मोहम्मद अहसान इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपना सकेंगे, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दी इजाजत
Prayagraj News: इलाहाबाद HC ने अनिल पंडित उर्फ मोहम्मद अहसान मामले में कहा कि अगर जरूरी वैधानिक प्रक्रिया का अनुपालन किया गया तो प्रशासनिक अधिकारी किसी व्यक्ति के धर्म परिवर्तन को बाधित नहीं कर सकते.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाने के लिए याचिकाकर्ता मोहम्मद अहसान को इजाजत दे दी है. अदालत ने कहा कि प्रशासनिक अधिकार संविधान प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर नहीं हो सकते. प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद प्रशासनिक अड़चनें विधि सम्मत नहीं मानी जा सकतीं. जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस इन्द्रजीत शुक्ल की डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई. याची की ओर से वकील आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बहस की.
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत अनुमति दी. अदालत ने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाने की प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद चार हफ्ते में एडीएम प्रशासन प्रयागराज को आदेश पारित करने का निर्देश दिया है.
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सभी दस्तावेजों में नाम परिवर्तन करने का निर्देश
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अदालत को दिये अपने आश्वासन पर अमल करने का निर्देश दिया है. साथ ही सभी दस्तावेजों में नाम परिवर्तन करने का भी आदेश दिया है. कोर्ट ने अनिल पंडित उर्फ मोहम्मद अहसान की याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि अगर अधिनियम की धारा 8 और 9 के तहत आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का अनुपालन कर लिया गया है तो प्रशासनिक अधिकारी अनिश्चितकालीन जांच, संदेह या फिर व्यक्तिगत संतुष्टि के आधार पर किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान अथवा धर्म परिवर्तन को बाधित नहीं कर सकते.
सीएमपी डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं अनिल पंडित
याची डॉ. मोहम्मद अहसान उर्फ अनिल पंडित जो सीएमपी डिग्री कॉलेज, प्रयागराज में अंग्रेजी विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं. इन्होंने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाने की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की और अनुमति के लिए आवेदन भी दिया. प्रशासनिक स्तर पर उनके धर्म परिवर्तन को स्वीकार नहीं किया जा रहा था तो उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.
धर्म परिवर्तन का आवेदन स्वीकार
कोर्ट के निर्देश पर एडीएम प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि धर्म परिवर्तन का आवेदन स्वीकार कर लिया गया है. याची वर्ष 2022 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े हुए हैं. उनकी पत्नी भी एक शिक्षाविद् हैं और बलिया स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में अंग्रेजी विषय की प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं. प्रशासनिक अस्वीकार्यता के कारण दंपत्ति को विवाह पंजीकरण, पहचान पत्र, शासकीय अभिलेखों और अन्य वैधानिक अधिकारों के संबंध में गंभीर परेशानियों और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा था.
यहां तक उनकी वैवाहिक पहचान और भावी पारिवारिक अधिकार भी अनिश्चितता के घेरे में आ गए थे. हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेश 05 मई 2026 में कहा था कि अधिनियम की धारा 8(1) के तहत आवश्यक घोषणा पूर्व में ही प्रस्तुत की जा चुकी थी. अदालत के हस्तक्षेप पर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), प्रयागराज द्वारा दिनांक 14 मई 2026 को अंतिम आदेश पारित कर याची के धर्म परिवर्तन आवेदन को स्वीकार कर लिया गया.
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Source: IOCL

























