बस ऑपरेटर्स की हड़ताल से यात्री परेशान, होली से पहले मुश्किल हुआ सफर, कब तक जारी रहेगी स्ट्राइक?
Rajasthan Bus Strike: राजस्थान में प्राइवेट बस हड़ताल तीसरे दिन भी जारी है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का कहना है कि अधिकारियों के भ्रष्टाचार की वजह से बस ऑपरेटर्स हड़ताल पर गए हैं.

राजस्थान में प्राइवेट बस ऑपरेटर्स की हड़ताल आज (26 फरवरी) लगातार तीसरे दिन भी जारी है. ऑपरेटर्स का आरोप है कि परिवहन विभाग के अधिकारी जैसलमेर की घटना के बाद लगातार उनका उत्पीड़न कर रहे हैं. जिसकी वजह से उन्हें तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. बहरहाल प्राइवेट बसों की हड़ताल का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है. हड़ताल को लेकर सियासी संग्राम भी छिड़ा हुआ है. दावा किया जा रहा है कि हड़ताल अकेले सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि गुजरात और मध्य प्रदेश के साथ ही यूपी के भी कुछ हिस्सों में है.
दरअसल, राजस्थान के जैसलमेर जिले में पिछले साल अक्टूबर महीने में चलती बस में आग लगने से उसमें सवार दो दर्जन से ज्यादा यात्रियों की मौत हो गई थी. इसके बाद जयपुर समेत कई जगहों पर चलती बस में आग लगने की दूसरी घटनाएं भी सामने आई थी. इन घटनाओं के बाद परिवहन विभाग नींद से जागा था और उसने प्राइवेट बसों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था. हालांकि प्राइवेट बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन का साफ आरोप है कि नियमों का पालन कराने की आड़ में उनका उत्पीड़न किया जा रहा है.
छोटी-छोटी कमियों को लेकर किया जा रहा चालान- राजेंद्र शर्मा
राजस्थान प्राइवेट बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा के मुताबिक छोटी-छोटी कमियों पर उनका एक से डेढ़ लाख रुपए तक का चालान कर दिया जा रहा है. उनकी बसों को सीज कर दिया जा रहा है. परिवहन विभाग के अधिकारी उनसे बदसलूकी करते हैं. अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा और पूर्व अध्यक्ष आशुतोष उर्फ आशु के मुताबिक यात्रियों की सुरक्षा हमेशा से उनकी प्राथमिकता रही है.
परिवहन विभाग जो नए नियम लागू करना चाहता है, उससे उन्हें एतराज नहीं है, वह उन पर काम भी कर रहे हैं, लेकिन हर काम के लिए अलग-अलग समय निर्धारित होना चाहिए और उसके बाद ही कार्रवाई होनी चाहिए. उत्पीड़न कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
बस ऑपरेटर्स और सरकार के बीच टकराहट का आम लोग भुगत रहे खामियाजा
दूसरी तरफ प्राइवेट बस ऑपरेटर्स और सरकार के बीच टकराहट का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. दावा किया जा रहा है कि हड़ताल से राजस्थान की तकरीबन पैंतीस हजार बसें प्रभावित हैं. इन बसों पर रोजाना दस से बारह लाख यात्री सफर करते हैं. होली के त्योहार से ठीक पहले हुई हड़ताल की वजह से यात्री परेशान हैं. उन्हें ना तो ट्रेनों में टिकट मिल पा रहा है और ना ही रोडवेज की बसें पर्याप्त संख्या में हैं. यात्रियों का कहना है कि सरकार और ऑपरेटर्स को साथ बैठकर कोई रास्ता निकालना चाहिए.
सरकार सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर कर रही काम- प्रेमचंद बैरवा
दूसरी तरफ इस मुद्दे को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है. राजस्थान विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने प्राइवेट बसों की हड़ताल के मुद्दे को उठाया है और सरकार से इसे जल्द से जल्द खत्म कराए जाने की मांग की है. विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली का कहना है कि अधिकारियों के भ्रष्टाचार की वजह से प्राइवेट बस ऑपरेटर्स हड़ताल पर गए हैं. बस मालिकों का उत्पीड़न बंद होना ही चाहिए. सरकार को जल्द ही कोई ठोस पहल करनी चाहिए.
इस बारे में राज्य के परिवहन मंत्री और डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा का कहना है कि सरकार सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर ही काम कर रही है. बातचीत कर जल्द कोई रास्ता निकाला जाएगा. अब देखना यह होगा कि प्राइवेट बसों की हड़ताल कब खत्म होती है और कब परेशानियों से जूझ रहे लोगों को राहत मिलती हैं.
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