मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस: आसिफ खान के बरी होने पर परिवार में खुशी, पत्नी बोलीं, 'हमारी आधी से ज्यादा...'
Mumbai Train Blast Case: पेशे से सिविल इंजीनियर आसिफ खान पर आरोप लगा था कि उसने बम बनाने और बम लगाने में मदद की थी. अब परिवार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

साल 2006 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाके के 12 आरोपियों को बॉम्बे हाई कोर्ट ने 21 जुलाई को बरी कर दिया. इनमें आसिफ खान का भी नाम शामिल है. आसिफ के बरी होने पर परिवार में खुशी का माहौल है. आसिफ खान पर बोरीवली में बम बनाने और विस्फोट करने के लिए बम लगाने में मदद करने का आरोप था. जलगांव के रहने वाले सिविल इंजीनियर आसिफ पर सिमी का प्रमुख सदस्य होने का भी आरोप था.
मां, बेटी और पत्नी ने कहा कि इंसाफ मिला मगर बहुत देर हो गई. आसिफ के परिवार ने कहा कि इतने सालों में बहुत तकलीफ हुई. मां ने कहा कि उसका इंतजार करते-करते अब्बु का इंतकाल हो गया. न्यूज़ एजेंसी ANI से परिवार वालों से बातचीत की. पत्नी ने रोते हुए कहा कि हमारी आधी जिंदगी की भरपाई कौन करेगा.
बेटी आयशा ने कहा- पहले से पता था वो बेगुनाह
- बहुत खुशी हो रही है कि इतने सालों बाद अब्बू घर पर आ रहे हैं
- मैं बहुत छोटी थी मुझे तो याद भी नहीं
- हम मिलने जाते थे तो बहुत अफसोस होता था
- मिलकर आ जाते थे गले नहीं लगा सकते थे
- खुशी तो हो रही है लेकिन इंसाफ देर से मिला है
- इंसाफ जल्दी मिल जाता तो हमारी जिंदगी इतनी बेकार नहीं होती
- हमें पहले से पता था कि अब्बू बेगुनाह हैं उनको जबरदस्ती फंसाया गया
- मैं इस दौरान तीन चार बार उनसे मिलने गई थी. शादी के बाद भी गए थे. हमें देखकर बहुत खुश हुए थे
आसिफ खान की मां हुस्ना बानो ने क्या कहा?
- हमको बहुत खुशी हुई
- एक महीने में इंसाफ हो जाना चाहिए था
- मेरा बच्चा बेकसूर था
- हमारी खुशी की इंतहा नहीं है
- अल्लाह का शुक्र है
- इतने साल में हमारे परिवार को बहुत तकलीफ हुई
- रिश्तेदारों ने हमारी मदद की, हमको सपोर्ट किया
- हमारा बड़ा बेटा था उसके गम में अब्बा जान चले गए
- 14 साल पहले उनका इंतकाल हो गया, इंतजार करते-करते चले गए
- मुझे खुशी है कि मेरा बेटा मेरी जिंदगी में वापस आ रहा है
आसिफ खान की पत्नी निशात आसिफ खान ने क्या कहा?
- हमें कोर्ट से उम्मीद थी, फैसला अच्छा आया
- अल्लाह ने हमको इंसाफ दिलाया
- हमारी आधी से ज्यादा जिंदगी चली गई उसकी भरपाई कौन करेगा (रोते हुए बोलीं)
- बच्चों के लिए हमें बहुत कठिनाइयों को सामना करना पड़ा
- उस वक्त छोटी बच्ची दो साल की थी, दूसरी बच्ची चार साल की थी, बच्चा आठ साल का था
- हम सिलाई का काम करते थे
- रिश्तेदारों ने मदद की लेकिन बाप की कमी तो कोई पूरी नहीं कर सकता
- समाज में हमारे साथ अच्छा सलूक हुआ
- जब ब्लास्ट हुआ था तो वो ऑफिस में ही थे, बारिश हो रही थी
- जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तो बहुत गम की घड़ी थी
- झूठे केस में जबरदस्ती फंसाया गया
- सुबह फोन पर उनसे बात हुई
- कल सुबह घर पर आ जाएंगे
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL

























