Operation Sindoor: मुंबईकरों की MMRDA से बड़ी अपील, शहीद 'मुरली नाईक' हो घाटकोपर मेट्रो स्टेशन का नाम
Operation Sindoor India: मुंबई आत्मसम्मान मंच के अध्यक्ष नित्यानंद शर्मा के अनुसार घाटकोपर मेट्रो स्टेशन का नाम ‘वीर योद्धा मुरली नाईक’ रखा जाए तो यह उनके बलिदान को एक अविस्मरणीय श्रद्धांजलि होगी.

Operation Sindoor News: मुंबई के घाटकोपर पूर्व स्थित मेट्रो स्टेशन का नाम 'वीर योद्धा मुरली नाईक' के नाम पर रखने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है. गैर सरकारी संस्था 'आत्मसम्मान मंच' ने मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) के अतिरिक्त आयुक्त विक्रम कुमार को एक ज्ञापन सौंपा. आत्मसम्मान मंच का कहना है कि मुरली नाईक ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान आतंकियों से लोहा लेते हुए देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान कर दिया. ऐसे में मुंबई के लोगों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि देने का यही सही समय है.
मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अफसरों से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता जीवन भालेराव भी शामिल थे. उन्होंने कहा कि यह मांग न केवल एक वीर सपूत को श्रद्धांजलि देने का माध्यम है बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को भी देश कि सर्वस्व बलिदान की प्रेरणा देने का काम करेगी.
दरअसल, वीर जवान मुरली नाईक का नाता घाटकोपर पूर्व के कामराज नगर से रहा है. ऐसे में आत्मसम्मान मंच ने मेट्रो स्टेशन का नाम उनके सम्मान में रखने की पहल की है.
आत्मसम्मान मंच के अध्यक्ष नित्यानंद शर्मा ने कहा, “देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सपूत को हमारा नमन. यदि घाटकोपर पूर्व मेट्रो स्टेशन का नाम ‘वीर योद्धा मुरली नाईक’ रखा जाए, तो यह उनके बलिदान को एक अविस्मरणीय श्रद्धांजलि होगी. मुंबई के निर्माणाधीन ग्रीन लाइन मेट्रो लाइन 4 के रूट पर घाटकोपर ईस्ट या लक्ष्मीनगर स्टेशन बन रहा है. इसी स्टेशन का नाम शहीद मुरली नाइक के नाम पर रखने की मांग की है."
उन्होंने कहा कि आत्मसम्मान मंच महायुति सरकार से यह मांग करता है कि घाटकोपर में मुरली नाईक का एक स्मारक भी स्थापित किया जाए. देश के सपूतों के लिए जो भी किया जाए, वह उनके बलिदान के समक्ष कम ही होगा.
शिवसेना यूबीटी ने किया मांग का समर्थन
शिवसेना यूबीटी के राज्य संघटक विलास रूपवते ने भी प्रशासन से इस मांग को पूरा करने की उम्मीद जताई है. उन्होंने कहा, “देश के सपूत सरहद पर हमारी सुरक्षा के लिए लड़ते हैं. तभी हम सुरक्षित रहते हैं. हमें विश्वास है कि प्रशासन हमारी यह मांग अवश्य स्वीकार करेगा.”
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