पटवारी की जगह विधायक का कैसे हो गया तबादला? राजस्थान के ट्रांसफर सिस्टम की खुली पोल
Rajsthan News: राजस्थान के राजस्व विभाग की ट्रांसफर सूची में पटवारी की जगह विधायक का नाम दर्ज हो गया. गलती सामने आने पर विभाग ने संशोधित आदेश की प्रक्रिया शुरू की, विपक्ष ने सरकार को घेरा.

राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग की तबादला सूची में हुई एक बड़ी प्रशासनिक चूक ने पूरे ट्रांसफर सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस पटवारी नरेंद्र सिंह का तबादला किया जाना था, उसकी जगह डीग-कुम्हेर के विधायक डॉ. शैलेश सिंह का नाम ही आदेश में दर्ज हो गया.
सूची सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया. अधिकारियों ने तत्काल संशोधित आदेश जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
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सिफारिश पटवारी की, आदेश में चढ़ गया विधायक का नाम
जानकारी के अनुसार, विधायक डॉ. शैलेश सिंह ने अपने विधानसभा क्षेत्र के पटवारी नरेंद्र सिंह के तबादले की सिफारिश की थी. लेकिन ट्रांसफर आदेश तैयार करते समय कथित तौर पर डेटा एंट्री या टाइपिंग की गलती के कारण पटवारी की जगह विधायक का नाम ही सूची में दर्ज हो गया. इस चूक के चलते संबंधित पटवारी नई जगह कार्यभार भी ग्रहण नहीं कर पा रहा है, क्योंकि आधिकारिक आदेश में उसका नाम ही नहीं है.
एक नहीं, कई गड़बड़ियां आईं सामने
सूत्रों के मुताबिक, इस बार जारी तबादला सूची में केवल यही गलती नहीं हुई. कई कर्मचारियों के नाम, पद और पदस्थापन स्थान से जुड़ी अन्य त्रुटियां भी सामने आई हैं. कहीं कर्मचारी का नाम गलत दर्ज हुआ तो कहीं पोस्टिंग स्थल बदल गया. इससे विभाग की कार्यप्रणाली और ट्रांसफर प्रक्रिया की सटीकता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.
विभाग ने मानी गलती, संशोधन की तैयारी
मामला सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने इसे टाइपिंग और डेटा एंट्री की गलती बताया है. अधिकारियों का कहना है कि संशोधित आदेश जल्द जारी किया जाएगा ताकि प्रभावित कर्मचारी कार्यभार ग्रहण कर सके. हालांकि तब तक संबंधित पटवारी की जॉइनिंग अटकी हुई है.
विपक्ष ने सरकार को घेरा
इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने आरोप लगाया कि प्रदेश में तबादला प्रक्रिया पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी है. उन्होंने कहा कि कई विभागों में पारदर्शिता की कमी है और सरकार को पूरे ट्रांसफर सिस्टम की जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.
एक साधारण दिखने वाली प्रशासनिक गलती ने राजस्थान की तबादला प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इस चूक से क्या सबक लेती है.
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