जयपुर में कदम-कदम पर मौत को दावत देने वाले स्कूल! देखें ऐसे ही दो विद्यालयों की ग्राउंड रिपोर्ट
Rajasthan News: राजस्थान के सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतें खतरे का सबब बनी हुई हैं. झालावाड़ और जैसलमेर में हादसों से छात्रों की जान गई है. जयपुर जैसे शहरों में भी कई स्कूल जर्जर हैं.

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग्स के गिरने का सिलसिला लगातार जारी है. झालावाड़ और जैसलमेर में हुए हादसों में आठ छात्रों को जान गंवानी पड़ी है. बारां समेत कई जिलों में स्कूलों की जर्जर इमारतों का हिस्सा गिर चुका है. वहीं, अब भरतपुर के बयाना में सरकारी स्कूल की बिल्डिंग में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र की छत गिर गई है.
इसके अलावा राजधानी जयपुर समेत राज्य के कई महानगरों के शहरी इलाकों के भवन इतनी जर्जर हालत में है कि वह कभी भी गिर सकते हैं.
जर्जर स्कूल में आधी जगह पर बैठने को मजबूर बच्चे
वर्ल्ड क्लास सिटी कहे जाने वाले जयपुर में सीएम और शिक्षा मंत्री के साथ ही तमाम बड़े अधिकारी भी बैठते हैं, लेकिन यहां भी तमाम स्कूलों के क्लासरूम इतनी जर्जर हालत में हैं कि इनमें से किसी की दीवारें दरक चुकी हैं तो किसी की छत गिरने की कगार पर है.
झालावाड़ हादसे के बाद कई स्कूलों के क्लास रूम को जर्जर घोषित कर पूरी तरह बंद कर दिया गया है. पहले से पांचवीं तक के बच्चे किसी एक क्लासरूम या ऑफिस के आधे हिस्से में बैठकर ही पढ़ाई कर रहे हैं.
झालावाड़ जैसा हादसा जयपुर में भी हो सकता है!
स्कूलों का हाल यह है कि एक कमरे में आधा हिस्सा स्टोर रूम बना हुआ है और आधे कमरे में पांच क्लास के बच्चे शिक्षा हासिल करने की रस्म निभा रहे हैं. स्मार्ट सिटी जयपुर के सरकारी स्कूलों की बदहाली का जायजा लेने के लिए एबीपी न्यूज़ की टीम आज जयपुर शहर के जवाहर नगर इलाके में स्थित उन दो स्कूलों में गई, जो मुख्यमंत्री ऑफिस, सचिवालय-विधानसभा, शिक्षा संकुल और शिक्षा मंत्री के घर से महज़ चार से पांच किलोमीटर की दूरी पर है.
दोनों जगह पूरे स्कूल आधे कमरे में ही चलते मिले. छतों और दीवारों की हालत देखकर कहा जा सकता है कि यह कभी भी झालावाड़ की तरह गिर सकती हैं. आधे कमरे में चल रहे स्कूलों की हालत गाय - भैंसों के तबेलो से बदतर नजर आई.
पहला स्कूल: जयपुर शहर के जवाहर नगर इलाके में टीला नंबर चार पर स्थित प्राइमरी स्कूल
टीला नंबर चार की कच्ची बस्ती में स्थित प्राइमरी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र कुछ दिनों पहले तक दो कमरों में चलता था. एक कमरे में ऑफिस बनाया गया था. सरकारी फाइलों में यह स्कूल अवैध जमीन पर बना है, क्योंकि जमीन का मालिकाना हक वन विभाग का है.
कमरे की दीवारें लोहे की प्लेट्स से खड़ी की गई थीं, जबकि छत पर टिन शेड लगाया गया था. दोनों क्लासरूम इतनी जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं कि उनकी छत उखड़ने लगी है और दीवारें टूट रही हैं.
बारिश के दिनों में दोनों क्लासरूम की छतों से पानी गिरता है और कमरे तालाब बन जाते हैं. झालावाड़ की घटना के बाद दोनों क्लासरूम बंद कर दिए गए हैं. क्लासरूम के बाहर की जगह को केबल के जरिए बैरिकेड कर दिया गया है और दोनों के ही बाहर क्लास रूम्स के जर्जर होने का पोस्टर चस्पा कर दिया गया है.
कमरे का आधा हिस्सा स्टोर रूम, आधे में चलती है क्लास
पहली से पांचवी क्लास और आंगनबाड़ी की कक्षाएं अब ऑफिस रूम में संचालित की जा रही हैं. ऑफिस रूम की आधी जगह को स्टोर रूम की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है और बाकी के आधे हिस्से में क्लास संचालित की जा रही हैं.
चूहों और नेवलों ने क्लास में बनाए गड्ढे
इस स्कूल में दो टीचर हैं. गर्मी के सीजन में भी पानी की टंकी सूखी पड़ी हुई है. जिस कमरे में क्लास चल रही है, उनमें चूहों और नेवलों ने बड़े-बड़े गड्ढे कर रखे हैं. बच्चे जान जोखिम में डालकर यहां पढ़ाई करने को मजबूर हैं.
स्कूल की हालत के बारे में हमने कवरेज शुरू की तो हेडमास्टर नीरज शर्मा रोकने लगे. कभी वह कमरों का दरवाजा बंद करते तो कभी चीखने चिल्लाने लगते और कभी अपने मोबाइल फोन से हमारी ही टीम की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर देते.
कुछ देर में उन्होंने इलाके की महिला पार्षद के पति को बुला लिया. पार्षद पति फूलचंद ने हमें अपना परिचय पार्षद के तौर पर दिया और खुद को कांग्रेस का नेता भी बताया. उन्होंने मौजूदा सरकार और अफसरों पर आरोपों की बौछार कर दी, लेकिन जब हमने उन्हें कहा कि डेढ़ साल पहले तक सुबह में कांग्रेस पार्टी की ही सरकार थी तो उनसे कोई जवाब देते नहीं बना.
दूसरा स्कूल: जयपुर शहर के जवाहर नगर इलाके के टीला नंबर 6 का गर्ल्स स्कूल
जयपुर शहर के जवाहर नगर इलाके के ही टीला नंबर 6 में चल रहे लड़कियों के स्कूल की हालत भी कमोबेश वैसी ही है. इस स्कूल तक पहुंचने के लिए कचरे के ढेर और नाले नालियों को पार कर जाना होता है. पहली से पांचवीं क्लास तक का यह स्कूल भी सिर्फ एक कमरे में सिमटा हुआ है.
यहां भी कमरे का कुछ हिस्सा स्टोर रूम की तरह इस्तेमाल किया जाता है. क्लासरूम पहली मंजिल पर है लेकिन एंट्री गेट से लेकर क्लासरूम तक दीवारें और छतें जगह-जगह से क्रैक है.
कमरे, सीढ़ियों, दीवारों में दरार
स्कूल बिल्डिंग के गेट से लेकर नीचे के कमरे, सीढ़ियों और क्लासरूम तक की दीवारों में दरार है और छतों के प्लास्टर उखड़े हुए हैं. छतों का जो बेस है उनमें भी क्रैक जगह-जगह दिखाई दे रहे हैं. स्कूल बिल्डिंग की हालत कतई अच्छी नहीं है.
सरकारी चाबुक के डर से टीचर्स तो मुंह बंद रखने को मजबूर हैं, लेकिन यहां पढ़ाई करने वाले बच्चों ने यह जरूर बताया कि क्लासरूम में बैठने से उन्हें डर लगता है.
बारिश में तालाब बन जाते हैं क्लासरूम
बच्चों के मुताबिक, उन्हें इस बात का डर सताता रहता है कि छत और दीवार कभी भी गिर सकती हैं. बारिश के दिनों में स्कूल कैंपस में कई कई फीट तक पानी भर जाता है और यहां छुट्टी करनी पड़ जाती है. पिछले तीन हफ्तों में जल भराव की वजह से ज्यादातर दिन स्कूल बंद ही रहे.
यहां कुल 70 बच्चों का दाखिला हुआ है और इन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी तीन टीचर्स पर है. इस स्कूल के टीचर्स ने संसाधन नहीं होने के चलते साफ सफाई के बेहतर इंतजाम कर रखे थे. क्लासरूम का माहौल भी बेहतर नज़र आया.
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Source: IOCL





















