अब अलवर में CJP का प्रदर्शन, आशुतोष रांका कर रहे नेतृत्व
CJP Protest in Rajasthan: राजस्थान के अलवर में धरने पर बैठी कॉकरोच जनता पार्टी ने पूछा है कि सरकार बताये कब तक स्कूल ठीक करेगी? अलवर के थानागाजी विधानसभा के जोधावास स्कूल में जर्जर छत गिर गई है.

राजस्थान में भी अब कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकारी स्कूलों में अव्यवस्थाओं और खराब सड़कों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. अलवर के जोधावास में सीजेपी के समर्थक धरने पर बैठे हैं. सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. अलवर के थानागाजी विधानसभा के जोधावास स्कूल में जर्जर छत की पट्टी गिर गई है. गनीमत रही कि यहां बच्चे बाल-बाल बच गए. स्कूल की जर्जर हालत को लेकर ग्रामीणों में भी भारी आक्रोश दिख रहा है.
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, ''जोधावास, थानागाजी स्थित सरकारी स्कूल की कल छत गिर गई. चार साल से स्कूल जर्जर हालत में है. बच्चियां नदी पार करके स्कूल आती हैं क्योंकि सड़क नहीं है.''
जोधावास, थानागाज़ी स्थित सरकारी स्कूल की कल छत गिर गई। चार साल से स्कूल जर्जर हालत में है। बच्चियाँ नदी पार करके स्कूल आती है। क्योंकि सड़क नहीं है।
— Ashutosh Ranka (@AshutoshRanka) August 14, 2026
DM मैडम @DMDCAlwar कह रही है कि कमरा बनने में छह महीने लगेगा और सड़क बनने में साल भर लगेगा। परसो अमित शाह जी पास ही अलवर आ रहे है।… pic.twitter.com/DZo91C2wwE
बच्चों का भविष्य ऐसे बर्बाद नहीं होने देंगे- आशुतोष रांका
उन्होंने आरोप लगाते हुए आगे लिखा, ''अलवर की डीएम मैडम कह रही हैं कि कह रही हैं कि कमरा बनने में छह महीने लगेगा और सड़क बनने में साल भर लगेगा. परसो रैली करने अमित शाह जी पास ही अलवर आ रहे है. अगर रैली यहां होती तो भी क्या DM मैडम एक साल ही बोलती? मैं अपने टीम के साथ धरने पर हूं. सरकार बताये कब तक स्कूल ठीक करेगी और सड़क कब तक बनायेगी. हमारे बच्चों का भविष्य ऐसे बर्बाद नहीं होने देंगे.''
स्कूल भवन को पहले ही घोषित किया जा चुका जर्जर- ग्रामीण
अलवर जिले के थानागाजी क्षेत्र के ग्राम जोधावास स्थित राजकीय स्कूल में गुरुवार (13 अगस्त) को बड़ा हादसा होने से टल गया. स्कूल भवन की जर्जर छत की एक पट्टी अचानक भरभराकर नीचे गिर गई. गनीमत रही कि घटना के समय वहां कोई बच्चा मौजूद नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था. ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन को पहले ही जर्जर घोषित किया जा चुका है, लेकिन अभी तक इसे ध्वस्त नहीं किया गया.
स्कूल के एक कमरे में ग्राम पंचायत ऑफिस भी संचालित
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी जर्जर भवन के एक कमरे में ग्राम पंचायत कार्यालय भी संचालित किया जा रहा है. स्कूल परिसर में दोनों जर्जर भवनों के बीच एक हैंडपंप लगा हुआ है, जहां बच्चे पानी पीने के लिए आते हैं. ऐसे में हर समय किसी बड़े हादसे का खतरा बना हुआ रहता है. ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या प्रशासन और शिक्षा विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं?
लंबे वक्त से बदहाल हालत में स्कूल!
ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल की हालत लंबे समय से बदहाल है. चार साल पहले स्कूल को सीनियर सेकेंडरी का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन आज तक एक भी लेक्चरर का पद स्वीकृत नहीं किया गया है. स्कूल में प्रिंसिपल भी नहीं हैं. जानकारी के अनुसार, द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के पांच पद खाली हैं, जबकि सिर्फ एक द्वितीय श्रेणी शिक्षक कार्यरत हैं. ऐसे में तृतीय श्रेणी के शिक्षक ही 12वीं कक्षा तक के छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
स्कूली बच्चों पर भारी बरसात का मौसम!
स्कूल में स्टूडेंट के बैठने के लिए सिर्फ तीन कमरे हैं और वे भी बारिश के दौरान टपकते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि 12वीं तक के स्कूल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. ग्रामीणों ने एक अन्य गंभीर समस्या की ओर भी ध्यान दिलाया है. स्कूल पहुंचने के लिए बच्चों को रूपारेल नदी पार करनी पड़ती है. नदी पर पुलिया नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंच पाते.
ग्रामीणों का दावा है कि चार महीने के बरसात के मौसम में बच्चे मुश्किल से 20 दिन ही स्कूल जा पाते हैं. ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में एसडीएम, जिला कलेक्टर और स्थानीय विधायक को कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं.
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