अजमेर दरगाह मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई, CAG ने कानूनी प्रक्रिया के पालन का किया दावा
Rajasthan News: अजमेर शरीफ दरगाह ऑडिट विवाद पर दरगाह समिति और CAG के बीच कानूनी टकराव.दिल्ली हाई कोर्ट में दरगाह समिति की याचिका का किया विरोध, कहा- ऑडिट सवैधानिक तरीके से हो रहा है.

Ajmer Sharif Dargah News: अजमेर शरीफ दरगाह के खातों की जांच को लेकर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) और दरगाह समिति के बीच कानूनी टकराव गहराता जा रहा है. दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान CAG ने दरगाह समिति की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि ऑडिट प्रक्रिया पूरी तरह से संवैधानिक ढंग से की जा रही है.
CAG का दावा- कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई
जस्टिस सचिन दत्ता की अदालत में हुई सुनवाई में CAG की ओर से बताया गया कि ऑडिट से पहले अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा 14 मार्च 2024 को याचिकाकर्ता को सूचना दी गई थी और उन्हें आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी प्रदान किया गया था. मंत्रालय ने दरगाह के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए ऑडिट की सिफारिश की थी.
CAG के वकील ने बताया कि याचिकाकर्ता ने अपनी आपत्ति मंत्रालय को सौंपी थी, जिसे 17 अक्टूबर 2024 को खारिज कर दिया गया. साथ ही उन्होंने कहा कि ऑडिट की अनुमति राष्ट्रपति से प्राप्त की गई थी और वित्त मंत्रालय ने 30 जनवरी 2025 को पत्र द्वारा CAG को अधिकृत किया था.
मस्जिद कमेटी ने किया दलील का विरोध
वहीं याचिकाकर्ता अंजुमन मोइनिया फखरिया चिश्तिया खादिम ख्वाजा साहिब सैयदजादगान दरगाह शरीफ, अजमेर का आरोप है कि CAG की टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के उनके कार्यालय का निरीक्षण किया, जो कि CAG अधिनियम 1971 और सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के खिलाफ है. याचिका में कहा गया है कि ऑडिट प्रक्रिया शुरू करने से पहले मंत्रालय को स्पष्ट रूप से CAG को लिखित अनुरोध भेजना चाहिए था, जिसमें ऑडिट की शर्तें और नियम शामिल होते. इसके बाद इन शर्तों को याचिकाकर्ता को भेजा जाना चाहिए था ताकि वे अपनी आपत्ति दर्ज करा सकें.
कोर्ट ने ऑडिट प्रक्रिया पर रोक लगाने का दिया था संकेत
पिछली सुनवाई में अदालत ने संकेत दिया था कि वह CAG द्वारा की जा रही ऑडिट प्रक्रिया पर रोक लगाने के पक्ष में है. अदालत ने CAG के वकील से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख पेश करने को कहा था. दरगाह समिति का कहना है कि उन्हें अब तक ऑडिट की शर्तें नहीं सौंपी गई हैं. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है और अगली सुनवाई 7 मई को निर्धारित की है.
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