Malhar Certification: महाराष्ट्र में 'मल्हार सर्टिफिकेशन' पर नई तकरार! खंडोबा मंदिर के ट्रस्टी बोले- 'हमारे देवता...'
Malhar Certification News: 'मल्हार सर्टिफिकेशन' को लेकर विवाद शुरू हो गया है. खंडोबा मंदिर के एक ट्रस्टी ने मटन दुकानों से जुड़ी योजना का नाम बदलने की मांग की, जबकि दूसरे ट्रस्टी ने इसका समर्थन किया.

Maharashtra Malhar Certification: महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे की ओर से हिंदू समुदाय द्वारा संचालित मटन दुकानों के लिए घोषित 'मल्हार सर्टिफिकेशन' को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुणे जिले के प्रसिद्ध मल्हारी मार्तंड (खंडोबा) मंदिर के ट्रस्टियों के बीच इस नाम को लेकर असहमति देखी जा रही है.
मल्हारी मार्तंड मंदिर के एक ट्रस्टी राजेंद्र खेडेकर ने इस सर्टिफिकेशन के नाम पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि भगवान मल्हारी मार्तंड एक शाकाहारी देवता हैं, जो पशु प्रेमी भी माने जाते हैं. ऐसे में मटन दुकानों से जुड़ी किसी भी योजना का नाम उनके नाम पर रखना उचित नहीं होगा. उन्होंने मंत्री नितेश राणे से इस सर्टिफिकेशन का नाम बदलने की अपील की. खेडेकर ने कहा, "हमारे देवता शाकाहारी हैं और उन्हें पशुओं से प्रेम है. इस कारण मटन दुकानों से जुड़ी योजना का नाम उनसे जोड़ना अनुचित है."
सर्टिफिकेशन के समर्थन में आए दूसरे ट्रस्टी
मंदिर के ही एक अन्य ट्रस्टी मंगेश घोणे ने 'मल्हार सर्टिफिकेशन' का समर्थन किया है. उन्होंने इसे एक अच्छी पहल बताते हुए मंत्री नितेश राणे का सम्मान करने की बात कही. घोणे का मानना है कि यह प्रमाणपत्र हिंदू समुदाय के व्यापार को मजबूत करेगा और पारंपरिक तरीके से काटे गए मांस की बिक्री को बढ़ावा देगा.
क्या है 'मल्हार सर्टिफिकेशन' योजना?
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने सोमवार (10 मार्च) को 'मल्हार सर्टिफिकेशन' की घोषणा की थी. इस योजना के तहत 'झटका' मटन दुकानों को प्रमाणित किया जाएगा, जो पूरी तरह से हिंदू समुदाय के लोगों द्वारा संचालित होंगी. राणे ने लोगों से अपील की कि वे केवल 'मल्हार सर्टिफिकेशन' वाली दुकानों से ही मटन खरीदें.
क्या है 'झटका' मांस?
'झटका' मांस उस विधि से प्राप्त किया जाता है, जिसमें जानवर को एक ही बार में काटा जाता है, जिससे उसकी पीड़ा कम होती है. इसे पारंपरिक हिंदू पद्धति माना जाता है.
'मल्हार सर्टिफिकेशन' को लेकर धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं. जहां एक ओर कुछ लोग इसे हिंदू व्यापारियों के लिए एक अच्छा कदम मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं. अब यह देखना होगा कि सरकार इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देती है.
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Source: IOCL






















