हरिद्वार: उत्तराखंड में 17 हजार बच्चे कुपोषण का शिकार
उत्तराखंड में सरकार ने कुपोषण को खत्म करने के लिये अभियान चला रखा है। लेकिन राज्य सरकार ने माना है कि अभी भी इस दिशा में बहुत काम करना बाकी है। राज्य सरकार के मंत्री ने आंकड़े पेश करते हुये कहा कि राज्य में 17 हजार कुपोषित बच्चे हैं।

हरिद्वार, एबीपी गंगा। कुपोषण को उत्तराखंड राज्य में खत्म करने के लिए इसके खिलाफ अभियान की शुरुआत तो सरकार द्वारा 2018 में कर दी गई थी मगर आज भी अगर हम राज्य की बात करें तो राज्य में 17000 बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इस कुपोषण को खत्म करने के लिए और देश को सशक्त बनाने के लिए व देश के बच्चों व गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से स्वस्थ बनाने के लिए हरिद्वार में भी एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उत्तराखंड की राज्यपाल माननीय बेबी रानी मौर्य ने शिरकत की। यही नहीं इस कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने भी शिरकत कर हरिद्वार के लोगों को कुपोषण को खत्म करने के लिए उचित जानकारी दी।
सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी बच्चों में कुपोषण की कमी दूर नहीं हो रही है। आपको बता दें कि उत्तराखंड प्रदेश में लगभग 17 हजार बच्चे कुपोषण के शिकार हैं इनमे से 1700 बच्चे अति कुपोषण का शिकार हैं। हरिद्वार में भी कई बच्चे और गर्भवती महिलाएं कुपोषण का शिकार हैं और इसको खत्म करने के लिए आज हरिद्वार में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जहां संतुलित आहार पुस्तिका का विमोचन किया गया तो वही राज्य एवं आंगनवाड़ी पोषण निगरानी पोर्टल की शुरुआत भी की गई।
इस कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने इस दौरान महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। राज्यपाल ने कहा कि हरिद्वार में बच्चे अधिक कुपोषण का शिकार हैं, इस कार्यक्रम और प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं महिला और बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि प्रदेश में लगभग 17 हजार बच्चे कुपोषित हैं। कुपोषण को दूर करने के लिए जनप्रतिनिधियों को भी इसे एक अभियान बनाने की जरूरत है। सरकार का लक्ष्य है कि 2021 तक राज्य को कुपोषण मुक्त किया जाए। कार्यक्रम में कई महिलाओं और बच्चों को पोषण युक्त खाद्य पदार्थ वितरित किए गए और उन्हें महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सचेत भी किया गया।
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL























