Maharashtra News: हथकड़ी लगाकर घुमाने पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार को दिया मुआवजा देने का आदेश
Maharashtra News In Hindi: बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर सख्ती दिखाई. साथ ही वकील और पूर्व सैनिक को अपमानजनक तरीके से हथकड़ी लगाने पर सरकार को 50-50 हजार मुआवजा देने का आदेश दिया.

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाते हुए महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक वकील और एक पूर्व सैनिक को 50-50 हजार का मुआवजा दे. अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इन दोनों व्यक्तियों को हथकड़ी लगाकर घुमाना उनके सम्मान के खिलाफ था और यह उनके मौलिक अधिकारों के साथ-साथ मानवीय गरिमा का भी गंभीर उल्लंघन है.
न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कानून प्रवर्तन अधिकारियों को न केवल कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए, बल्कि व्यक्तियों के अधिकारों और उनकी गरिमा का भी सम्मान करना चाहिए. कोर्ट ने माना कि वकील योगेश्वर कावड़े और पूर्व सैनिक अविनाश दाते को ऐसी अनुचित अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा, जो भारत के किसी भी नागरिक के साथ नहीं होनी चाहिए.
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, यह मामला अगस्त 2010 का है जब दोनों याचिकाकर्ता अमरावती जिले के तलेगांव पुलिस स्टेशन में अपनी कार को नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने गए थे. हालांकि, उस व्यक्ति ने भी उनके खिलाफ क्रॉस-शिकायत दर्ज करा दी. पुलिस ने आधी रात के बाद दोनों को हिरासत में ले लिया और कथित तौर पर उन्हें कपड़े उतारने पर मजबूर किया. अगले दिन, उन्हें हथकड़ी पहनाकर सार्वजनिक रूप से स्टेट ट्रांसपोर्ट (ST) बस से मजिस्ट्रेट की अदालत में ले जाया गया.
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दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई है विभागीय कार्रवाई- पुलिस अधीक्षक
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वे कोई आदतन अपराधी या खतरनाक मुजरिम नहीं थे, इसलिए उन्हें हथकड़ी लगाना पूरी तरह से अवैध और मानहानि जैसा था. हालांकि अमरावती पुलिस अधीक्षक ने बताया कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे नाकाफी माना. अदालत ने कहा कि न्यायिक अंतरात्मा की यह जिम्मेदारी है कि वह कानूनी चोट के लिए न्याय प्रदान करें और हुई गलती को सुधारे. कोर्ट ने मुआवजा राशि का भुगतान आठ सप्ताह के भीतर करने का आदेश दिया है.
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