राजस्थान कांग्रेस में घमासान? प्रभारियों को बधाई तक नहीं, जानें- पूरा मामला
Rajasthan Congress: राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी कलह सतह पर आ गई है. हाल ही में नियुक्त किए गए अग्रिम संगठनों के प्रभारियों को संबंधित संगठनों के अध्यक्षों द्वारा बधाई तक नहीं दी गई.

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस में क्या सब कुछ ठीक चल रहा है? इस सवाल का जवाब तो कांग्रेस नेता ही जानें, लेकिन बाहर से जो दिखाई दे रहा है वह कुछ ठीक नजर नहीं आ रहा. प्रदेश कांग्रेस के लिए अक्सर कहा जाता है कि यहां हर नेता की अपनी डफली अपना राग है.
यहां पार्टी से बढ़कर नेता नजर आता है. दरअसल, बीते दिनों प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से कांग्रेस के चार अग्रिम संगठनों के प्रभारियों की नियुक्तियां की गई थी. इन नियुक्तियों के पश्चात अंदर खाने सियासत शुरू हो गई. जिन अग्रिम संगठनों का इन्हें प्रभारी बनाया गया था उन संगठनों के मुखियाओं ने प्रभारियों को बधाई देना भी मुनासिब नहीं समझा, इसके बाद कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान साफ दिखाई देने लगी.
प्रभारी और संगठन प्रमुखों के बीच तनातनी
बीते दिनों कांग्रेस के अग्रिम संगठन यूथ कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के रूप में देशराज मीणा को जिम्मेदारी दी गई थी, जिम्मेदारी मिलने के बाद देशराज मीणा को यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अभिमन्यु पूनिया की ओर से ना तो टेलीफोन किया गया और ना ही सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई दी गई.
जब देशराज मीणा से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अभिमन्यु पूनिया ने उन्हें फोन नहीं किया, उन्होंने खुद अभिमन्यु पूनिया को टेलीफोन किया था और जल्द ही उनके साथ मीटिंग करने की बात कही.
हालांकि सोशल मीडिया पर बधाई ना देने को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है. हो सकता है वह भूल गए हों. दूसरी तरफ एनएसयूआई के प्रदेश प्रभारी के रूप में कांग्रेस महासचिव राहुल भाकर को प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन यहां भी वही खींचतान नजर आई.
एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने ना तो टेलीफोन पर प्रभारी को बधाई दी और ना ही सोशल मीडिया हैंडल पर.
महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सारिका सिंह कि अगर बात करें तो उन्होंने भी महिला कांग्रेस की प्रभारी प्रतिष्ठा यादव को ना तो टेलीफोन किया और ना ही सोशल मीडिया पर बधाई दी.
मुख्य संगठन और अग्रिम संगठनों के बीच दूरी बनी हुई
आपको बता दें कि कांग्रेस के मुख्य संगठन और अग्रिम संगठनों के बीच हमेशा से दूरी रही हैय ऐसे में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने चारों अग्रिम संगठनों के प्रभारियों की नियुक्तियां की जिसके माध्यम से कांग्रेस के मुख्य संगठन और अग्रिम संगठन के बीच यह प्रभारी सेतु का काम कर सकें, लेकिन उनकी नियुक्ति के बाद तो नया विवाद छिड़ गया है.
Source: IOCL
























