सीकर में मंत्री-कलेक्टर के बीच बहस पर कांग्रेस का तंज, डोटासरा बोले- 'बेलगाम हुई ब्यूरोक्रेसी'
Sikar News: सीकर में मंत्री संजय शर्मा ने शिविर में अव्यवस्था देखकर कलेक्टर मुकुल शर्मा को फटकार लगाई. मंत्री ने जनता के काम में देरी पर नाराजगी जताई और मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करने की बात कही.

राजस्थान के सीकर जिले में सरकारी कार्यशैली और प्रशासनिक अनुशासन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. नगर परिषद कार्यालय में आयोजित एक शिविर के दौरान जिला प्रभारी मंत्री संजय शर्मा और जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा के बीच हुई तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है.
घटना उस वक्त की है जब प्रभारी मंत्री संजय शर्मा बिना किसी पूर्व सूचना, सुरक्षा एस्कॉर्ट या सरकारी तामझाम के, एक आम नागरिक की तरह निजी वाहन से नगर परिषद में चल रहे शिविरों का औचक निरीक्षण करने पहुँचे. मंत्री को अचानक सामने देख वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए. निरीक्षण के दौरान मंत्री ने पाया कि शिविर में आए आम लोगों के काम अटके हुए हैं और चारों तरफ अव्यवस्थाओं का बोलबाला है. जनता की शिकायतों को सुनकर मंत्री का पारा चढ़ गया.
मंत्री-कलेक्टर के बीच बहस
वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि जब जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, तो मंत्री संजय शर्मा उन पर बिफर पड़े. मंत्री ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा, "आप रहने दीजिए, कर क्या रहे हो आप? ये काम पहले भी हो सकते थे. जब शिविरों में ही काम नहीं हो रहे तो क्यों शिविर चला रहे हो?" नाराजगी इस कदर बढ़ गई कि मंत्री ने दो-टूक शब्दों में कहा कि वे इस पूरी अव्यवस्था की रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री और एसीएस (ACS) को देंगे.
निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं में गंभीर खामियां सामने आने पर प्रभारी मंत्री खासे नाराज़ नजर आए. सार्वजनिक रूप से जिला कलेक्टर को आड़े हाथों लेते हुए संजय शर्मा ने कहा कि “आप चोरों को संरक्षण दे रहे हैं और ऐसे लोगों को खुली छूट देकर सीधे-सीधे राजस्व का नुकसान करवा रहे हैं.” मंत्री के इस तीखे बयान से मौके पर मौजूद अधिकारी असहज हो गए.
प्रभारी मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में संकेत दिए कि प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इसकी रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएगी. मंत्री की सख्त कार्रवाई और सार्वजनिक फटकार के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप की स्थिति बनी रही, वहीं नगर परिषद और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
कांग्रेस ने कसा तंज
इस घटना ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मुद्दा दे दिया है. राजस्थान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने इस वीडियो को हथियार बनाकर सरकार पर तीखा प्रहार किया. डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी बेलगाम हो चुकी है और जनप्रतिनिधियों की गरिमा दांव पर है. उन्होंने आरोप लगाया कि न तो मुख्यमंत्री की उनके मंत्रियों पर पकड़ है और न ही अधिकारी विधायकों की सुन रहे हैं.
डोटासरा ने अन्य घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि चाहे बीकानेर हो या उदयपुर, हर जगह भाजपा के सांसद और मंत्री अधिकारियों की बेरुखी से परेशान हैं. उन्होंने तंज कसा कि जब मंत्रियों की सुनवाई खुद उनके विभाग में नहीं हो रही, तो वे जनता की समस्याओं का समाधान कैसे करेंगे?
निष्कर्ष
यह घटना केवल एक बहस मात्र नहीं है, बल्कि यह राजस्थान में सत्ता के दो केंद्रों— प्रशासन और शासन—के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करती है. जहाँ एक ओर मंत्री जनता के प्रति जवाबदेही की दुहाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे सरकार की विफलता बता रहा है. फिलहाल, इस 'वीडियो वॉर' ने राजस्थान की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है.
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Source: IOCL






















