शरद पवार की NCP-SP में चल रहे घमासान पर बोले संजय राउत, 'मुझे नहीं लगता कि...'
Maharashtra Politics: राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा, "कुछ दिन पहले मेरी सुप्रिया ताई सुले से बात हुई थी. उन्होंने कहा कि पार्टी में टूट या नेताओं के जाने की सभी खबरें सब अफवाह हैं."

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि शरद पवार के नेतृत्व वाला ही असली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी है और उसके प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे हैं, बाकी शिंदे ग्रुप और अजित पवार ग्रुप अमित शाह की पार्टी है. अब उनकी पार्टी में क्या मतभेद हैं, कौन किसे चैलेंज कर रहा है, इस पर दूसरे गुट के नेताओं को बोलने का कोई अधिकार नहीं है.
राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा, "कुछ दिन पहले मेरी सुप्रिया ताई सुले से बात हुई थी. उन्होंने कहा कि पार्टी में टूट या नेताओं के जाने की सभी खबरें सब अफवाह हैं." उन्होंने आगे कहा कि बेशक इस समय सभी राजनीतिक दल चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. शिंदे की शिवसेना, उनकी पार्टी, बीजेपी और यहां तक कि दिल्ली में भी कई तरह की दिक्कतें हैं.
क्या बोले संजय राउत?
राउत ने कहा, "हम अपनी पार्टी के लिए बोलेंगे, शिवसेना पार्टी चीफ उद्धव ठाकरे की लीडरशिप में, हम इस पर काम करेंगे कि हमारा रास्ता कैसे आसान हो और हम आगे बढ़ें, और शरद पवार महाविकास अघाड़ी के एक अहम नेता हैं और वो अपनी पार्टी की दिक्कतों को हल करना जानते हैं."
उन्होंने कहा कि शरद पवार महाविकास आघाड़ी के महत्वपूर्ण नेता हैं और उनके सामने जो भी मुश्किलें खड़ी की जा रही हैं, उसके पीछे बाहरी शक्तियां हैं, जिनका नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कर रहे हैं. राउत का आरोप है कि विपक्ष को अपनी भूमिका निभाने से रोकने की कोशिश की जा रही है.
जयंत पाटिल को बताया फुले-शाहू-आंबेडकर की सोच वाले नेता
एनसीपी (एसपी गुट) के वरीष्ठ नेता जयंत पाटिल को लेकर राउत ने कहा कि वो फुले-शाहू-आंबेडकर की सोच वाले नेता हैं और उनपर यशवंतराव चव्हाण के विचारों का भी असर है. राउत को नहीं लगता कि जयंत पाटिल पार्टी छोड़ेंगे. उन्होंने कहा कि जयंत पाटिल की क्षमता वर्तमान में विधानसभा में मौजूद कई नेताओं से अधिक है. भले ही उनकी पार्टी की संख्या 10 विधायक की हो, लेकिन ये सभी प्रगतिशील विचारों वाले विधायक हैं.
लाड़की बहन योजना में हुई धांधली?
संजय राउत ने आरोप लगाया कि सरकार ने लाड़की बहन योजना के तहत 14 हजार करोड़ रुपये वितरित करने का दावा किया है, लेकिन इसमें 92 लाख फर्जी लाभार्थी हैं. उन्होंने दावा किया कि इनमें 29 हजार पुरुष और कुछ सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि 3,515 करोड़ रुपये की सरकारी राशि केवल वोट खरीदने के लिए खर्च की गई है. उनके मुताबिक यह सरकारी धन का दुरुपयोग है और इसे 'राम मंदिर की दानपेटी लूटने' जैसा अपराध बताया. उन्होंने सवाल उठाया कि इस पैसे की वसूली कैसे होगी.
राउत ने कहा कि यदि किसी बैंक में धोखाधड़ी होती है तो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जाता है, लेकिन यहां 3,515 करोड़ रुपये वोट खरीदने में खर्च किए गए हैं. उन्होंने मांग की कि जिन 92 लाख लोगों के नाम पर पैसा जारी हुआ, उसकी जिम्मेदारी तय हो और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की संपत्ति जब्त कर इस राशि की वसूली की जाए. उन्होंने इसे 'स्टेट कैप्चर' जैसा अपराध बताया.
उन्होंने यह भी कहा कि दिव्यांगों को भत्ता नहीं मिल रहा, जबकि सरकारी खजाना लूटा जा रहा है. उनके अनुसार धीरे-धीरे यह मामला सामने आ रहा है और यह पूरे राज्य को खरीदने की कोशिश है. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा किया जाता है और अब राज्य सरकार के खजाने की लूट हो रही है.
‘राम रक्षा’ अभियान पर बीजेपी के विरोध पर उठाए सवाल
शिवसेना (उबाठा) दादर में राम रक्षा आंदोलन करने वाली है. इसपर संजय राउत ने कहा कि यदि सरकार उनके कार्यक्रम का विरोध कर रही है तो इसका मतलब है कि वो उनके आंदोलन रोकने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि 'राम रक्षा' का पाठ करने का है. शिवसेना नेता ने कहा कि यदि वो यह कह रहे हैं कि दानपेटियां लूटी गई हैं, तो क्या सरकार इसके खिलाफ एक्शन क्यों नहीं ले रही? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को सरकार के लोगों का बौद्धिक लेना चाहिए.
राउत ने दावा किया कि संघ ने भी इस मुद्दे पर खेद व्यक्त किया है और सरसंघचालक ने स्वयं इसे कलंक बताया है. उन्होंने कहा कि सरकार के कुछ लोगों को संघ की भावना का भी पता नहीं है. उनके अनुसार, ये 'बनावटी संघ वाले' और 'बनावटी हिंदुत्व वाले' हैं.
उन्होंने कहा कि यदि सरकार हिंदुत्व पर प्रस्ताव लाती है, तो जिस मंत्री ने यह बयान दिया है, उसके खिलाफ भी प्रस्ताव लाकर उसे पारित किया जाए और पूरे राज्य में लागू किया जाए. राउत ने यहां महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री और भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले की ओर इशारा किया है, जिन्होंने शिवसेना (UBT) के आंदोलन को राजनीतिक स्टंट और दिखावटी बताया था.
























