क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन-जीजा कर रहे मनरेगा मजूदरी! तीन सालों में उठाए इतने पैसे
Amroha में मनरेगा योजना के तहत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है. फर्जीवाड़े में भारतीय गेंदबाज मोहम्मद शमी की बहन और जीजा का नाम सामने आया है.

Mohammed Shami: उत्तर प्रदेश के अमरोहा में मनरेगा योजना के जरिए हो रहे एक फर्जीवाड़े में क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन और बहनोई का नाम भी सामने आया है. इन दोनों को ही बीते तीन सालों से लगातार मनरेगा के तहत मजदूरी मिल रही है. मामला सामने आने के बाद अमरोहा की डीएम निधि गुप्ता वत्स ने जाँच के आदेश देते हुए मनरेगा धन की वसूली के आदेश दे दिए हैं. जिला अधिकारी ने इस घोटाले में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की बात कही है.
उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान ने जिस तरह अपने रिश्तेदारों के बैंक खातों में मनरेगा का पैसा डाला है हम इस मामले में हर स्तर पर कार्रवाई करेंगे और धन वापस वसूलेंगे और क़ानूनी कार्रवाई भी करेंगे. इस मामले में क्रिकेटर मोहम्मद शमी के भाई मोहम्मद हसीब ने एबीपी न्यूज़ को बताया कि हमारी जानकारी में मामला आया है, हमारी बहन शादीशुदा हैं और हम से काफी दूर दूसरे गाँव में रहती हैं. उनका अपना परिवार है. मोहम्मद शमी या हमारे परिवार से इसका कोई लेना देना नहीं है. यह वहां के ग्राम प्रधान या उनके विरोधियों की कोई साजिश हो सकती है. मामले की जाँच होने पर सच सामने आ जायेगा.
शबीना ने मनरेगा में की 374 दिन की मजदूरी
मामला अमरोहा के जोया ब्लॉक के गांव पलौला का है. बताया जाता है कि यहां मनरेगा योजना में 657 जॉब कार्ड बने हुए हैं. इनमें से करीब 150 एक्टिव कार्ड हैं. इस लिस्ट में 473वें नंबर पर शबीना पत्नी गजनबी का नाम है. शबीना क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन और मौजूदा प्रधान गुले आइशा की पुत्र-वधू हैं. रिकॉर्ड के अनुसार, शबीना का मनरेगा योजना में 4 जनवरी, 2021 को रजिस्ट्रेशन हुआ था. 21 मार्च, 2022 से 23 जुलाई, 2024 तक शबीना ने मनरेगा में 374 दिन मजदूरी की है. इसके बदले शबीना के SBI खाते में करीब 70 हजार रुपए आए हैं.
शबीना पलौला ग्राम प्रधान गुले आइशा की पुत्र वधु हैं और गाँव में आलीशान कोठी में रहती हैं और बताया जाता है कि ग्राम प्रधान ने अपने बेटे गजनबी और बहू शबीना को कस्बा जोया में एक फ्लैट दिया हुआ है. रिकॉर्ड के अनुसार, शबीना के पति गजनबी भी मनरेगा मजदूर हैं. रिकॉर्ड में लिखा है कि इन्होंने साल 2021 से 2024 तक करीब 300 दिन मजदूरी की, इस काम के बदले उनके खाते में करीब 66 हजार रुपए आए. जॉब कार्ड लिस्ट में 576 नंबर पर नेहा का नाम है, ये ग्राम प्रधान गुले आइशा की बेटी है. साल 2019 में निकाह होने के बाद गांव से करीब 7 किलोमीटर दूर पति के साथ कस्बा जोया में रह रही है. इसका भी मनरेगा मजदूरी कार्ड बना है.
साल 2022 से 2024 तक इसके खाते में भी काफी पैसा आया है. 563 नंबर पर शहजर का नाम है जो प्रधान-पति शकील का सगा भाई है. गांव से कई किलोमीटर दूर अमरोहा में इसकी एग्रीकल्चर शॉप है. इसके बावजूद ऑन रिकॉर्ड ये मनरेगा मजदूर है. मनरेगा जॉब कार्ड लिस्ट में 482 नंबर पर जुल्फिकार का नाम है, जो ठेकेदार है. गांव में इसका दो मंजिला मकान है. ठेकेदार जुल्फिकार का बेटा अजीम भी मनरेगा मजदूर दर्शाया हुआ है, जबकि ये एक फैक्ट्री में इंजीनियर है. इस तरह के तमाम फर्जीवाड़े मनरेगा में हुए हैं.
अमरोहा डीएम बोलीं- जो भी दोषी हैं उन पर करेंगे कार्रवाई
अमरोहा की डीएम निधि गुप्ता वत्स ने बताया कि ग्राम पलोला में ग्राम प्रधान ने मनरेगा के फंड को जिस तरह अपने स्वजनों के बैंक खातों में डाला है, इसकी जांच वीसी मनरेगा के माध्यम से कराई जायेगी. साथ ही इस मामले जो भी दोषी है, चाहे वह ब्लॉक लेवल पर हैं या कम्प्यूटर आपरेटर हैं या जो भी जिस स्तर पर है हम उनसे वसूली भी करेंगे और उनके खिलाफ कड़ी क़ानूनी कार्रवाई भी करेंगे. जब उनसे सवाल किया गया की गाँव के लोगो का आरोप है कि क्यूंकि मोहम्मद शामी राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी हैं इसलिए दबाव में कार्रवाई नहीं हो पाती है तो जिला अधिकारी का कहना था कि एक बार जाँच हो जाये फिर हम बता पाएंगे.
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Source: IOCL






















