उद्धव ठाकरे BMC चुनाव के लिए पार्टी की मुंबई इकाई में करेंगे बदलाव, इन्हें मिलेगा मौका
BMC Election 2025: बीएमसी चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे की पार्टी मुंबई संगठन में बड़े बदलाव कर रही है. सूत्रों के मुताबिक शिवसेना यूबीटी नए चेहरों को मौका देना चाहती है.

Uddhav Thackeray On BMC Election 2025: महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद अब सभी सियासी दल मुंबई जीतने की तैयारियों में जुट गए हैं. इस बीच उद्धव ठाकरे की पार्टी ने भी बीएमसी चुनाव को लेकर कमर कस ली. दरअसल, इस बार होने वाले बीएमसी के चुनाव आदित्य ठाकरे के नेतृत्व मे लड़ा जाएगा इसलिए टीम आदित्य मे फिट बैठने वाले नेताओं को मौका दिया जा रहा है.
लालबाग के राजा मंडल के सचिव सुधीर सालवी को उद्धव ठाकरे ने सीधा सचिव पद दे दिया है. आने वाले दिनों में उद्धव ठाकरे द्वारा मुंबई के ग्राउंड लेवल के सभी पदाधिकारियों बदलने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक जो पुराने चेहरे हैं उन्हे बदला जाएगा और नए चेहरे को मौका दिया जाएगा.
ग्राउंड लेवल से टॉप लेवल तक ये है स्ट्रक्चर
पहले तो गुटप्रमुख होता है. उसके बाद शाखा प्रमुख रहता है. इनके उपर ध्यान रखने के लिए विभाग प्रमुख को चुना जाता है, फिर इनके उपर नेता और उपनेता रहते हैं और यह सब सचिव, आदित्य ठाकरे और उद्धव ठाकरे के अंडर आते हैं.
उद्धव ठाकरे ने क्या कहा?
बीएमसी चुनाव को लेकर उद्धव ठाकरे ने कहा, "हमारा ध्यान अब मुंबई महानगरपालिका पर है, मुंबई के लालबाग, परल और वरली जैसे इलाकों में कट्टर शिवसैनिक होते हैं. हाल ही में खबरें आईं थीं कि उद्धव ठाकरे ने बड़ी चाल चली है. हमारी चालें हमेशा बड़ी होती हैं. हमारा ध्यान अब मुंबई महानगरपालिका पर है, हम सब एकजुट हैं और खुश हैं, ऐसा ही रहना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा, "जो संकट हमें और हमारे ऊपर आ रहा है, वह सिर्फ शिवसेना पर नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, मुंबई और मराठी अस्मिता पर आ रहा है. इसे हम एकजुट होकर समाप्त करेंगे. मुझे पूरा विश्वास है कि आप लोग 'पोलादी वज्रमुठी' की ताकत दिखाए बिना नहीं रहेंगे."
उद्धव ठाकरे और बीएमसी का इतिहास
1966 में स्थापित शिवसेना को पहली बार मुंबई नगर निगम के चुनाव में ही जीत मिली. उस वक्त महाराष्ट्र की सियासत में कांग्रेस का दबदबा था. इसके बाद शिवसेना ने मुंबई को अपना गढ़ बनाना शुरू किया. 1985 से 1992 तक लगातार मुंबई में शिवसेना के ही मेयर बनते रहे. 1996 में शिवसेना के मिलिंद वैद्य को मेयर की कुर्सी सौंपी गई. इसके बाद से अब तक लगातार शिवसेना ही यहां जीतती रही है. वो भी तब, जब 15 साल तक महाराष्ट्र की सत्ता में कांग्रेस और एनसीपी की मजबूत सरकार थी.
जीतने के लए इतने पार्षदों की जरूरत
उद्धव ठाकरे बीएमसी जितने के लिए 119 पार्षद जितने जरूरी है. मुंबई नगर निगम में 236 सीटें हैं, जहां मेयर चुनने के लिए कम से कम 119 पार्षदों की जरूरत होती है. 2017 में आखिरी बार मुंबई में निकाय के चुनाव कराए गए थे. उस चुनाव में 84 सीटों पर शिवसेना और 80 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी.
ये दल होंगे मैदान में
मुंबई निकाय चुनाव में इस बार 7 प्रमुख पार्टियां मैदान में उतरेंगी. इनमें कांग्रेस और बीजेपी के सामने शिदे सेना, उद्धव सेना, अजित पवार की एनसीपी, शरद की एनसीपी प्रमुख रूप से शामिल हैं.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















