AMU में चुनाव की मांग पर फूटा छात्रों का गुस्सा, प्रदर्शन में पूर्व अध्यक्ष भी शामिल
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक बार फिर छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष का पूरा समर्थन मिला और उन्होंने उनकी मांग जल्द पूरा करने का एएमयू प्रशासन से आह्वान किया है.

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक बार फिर छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर विवादों में नजर आ रहा है. छात्र संघ चुनाव की मांग छात्रों के द्वारा लंबे समय से की जा रही थी, जिसको लेकर छात्रों के द्वारा कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था. लेकिन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोर्ट में हलफनामा दिया था जल्द ही छात्र संघ चुनाव कराये जाएंगे, उसके बावजूद भी कई महीने गुजर गए लेकिन आज तक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा छात्र संघ चुनाव नहीं कराये गए.
यही कारण है छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर नजर आ रहा है. छात्रों के द्वारा बीते दिनों भी प्रदर्शन करते हुए चुनाव कराने की मांग की थी. इसके बाद एक बार फिर छात्रों के द्वारा एएमयू प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रदर्शन करने वाले छात्रों को अब पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष का पूरा समर्थन मिल चुका है, जिसको लेकर पूर्व अध्यक्ष सलमान इम्तियाज के द्वारा खुद धरने में पहुंचकर छात्रों की मांग को जायज बताते हुए उनकी मांग जल्द पूरा करने का एएमयू प्रशासन से आह्वान किया है.
प्रॉक्टर टीम के बर्ताव पर नाराजग जताते हुए लगाए आरोप
वहीं दूसरी ओर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एक छात्र के द्वारा छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर 4 दिन से भूख हड़ताल पर बैठ जाने के बाद एएमयू प्रशासन के हाथ पैर फूलते हुए नजर आ रहे हैं. एएमयू प्रशासन के द्वारा भूख हड़ताल पर बैठने वाले छात्र को रोकने का प्रयास किया था, लेकिन छात्रों के आगे एएमयू प्रशासन की जिद नहीं चली. दर्जनों छात्रों के द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर टीम के बर्ताव पर नाराजगी जताते हुए एएमयू प्रॉक्टर व उनकी टीम पर गंभीर आरोप लगाए है.
पूरे मामले पर भूख हड़ताल पर बैठने वाले छात्र यासिर फहद एमए उर्दू के द्वारा बताया गया कि, जब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अब्दुल्ला गर्ल्स कॉलेज की छात्राओं के द्वारा खराब खाने का विरोध किया तो उस दौरान भी छात्राओं के साथ अमु प्रॉक्टर टीम के द्वारा बदसलूकी की थी.
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छात्रों के द्वारा आवाज उठाने की कोशिश किया गया सस्पेंड
इस दौरान जब छात्रों के द्वारा आवाज उठाने की कोशिश की गई तो छात्रों को सस्पेंड कर दिया गया. लेकिन जब छात्र के द्वारा धरने पर बैठने की बात की गई, तो एएमयू प्रशासन के द्वारा उनको डिटेन करने की कोशिश की गई. वह खुद भूख हड़ताल में बैठने जा रहे थे तो अमु प्रॉक्टर व उनकी टीम के द्वारा उनके साथ बदसलूकी की जिसकी तस्वीर भी उनके द्वारा पोस्टर पर लगाई गई है.
यह धरना उनके द्वारा जब तक जारी रखा जाएगा जब तक उनकी मांग को पूरा नहीं किया जाता. छात्र का कहना है उनकी जायज मांग है इसे एएमयू प्रशासन मानने को तैयार नहीं है जब तक छात्र संघ चुनाव की तारीख तय नहीं हो जाती तब तक वह धरने पर बैठे रहेंगे.
'ऐसे तानाशाही माहौल में अपना हक मांगना बहादुरी का काम'
पूरे मामले पर उनके द्वारा बताया गया कि डक पॉन्ड पर आज उन्होंने अपने छोटे भाइयों की हौसला अफजाई की, जो अपना हक (AMU Students Union) लेने के लिए वहां बैठे हैं. यह वही तारीखी तलबा यूनियन है, जिसने माजी में मुल्क और मिल्लत को एक मजबूत कियादत फराहम की थी. यहीं हमारे सीनियर्स ने हुकूमत की आंख में आंख डालकर जुल्म के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी और अपना हक छीनकर दिखाया था. हुकूमतें तलबा से घबराती हैं और उनके एकजुट होने से कांपती हैं, क्योंकि इंकलाब की बुनियाद ये तलबा ही रखते हैं, न कि हुकूमत से मोटी तनख्वाह पाने वाले मुलाजिम.
'मेरा रेशा-रेशा तलबा के हक के लिए लड़ेगा, क्योंकि यही मेरी बुनियाद है और मैं उनके हुकूक के लिए हर वक्त खड़ा हूं. मैं सलाम करता हूं यासिर फहाद की हिम्मत को, क्योंकि ऐसे तानाशाही माहौल में हिम्मत के साथ अपना हक मांगना बहादुरी का काम है. आज तलबा बेहद परेशान हैं. उन्हें न सही खाना मिलता है और न हॉस्टल में कमरा.' किसी इमरजेंसी के वक्त अस्पताल में इंतजामिया की तरफ से कोई उनकी सुध लेने वाला नहीं होता. अगर कोई जहनी परेशानी का शिकार हो जाए, तो उसकी काउंसिलिंग के लिए कोई प्रोफेसर आगे नहीं आता, बल्कि जहनी तौर पर टॉर्चर करने के लिए यहां उस्तादों की कोई कमी नहीं है.
एएमयू प्रशासन छात्र संघ चुनाव की तारीखों को लेकर घिरा हुआ
यूनिवर्सिटी में असातिजा की जगह ऐसे सियासतदानों ने ले ली है, जो सिर्फ बड़े ओहदे को पाने के लिए चहलकदमी करते रहते हैं. मुसलमानों के हालात की तब्दीली के लिए बड़े सेमिनार करा रही हैं वीसी मैडम, मगर जो इन सब मसाइल को हल कर दे, ऐसी कियादत पैदा करने की बुनियाद (स्टूडेंट्स यूनियन), उसका इलेक्शन कराने से बच रही हैं, भला यह कैसी मुनाफकत है! स्टूडेंट यूनियन तलबा का बुनियादी हक है. यही यूनियन उनकी परेशानियों को हल करने का वाहिद जरिया है—यही उनकी आवाज है और यही उनके जिंदा व होशमंद होने का एहसास है.
पूरे मामले पर जब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की प्रॉक्टर टीम से बातचीत करने की कोशिश की गई तो टीम मीडिया से दूरी बनाती हुई नजर आई. फिलहाल एएमयू प्रशासन छात्र संघ चुनाव की तारीखों को लेकर घिरा हुआ नजर आ रहा है.
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