मूहर्त पर रामलला का प्रकटोत्सव हुआ था, जिसके बाद से ही हर वर्ष प्रकटोत्सव मनाने का सिलसिला शुरू हुआ. हालांकि बाबरी विध्वंस की घटना ने इसमें अवरोध डाला था. सन 1992 के बाद सुरक्षा और सामाजिक सदभाव खराब होने का हवाला देकर रामजन्मभूमि परिसर के भीतर इस तरह के कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद रामजन्मभूमि मंदिर में कलश स्थापना के साथ एक बार फिर रामलला का प्रकटोत्सव कार्यक्रम धूमधाम से शुरू हुआ. क्योंकि बीते वर्ष कोरोना वायरस के चलते यह संभव नहीं हो सका था.
74 साल से चल रही है यात्रा
श्री रामजन्मभूमि समिति के सदस्य सत्येंद्र दास वेदांती ने कहा कि जन्मभूमि परिसर से ही कार्यक्रम का प्रारंभ होता है. पहले यात्रा भगवान भोलेनाथ श्रीद्धेश्वर नाथ मंदिर से निकलती है और कलश पूजन के लिए मंदिर के गर्भ गृह में रखा जाता है. समिति के द्वारा आज सुबह 11:30 बजे कलश लाकर, उस कलश को लेकर रामकोट की परिक्रमा की जाती है. परिक्रमा का स्वरूप आप लोगों को देखने को मिल रहा है. भव्य-दिव्य रूप से आज यह परिक्रमा रामकोट की भगवान श्री राम के स्वरूप और पूजन कलश को लेकर संत समाज वैदिक विद्वानों के साथ संत-गृहस्थ को लेकर यह यात्रा प्रारंभ की जा रही है.
उन्होंने कहा कि 1949 में भगवान प्रकट हुए थे उसी अवसर पर इसे प्राकट्य महोत्सव के रूप में वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है. बाबा अभिराम दास जी ने प्रथम यात्रा को प्रारंभ किया था, यह सदैव परंपरागत रूप से मनाई जाती रही है. आज 74वां वर्ष है यानि 74 वर्ष से आजतक लगातार मनाते हो गया है. उन्होंने कहा कि राम कोट की पूर्ण परिक्रमा करके यात्रा प्रारंभ किया जाता है.
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