अलीगढ़ CMO दफ्तर में 'विवादित बाबू' की वापसी, उठे सवाल
Aligarh News In Hindi: हॉस्पिटल स्टाफ के साथ-साथ स्थानीय लोगों ने भी सीएमओ की इस कार्रवाई पर अचरज जताया है, सवाल उठ रहे हैं कि जिस भ्रष्टाचार को खत्म करने की बात चल रही थी अब वही सब फिर हो रहा है.

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सीएमओ डॉ आरएन सिंह की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि जिस वरिष्ठ लिपिक को कार्यालय से बाहर रखने के पोस्टर लगवाये गए थे अब उसी को दोबारा अपने सीएमओ कार्यालय में तैनाती देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है. हॉस्पिटल स्टाफ के साथ-साथ स्थानीय लोगों ने भी सीएमओ की इस कार्रवाई पर अचरज जताया है, साथ ही सवाल उठ रहे हैं कि जिस भ्रष्टाचार को खत्म करने की बात चल रही थी अब वही सब फिर हो रहा है.
क्या है पूरा मामला ?
बता दें कि वरिष्ठ लिपिक रणधीर चौधरी पर कुछ समय पहले अनियमितताओं के आरोप लगे थे. इसके बाद उन्हें सीएमओ कार्यालय से हटा दिया गया था और निलंबित भी किया गया. सीएमओ कार्यालय में उनके नाम के पोस्टर चस्पा कर दिए गए थे, जिनमें साफ लिखा था कि उपरोक्त बाबू से कोई वार्तालाप न करें और उन्हें कार्यालय से दूर रखें.
इसको लेकर रणधीर चौधरी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिली. इसके बाद स्वास्थ्य निदेशक के आदेश पर उनकी सेवा बहाल कर दी गई. शुरुआत में उन्हें मलखान सिंह जिला अस्पताल स्थित टीबी यूनिट में तैनात किया गया, लेकिन उन्होंने वहां चार्ज लेने से इनकार कर दिया. जिसके सीएमओ डॉ आरएन सिंह ने रणधीर चौधरी को वापस सीएमओ कार्यालय में ही तैनात कर दिया. यही नहीं उन्हें उसी पटल पर जिम्मेदारी दे दी, जिनको लेकर विवाद हुआ था.
CMO का भ्रष्टाचार मुक्त अभियान पर सवाल
सीएमओ डॉ. आरएन सिंह ने हाल ही में सीएमओ कार्यालय को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने और अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई करने के बड़े-बड़े दावे किए थे. उन्होंने कहा था कि पहले कार्यालय की गंदगी साफ करेंगे, फिर जिले के झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई करेंगे. लेकिन अब रणधीर चौधरी की वापसी ने पूरे जिले में चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है। लोग सवाल कर रहे हैं कि जिस बाबू को हटाने के लिए पोस्टर लगवाए गए, उसी को उसी कार्यालय और उसी पटल पर वापस कैसे भेज दिया गया?
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