मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस: बरी हुए आरोपी बोले- 'इतना दर्द दिया कि हम 9/11 का जुर्म भी अपने सर ले लेते'
Maharashtra News: साजिद अंसारी ने बताया कि हमें बहुत ज्यादा टॉर्चर किया गया. पुलिस कस्टडी में हमें करंट दिया जाता था. सोहेल शेख ने कहा कि जेल के अंदर जेल के बाहर उनके परिवार में काफी कुछ झेला है.

साल 2006 रेलवे धमाके मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को निर्दोष बरी कर दिया. अब राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जहां, सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को फिलहाल के लिए रोक दिया है, लेकिन जो बरी हुए उन्हें जेल नही जाना होगा.
इसी मामले में एबीपी न्यूज़ ने सोहैल शेख, साजिद अंसारी, मुज़म्मिल अताउल्ला रहमान शेख और डॉक्टर तनवीर अहमद से बातचीत की. यह वह लोग हैं जिन्हें महाराष्ट्र एटीएस ने इस बम धमाके मामले में गिरफ्तार किया था और इन्हें निचली अदालत ने कैपिटल पनिशमेंट भी दी थी.
'बहुत प्रताड़ित किया गया'
सोहेल शेख ने बताया, "उन्हें आतंकवादी बना दिया गया और इसी वजह से उन्होंने जेल के अंदर जेल के बाहर उनके परिवार में काफी कुछ झेला है. वह अब आतंकवादी नहीं हैं बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें क्लीन चिट दी है." सोहेल ने आगे बताया कि उनसे अपने झूठ को सच साबित करने के लिए एटीएस ने बहुत ज्यादा प्रताड़ित किया है.
'दिया जाता था करंट'
वहीं साजिद अंसारी ने बताया, "हमें बहुत ज्यादा टॉर्चर किया गया. पुलिस कस्टडी में हमें करंट दिया जाता था. हमारे दोनों पैरों को 180 डिग्री फैला दिया जाता था ऐसी ऐसी चीज की जाती थी कि 7/11 क्या हम 9/11 का इल्जाम भी खुद के सर पर ले सकते थे."
'जेल में सांस लेना हो गया था मुश्किल'
उन्होंने आगे कहा, "जेल की चार दिवारी के बीच जब हम जाते थे तो हमें बाकी के कैदी बड़ी ही बुरी नजर से देखते थे कि हम आतंकवादी हैं हमें मारा पीटा जाता था. हमें ऐसी सेल में रख दिया गया था जहां सांस तक नहीं ले पाते थे. वेंटिलेशन नहीं था. रात में हमारे पसीने से जब बिस्तर गीला हो जाता है तो हमारी आंखें खुल जाती थी."
'नहीं छोड़ी थी उम्मीद'
वहीं मुजम्मिल में कहा, "हमने अपनी उम्मीदें कभी छोड़ी नहीं और इसी वजह से जब लोअर कोर्ट ने हमें सजा सुनाई तब भी हमें उम्मीद थी कि हाईकोर्ट जरूर हमें राहत देगा, क्योंकि हम निर्दोष थे और वही हुआ. सुप्रीम कोर्ट में भी हमें यही राहत मिलने की उम्मीद है."
'इतना दर्द दिया गया नहीं कर सकते बयां'
तनवीर ने कहा, "हमें इतना ज्यादा प्रताड़ित किया गया कि मैं उसे बयां नहीं कर सकता. लोगों का नार्को टेस्ट एक बार होता है लेकिन मेरा कई बार हुआ. मुझे अवैध रूप से ले जाया जाता था और ऐसे लोग मेरा नार्को को करते थे जिनके पास नार्को करने का सर्टिफिकेट भी नहीं था. आज मेरी बच्ची 12वीं क्लास में है जो समय मुझे उसके साथ बिताना चाहिए था वह समय मैं उसके साथ बिता ही नहीं पाया."
उन्होंने आगे कहा, "मेरा कितना बड़ा दर्द है मैं इसे बोल ही नहीं सकता और अगर बोलूंगा तो कोई समझ ही नहीं पाएगा. मैं डॉक्टर हूं मैं सोशल वर्क बहुत किया. मुझे लोगों की मदद करना बहुत ज्यादा पसंद है लेकिन मुझे आतंकवादी बना दिया गया."
'ब्लास्ट में मारे गए लोगों को कब मिलेगा इंसाफ'
तनवीर ने आगे कहा, "मेरा तो यही सवाल है कि इस तरह से झूठे गवाह झूठे दस्तावेज बनाकर एटीएस ने क्या किया बेगुनाहों को आरोपी बनाएं, लेकिन जो लोग उसे ब्लास्ट में मारे गए उन्हें इंसाफ कब मिलेगा. कब असली लोगों को सजा मिलेगी उन्हें पकड़ा जाएगा. मुझे तो यह लगता है कि वे तो अब भी फ्री है घूम रहे हैं."
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Source: IOCL






















