मुंबई: ऑटो वालों के लिए मराठी अनिवार्य करने के फैसले पर रोक, MNS की आई प्रतिक्रिया
Mumbai News: एमएनएस नेता संदीप देशपांडे ने कहा कि अगर समय चाहिए तो हम देने के लिए तैयार हैं, लेकिन जिस प्रकार हमें मीटिंग में नहीं बुलाया गया उसे देखकर लगता है कि सरकार अपना फैसला बदल देगी.

महाराष्ट्र सरकार की तरफ से मुंबई में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने के फैसले को फिलहाल वापस ले लिया गया है. यह फैसला 6 महीने के लिए टाल दिया गया है. इस पर अब सियासत भी तेज हो गई है. एमएनएस नेता संदीप देशपांडे ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार ने जो फैसला लिया है वह उस पर कायम रहेगी और इसे नहीं बदलेगी.
MNS नेता ने आगे कहा, ''अगर समय चाहिए तो हम देने के लिए तैयार हैं, लेकिन जिस प्रकार हमें आज की मीटिंग में नहीं बुलाया गया उसे देखकर लगता है कि सरकार अपना फैसला बदल देगी.''
ऑटो रिक्शा चालकों के लिए फिलहाल मराठी अनिवार्य नहीं
महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने बड़ा फैसला लिया है मुंबई में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य नहीं होगी. इसे 6 महीने के लिए टाल दिया गया है. प्रदेश के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर प्रताप सरनाईक ने घोषणा की थी कि 1 मई 2026 से अब ऑटो रिक्शा परमिट सिर्फ उसी शख्स को दिया जाएगा, जो मराठी भाषा पढ़ना और बोलना जानता हो.
MNS कार्यकर्ताओं ने संजय निरुपम के खिलाफ किया प्रदर्शन
महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा संबंधी निर्देश को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है. शिंदे गुट के नेता संजय निरूपम द्वारा सरकार से इस नियम पर पुनर्विचार करने की मांग के बाद मनसे के कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन किया. इसके बाद इन आंदोलकारीयो पर कारवाई हुई. इसी वजह से पार्टी प्रमुख राज ठाकरे ने सभी आंदोलनकारी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और उनका अभिनंदन किया.
MNS के एक कार्यकर्ता नयन कदम ने कहा, ''राज ठाकरे और अमित ठाकरे का पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रति जो प्रेम है, वह साफ दिखाई देता है.
चार मई को आंदोलन होगा. 70 प्रतिशत रिक्शा चालक हमारे साथ हैं. जहां-जहां रिक्शा स्टैंड हैं, वहां मनसे के कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे. जो इसका विरोध करेंगे, उनके खिलाफ भी मनसे मजबूती से खड़ी रहेगी.''
Maharashtra MLC Election: विधान परिषद चुनाव में एकनाथ शिंदे के 'सरप्राइज पैकेज' की चर्चा, हलचल तेज
यूनियन के नेताओं का क्या कहना है?
कुछ यूनियन नेताओं का मानना है कि यह कदम स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने और यात्रियों की सुविधा के लिए जरूरी है, वहीं कुछ अन्य इसे ड्राइवरों पर अतिरिक्त बोझ के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि पहले से ही लाइसेंस प्रक्रिया जटिल है और इसमें एक और अनिवार्यता जोड़ने से नए ड्राइवरों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं
मंत्री प्रताप सरनाईक ने क्या घोषणा की थी?
महाराष्ट्र सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने हाल ही में कहा था कि 1 मई 2026 से, यानी महाराष्ट्र दिवस से राज्य में सभी लाइसेंस प्राप्त ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया जाएगा. इसके तहत चालकों को मराठी पढ़ना, लिखना और बोलना आना चाहिए. अगर कोई चालक इस भाषा में बुनियादी दक्षता नहीं दिखा पाता, तो उसके लाइसेंस को रद्द कर दिया जाएगा.
























