एक्सप्लोरर

Explained: BMC रिजल्ट ने दिए इन 3 सवालों के जवाब- क्यों हारे ठाकरे ब्रदर्स, कैसे BJP ने पलटी बाजी! अब शिवसेना का असली वारिस कौन?

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में बृहन्मुंबई महानगर पालिका के चुनाव परिणामों ने तीन अहम सवालों के जवाब लगभग दे दिए हैं. इन चुनावों में ठाकरे ब्रांड को तगड़ा झटका लगता दिख रहा है.

मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के नतीजों ने महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में बड़ा संदेश दिया है. जिस बीएमसी को लंबे समय तक ठाकरे परिवार का अभेद्य किला माना जाता रहा, वहीं इस बार न तो उद्धव ठाकरे और न ही राज ठाकरे का प्रभाव निर्णायक साबित हो सका.

नतीजे सिर्फ बीएमसी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि राज्य की 29 नगर निगमों में भी ठाकरे ब्रदर्स का असर कमजोर दिखा. इसके उलट, बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने शहरी राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की.

क्यों नहीं चला ‘ठाकरे ब्रांड’ का सिक्का?

इस चुनाव में ठाकरे ब्रदर्स की राजनीति कई मोर्चों पर सवालों के घेरे में रही. सबसे बड़ा मुद्दा भाषा और पहचान की राजनीति को लेकर उठे विवाद रहे. मराठी बनाम गैर-मराठी, उत्तर भारतीय बनाम दक्षिण भारतीय जैसे मुद्दों ने शहरी मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को असहज किया. भाषा के नाम पर बयानबाजी और सड़कों पर टकराव की राजनीति ने मध्यम वर्ग और गैर-मराठी मतदाताओं को ठाकरे खेमे से दूर किया.

गुंडागर्दी और मारपीट से जुड़े पुराने आरोप भी चुनावी माहौल में भारी पड़े. गैर-मराठियों के साथ कथित हिंसा और आक्रामक राजनीतिक शैली को लेकर यह धारणा बनी कि ठाकरे ब्रदर्स की राजनीति समावेशी नहीं रही. इसका सीधा असर शहरी इलाकों में पड़ा, जहां रोजगार, सुरक्षा और विकास जैसे मुद्दे प्राथमिकता रखते हैं.

ठोस एजेंडे की कमी!

बीएमसी जैसे देश के सबसे समृद्ध नगर निकाय के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक विजन की कमी भी ठाकरे ब्रदर्स के खिलाफ गई. विपक्ष ने यह सवाल उठाया कि शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रैफिक, कचरा प्रबंधन, हाउसिंग और बुनियादी सेवाओं पर कोई ठोस रोडमैप क्यों नहीं रखा गया. चुनाव का चेहरा उद्धव और राज ठाकरे बने, लेकिन स्थानीय मुद्दों पर मजबूत योजना सामने नहीं आ सकी.

शिंदे फैक्टर और वोटों में सेंधमारी

असली शिवसेना की लड़ाई में एकनाथ शिंदे गुट का प्रभाव निर्णायक रहा. शिंदे गुट ने खुद को 'असली शिवसेना' के रूप में स्थापित करने में सफलता पाई, जिससे परंपरागत शिवसेना वोट बैंक में सीधा विभाजन हुआ. इसका नुकसान सबसे ज्यादा उद्धव ठाकरे गुट को हुआ, क्योंकि कैडर और जमीनी नेटवर्क में बिखराव साफ दिखा.

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का गठबंधन मराठी अस्मिता को एकजुट करने की कोशिश के तौर पर देखा गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला. कई क्षेत्रों में यह गठबंधन वोट ट्रांसफर कराने में असफल रहा. उल्टा, यह धारणा बनी कि गठबंधन भावनात्मक मुद्दों पर केंद्रित है, जबकि शहरी मतदाता प्रशासन और विकास को प्राथमिकता दे रहा है.

BMC में ओवैसी कैसे बने गेम चेंजर?

इस चुनाव में AIMIM की मौजूदगी ने मुकाबले को और जटिल बनाया. मुस्लिम वोटों में बिखराव हुआ, जिससे कुछ सीटों पर सीधा फायदा बीजेपी को मिला. हिंदू-मुस्लिम राजनीति के एजेंडे ने मराठी मुद्दे को पीछे धकेल दिया. AIMIM को वोट-कटवा के रूप में देखा गया, जिसके चलते हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण भी तेज हुआ.

अब सवाल- बीजेपी नीत महायुति क्यों जीती?

बीजेपी ने मराठी पहचान को पूरी तरह छोड़े बिना विकास और गवर्नेंस को चुनावी केंद्र में रखा. 'सिर्फ मराठी नहीं, सबकी मुंबई' जैसे संदेश ने गैर-मराठी और मध्यम वर्गीय मतदाताओं में भरोसा पैदा किया. शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, मेट्रो, सड़कें और प्रशासनिक सुधार बीजेपी के प्रमुख चुनावी मुद्दे रहे.

डबल इंजन सरकार का मुंबई मॉडल

राज्य और केंद्र में सत्ता में होने का फायदा बीजेपी को मिला. डबल इंजन सरकार के तहत मुंबई के लिए चल रही परियोजनाओं को चुनाव में प्रमुखता से रखा गया. इससे यह संदेश गया कि शहर के विकास के लिए स्थिर और समन्वित शासन जरूरी है.

असली शिवसेना का नैरेटिव! कौन फेल कौन पास?

शिंदे गुट के साथ गठबंधन कर बीजेपी ने 'असली शिवसेना' का नैरेटिव मजबूत किया. इसका सीधा असर परंपरागत शिवसेना वोट बैंक पर पड़ा और ठाकरे गुट को नुकसान हुआ.

BMC नतीजों के मायने क्या हैं?

बीएमसी चुनाव में पहली बार बीजेपी को बहुमत मिलना सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी है. ठाकरे ब्रदर्स का वर्चस्व खत्म हुआ, मराठी मानुष की राजनीति बैकफायर हुई और गुंडागर्दी वाली छवि को मतदाताओं ने नकारा. इसके साथ ही फडणवीस-शिंदे की जोड़ी मजबूत होकर उभरी.

महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में इस चुनाव के बाद बीजेपी का दबदबा साफ तौर पर मजबूत होता दिखा है. मराठी अस्मिता की राजनीति पर हिंदुत्व और विकास का नैरेटिव भारी पड़ा, जिससे बीजेपी को व्यापक समर्थन मिला. मुंबई जैसे महानगर में ठाकरे फैक्टर अब निर्णायक साबित नहीं हो सका, वहीं उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का गठबंधन भी मतदाताओं को साधने में असफल रहा. उत्तर भारतीय वोट बैंक इस बार संगठित होकर बीजेपी के साथ गया, जिसने कई सीटों पर परिणामों को प्रभावित किया. कुल मिलाकर शहरी मतदाता ने आक्रक, टकराव और गुंडागर्दी से जुड़ी राजनीति को नकारते हुए स्थिरता, विकास और प्रशासनिक भरोसे को तरजीह दी.

बीएमसी के साथ पुणे, ठाणे, नागपुर और नासिक जैसे प्रमुख नगर निगमों में बीजेपी की बढ़त ने स्पष्ट कर दिया है कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में संतुलन बदल चुका है.

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

भाजपा ने अब तक किसे-किसे बनाया अध्यक्ष, नितिन नबीन को क्यों सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, जानें सब कुछ
भाजपा ने अब तक किसे-किसे बनाया अध्यक्ष, नितिन नबीन को क्यों सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, जानें सब कुछ
12 छक्के 14 चौके... स्टीव स्मिथ का सबसे तेज शतक, 16 गेंद पहले चेज हुए 190 रन
12 छक्के 14 चौके... स्टीव स्मिथ का सबसे तेज शतक, 16 गेंद पहले चेज हुए 190 रन
सिद्धार्थ मल्होत्रा के बर्थडे सेलिब्रेशन में कियारा ने गाया गाना, बेटी सरायाह के फेवरेट हैं पापा
सिद्धार्थ मल्होत्रा के बर्थडे सेलिब्रेशन में कियारा ने गाया गाना, बेटी सरायाह के फेवरेट हैं पापा
BJP का कब चुना जाएगा अध्यक्ष? सामने आई तारीख, नोटिफिकेशन जारी
BJP का कब चुना जाएगा अध्यक्ष? सामने आई तारीख, नोटिफिकेशन जारी
Advertisement

वीडियोज

Foreign Investors को राहत | SEBI का नया Proposal बदल देगा Stock Market Game | Paisa Live
Tariff Pressure के बीच India-US Trade Talks Active, Deal कभी भी Final | Paisa Live
India के Passport की ताकत में जबरदस्त उछाल | Henley Passport Index 2026 में बड़ी छलांग | Paisa Live
BMC Election Result 2026: BJP की बढ़त से Eknath Shinde को डर? | Vote Counting | BJP
BMC Election Result 2026: BMC चुनाव के क्या मायने? | Vote Counting | BJP
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement
Petrol Price Today
₹ 94.72 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.62 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
भाजपा ने अब तक किसे-किसे बनाया अध्यक्ष, नितिन नबीन को क्यों सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, जानें सब कुछ
भाजपा ने अब तक किसे-किसे बनाया अध्यक्ष, नितिन नबीन को क्यों सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, जानें सब कुछ
12 छक्के 14 चौके... स्टीव स्मिथ का सबसे तेज शतक, 16 गेंद पहले चेज हुए 190 रन
12 छक्के 14 चौके... स्टीव स्मिथ का सबसे तेज शतक, 16 गेंद पहले चेज हुए 190 रन
सिद्धार्थ मल्होत्रा के बर्थडे सेलिब्रेशन में कियारा ने गाया गाना, बेटी सरायाह के फेवरेट हैं पापा
सिद्धार्थ मल्होत्रा के बर्थडे सेलिब्रेशन में कियारा ने गाया गाना, बेटी सरायाह के फेवरेट हैं पापा
BJP का कब चुना जाएगा अध्यक्ष? सामने आई तारीख, नोटिफिकेशन जारी
BJP का कब चुना जाएगा अध्यक्ष? सामने आई तारीख, नोटिफिकेशन जारी
BJP National President Election: क्या आम आदमी भी लड़ सकता है BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव, जानें कौन-कौन सी शर्तें करनी होती हैं पूरी?
क्या आम आदमी भी लड़ सकता है BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव, जानें कौन-कौन सी शर्तें करनी होती हैं पूरी?
दो साल में 9.68 लाख सड़क हादसों के साथ टॉप पर भारत, चीन-अमेरिका भी पीछे छूटे
दो साल में 9.68 लाख सड़क हादसों के साथ टॉप पर भारत, चीन-अमेरिका भी पीछे छूटे
Iran US Tension: ईरान के आसपास कितने देशों में मौजूद हैं अमेरिकी एयरबेस, क्या यहां से हमला करने से पहले ट्रंप को लेनी होगी परमीशन?
ईरान के आसपास कितने देशों में मौजूद हैं अमेरिकी एयरबेस, क्या यहां से हमला करने से पहले ट्रंप को लेनी होगी परमीशन?
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में परीक्षा का बिगुल, 10 फरवरी से शुरू होंगी वार्षिक परीक्षाएं
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में परीक्षा का बिगुल, 10 फरवरी से शुरू होंगी वार्षिक परीक्षाएं
Embed widget