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राजस्थानः चुनाव से पहले कांग्रेस के 105 विधायकों का लिटमस टेस्ट; एजेंसी के 13 सवाल बदलेंगे रिवाज?

2013 में कांग्रेस ने 96 में से 75 विधायकों को टिकट दिया था, जिसमें से सिर्फ 5 विधायक ही चुनाव जीतने में सफल रहे थे. 2003 में भी कांग्रेस के कई सीटिंग विधायकों को हार मिली थी.

आंतरिक कलह से जूझ रही कांग्रेस ने चुनावी साल में राजस्थान के अपने विधायकों से फीडबैक लेना शुरू कर दिया है. 5 साल में सरकार बदलने के रिवाज को खत्म करने के लिए पार्टी ने यह प्रयोग शुरू किया है. इसके लिए पार्टी सभी विधायकों और मंत्रियों से 13 सवालों का जवाब मांग रही है.

इन्हीं सवालों के जवाब के आधार पर चुनाव में कांग्रेस आगे की रणनीति तैयार करेगी. कांग्रेस ने 2023 विधानसभा चुनाव में 156 सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा है. कांग्रेस अशोक गहलोत के किए काम को आधार बनाकर विधानसभा का चुनाव लड़ने की तैयारी में है.

विधायकों से प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा फीडबैक ले रहे हैं. जिलेवार विधायकों को बुलाकर सभी मसलों पर राय ली जा रही है. कांग्रेस ने फीडबैक कार्यक्रम का नाम संवाद रखा है. 

राजस्थान में कांग्रेस के पास अभी 105 विधायक हैं. सभी विधायकों के रिपोर्ट कार्ड इसी फीडबैक के जरिए हाईकमान तक पहुंचेगे. 

चुनाव से पहले विधायकों का लिटमस टेस्ट
राजस्थान में सरकार बदलने के रिवाज से विधायकों का परफॉर्मेंस भी खराब हो जाता है. सरकार विरोधी लहर में भारी तादाद में विधायक चुनाव हारते हैं. अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस 2003 और 2013 का चुनाव हार चुकी है.

2013 में कांग्रेस ने 96 में से 75 विधायकों को टिकट दिया था, जिसमें से सिर्फ 5 विधायक ही चुनाव जीतने में सफल रहे थे. गहलोत कैबिनेट के 31 मंत्रियों को भी हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि, मुख्यमंत्री और 4 मंत्री विधायकी बचाने में कामयाब रहे थे. 

इनमें भरत सिंह, शांति धारीवाल, भंवरलाल मेघवाल, परसादीलाल, डॉ. जितेंद्र सिंह, राजेंद्र पारीक, हेमाराम और हरजीराम बुरड़क जैसे दिग्गज नेता शामिल थे. 

2003 में भी कांग्रेस का यही हाल हुआ था. कांग्रेस ने 156 विधायकों में से अधिकांश को फिर से टिकट दिया था, लेकिन सिर्फ 34 विधायक सीट बचा पाने में कामयाब हुए थे. 2003 के चुनाव में गहलोत कैबिनेट के 19 मंत्री चुनाव हार गए थे.

इनमें गुलाब सिंह शक्तावत, हरेंद्र मिर्धा, डॉ. कमला बेनीवाल, डॉ. जितेंद्र सिंह, भंवरलाल मेघवाल, जनार्दन सिंह गहलोत, माधव सिंह दीवान, हबीबुर्रहमान जैसे दिग्गज शामिल थे. 

कांग्रेस 2003 और 2013 के रिजल्ट से सबक लेकर ही इस बार विधायकों के जीत पर ज्यादा फोकस कर रही है. इसलिए चुनाव से 7 महीने पहले विधायकों से फीडबैक लिया जा रहा है. 

बैकग्राउंड और कामों के बारे में दी जा रही जानकारी
फीडबैक में शामिल होने आ रहे विधायकों के बारे में प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा प्रभारी सुखजिंदर रंधावा को जानकारी दे रहे हैं. इस दौरान विधायक का बैकग्राउंड और उनके किए गए कामों के बारे में जानकारी दी जा रही है. 

हाल ही में बैकग्राउंड के बारे में जानकारी दिए जाने पर सचिन पायलट गुट के एक विधायक ने मीटिंग में ही हंगामा खड़ा कर दिया था, जिसके बाद प्रभारी को उसे मनाना पड़ा. 

एक ही सवाल- सरकार कैसे होगी रिपीट?
मीटिंग में शामिल हो रहे विधायकों के मुताबिक प्रभारी सुखजिंदर रंधावा और अशोक गहलोत एक ही सवाल पूछ रहे हैं- सरकार कैसे रिपीट होगी? इसके बाद विधायकों के सुझाव को प्रभारी नोट करते हैं.

मुख्यमंत्री विधायकों से एंटी इनकंबैंसी और कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी विधायकों से जानकारी ले रहे हैं. बैठक में कई विधायकों ने मंत्रियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और उसे हटाने की मांग भी रखी है.

राजस्थान में पिछले 30 सालों से हरेक 5 साल बाद सरकार बदल जाती है. रिवाज की इस चपेट में कांग्रेस और बीजेपी दोनों आ चुकी है. 

एजेंसी हायर, बनाए गए हैं 13 सवाल
अशोक गहलोत ने चुनावी कमबैक के लिए डिजाइन बॉक्स नामक एक एजेंसी को हायर किया है. यही एजेंसी अशोक गहलोत का सोशल मीडिया अकाउंट भी देखती है. एजेंसी ने विधायकों के परफॉर्मेंस का एक सर्वे भी किया है. साथ ही विधायकों से भी सवालों के जरिए अपना आकलन करने के लिए कहा है.

एजेंसी की सलाह पर 13 सवाल बनाए गए हैं, जिसका जवाब विधायकों से लिखित में लिया जा रहा है. आइए सवालों के बारे में जानते हैं...

1. आपके विधानसभा क्षेत्र में धार्मिक और जातिगत समीकरण क्या हैं?
2. अभी अपने क्षेत्र में अपनी स्थिति कैसी मानते हैं? अगर 10 में से नंबर देने हो तो कितने देंगे?
3. आपके क्षेत्र में अशोक गहलोत सरकार की किन 5 योजनाओं का सबसे अधिक प्रभाव है?
4. हाल में बने19 नए जिलों के संबंध में आपका कोई सुझाव है?
5. ईआरसीपी का मुद्दा बनाने के लिए आपने क्या किया? ( यह सवाल उन जिलों के विधायकों से पूछा जा रहा है, जहां कॉरिडोर बनना है)
6. अपने खिलाफ एंटी इनकंबैंसी रोकने के लिए क्या प्लान रखते हैं?
7. आपकी सीट पर क्या बीजेपी के अलावा क्या कोई तीसरा फोर्स भी है?
8. आपके सोशल मीडिया अकाउंट की स्थिति क्या है?
9. क्या आप खुद सोशल मीडिया अकाउंट चलाते हैं, नहीं तो एडमिन का संपर्क नंबर उपलब्ध कराएं.
10. सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबैंसी है? इसे कम करने के लिए आपका कोई सुझाव?
11. महंगाई राहत कैंप को सफल बनाने के लिए आपकी क्या रणनीति है?
12. चुनाव को लेकर जनता का मूड क्या है, कौन जीत सकता है?
13. फीडबैक से जुड़ा कोई विशेष सुझाव, जो आप देना चाहते हैं?

फीडबैक से तय होगा चुनावी भविष्य?
विधायकों के फीडबैक को एजेंसी विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार करेगी और फिर उस रिपोर्ट को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस हाईकमान को सौंपा जाएगा. इसी रिपोर्ट के सहारे विधायकों का भविष्य तय होगा, क्योंकि...

1. रिपोर्ट में जिन विधायकों के खिलाफ एंटी इनकंबैंसी की बात होगी, उन विधायकों का टिकट काटा जाएगा. कांग्रेस पहले के चुनावों में ऐसा कर चुकी है.

2. अगर किसी विधायक के विधानसभा में सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबैंसी होगी, तो भी उस पर गाज गिर सकती है. जिला प्रभारी भी नप सकते हैं.

3. कई विधायकों ने मंत्रियों के खिलाफ आवाज उठाई है. अगर, रिपोर्ट में सच पाया गया तो कैबिनेट विस्तार में कुछ मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है. राज्य में कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज है.

4. अगर सभी जगहों से एंटी इनकंबैंसी की बात सामने आती है तो पार्टी आगे की रणनीति में बदलाव कर सकती है. 

फीडबैक की जरूरत क्यों पड़ी?
राजस्थान में सितंबर 2022 में मुख्यमंत्री बदले जाने की चर्चा जोरों पर थी, लेकिन 80 विधायकों के एकजुटता की वजह से अशोक गहलोत की कुर्सी बच गई. गहलोत ने इसके बाद ताबड़तोड़ कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा कर दी.

अशोक गहलोत ने 19 नए जिले बनाने का भी ऐलान कर दिया, जिसके बाद से कांग्रेस आलाकमान राजस्थान मॉडल के गुणगान में लग गई. कांग्रेस हाईकमान ने अशोक गहलोत के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी.

इसके बाद गहलोत चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं. चुनावी तैयारी के सिलसिले में ही इस फीडबैक कार्यक्रम को देखा जा रहा है. पार्टी चुनाव में किन मुद्दों को लेकर लोगों के बीच जाएगी, वो भी इसी कार्यक्रम में तय होगा.

कांग्रेस फीडबैक कार्यक्रम के जरिए विधायकों का डेटा हाईकमान के पास भेजेगी. इस डेटा के सहारे कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी नाम तय करेगी और फिर इलेक्शन कमेटी टिकट देने का फैसला करेगी. 

कांग्रेस प्रभारी रंधावा पहले ही कह चुके हैं कि जो विधायक सक्रिय होगा, उसे ही टिकट दिया जाएगा. ऐसे में यह फीडबैक कार्यक्रम विधायकों के लिए बहुत जरूरी माना जा रहा है. 

अशोक गहलोत बोले- 150 से ज्यादा सीटों पर जीतेंगे
विधायकों के फीडबैक कार्यक्रम के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दावा किया है कि राजस्थान में कांग्रेस को 150 सीटों पर जीत मिलेगी. गहलोत ने कहा कि हमने सर्वे करा लिया है और 150 सीटों पर जीत रहे हैं.

गहलोत ने आगे कहा कि महंगाई राहत कैंप राजस्थान के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा. उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास चुनाव लड़ने के लिए कोई मुद्दा ही नहीं है. 

अशोक गहलोत ने कहा कि मेरे नेतृत्व में कांग्रेस 1998 में 156 सीटों पर जीती थी, उसे फिर से दोहराया जाएगा. 

बड़ा सवाल- सचिन पायलट गुट बागी, उसका क्या?
पिछले 4 साल से कांग्रेस की बड़ी समस्या गुटबाजी रही है. सचिन पायलट गुट अब भी बागी है. हाल ही में पायलट ने अशोक गहलोत सरकार पर भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया था. 

पायलट ने इसके लिए एक दिन का अनशन भी रखा था. सचिन पायलट गुट के करीब 20 विधायक अभी कांग्रेस में हैं. पायलट के अलग पार्टी बनाने की भी अटकलें मीडिया में चल रही है. ऐसे में सवाल है कि पायलट गुट का क्या होगा?

फीडबैक के बाद अगर पार्टी टूटती है, तो कांग्रेस की सरकार कैसे रिपीट होगी? पूर्वी राजस्थान में सचिन पायलट की जबरदस्त पकड़ मानी जाती है. पूर्वी राजस्थान के 8 जिलों में विधानसभा की करीब 60 सीटें हैं, जहां 2013 में कांग्रेस का सबसे बढ़िया परफॉर्मेंस था.

अगर पायलट बगावत पर उतरते हैं, तो राजस्थान में कांग्रेस को 50-60 सीटों का नुकसान हो सकता है. हालांकि, कांग्रेस हाईकमान पायलट को मना लेने का दावा कर रही है. 

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