आंध्र प्रदेश की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी बनेगा 'दिशा' कानून, अगले विधानसभा सत्र में किया जा सकता है पेश
दिशा कानून के तहत रेप के मामले में आरोपी के दोषी पाए जाने पर 21 दिनों में कोर्ट मौत की सजा सुना सकती है. पुलिस को 7 दिनों के भीतर जांच खत्म करनी होगी.

मुंबई: हाथरस की वारदात के बाद अब महाराष्ट्र में भी महिलाओं की सुरक्षा पर चर्चा शुरू हो गई है. महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि महिला सुरक्षा सरकार के प्राथमिक एजेंडे पर है. महाराष्ट्र में जल्द ही आंध्र प्रदेश की तर्ज पर सरकार 'दिशा' कानून लागू करने की तैयारी में है. महाराष्ट्र विधानसभा के नागपुर सत्र के दौरान ये दिशा कानून विधानसभा में लाया जा सकता है. आंध्र प्रदेश के दिशा कानून का अध्यन करने खुद गृहमंत्री अनिल देशमुख फरवरी महीने में अधिकारियों के साथ वहां जा चुके हैं.
क्या है दिशा कानून दिशा कानून के तहत रेप के मामले में आरोपी के दोषी पाए जाने पर 21 दिनों में कोर्ट मौत की सजा सुना सकती है. पुलिस को 7 दिनों के भीतर जांच खत्म करनी होगी और स्पेशल कोर्ट को 14 दिनों में सुनवाई पूरी करनी होगी. सारी प्रक्रियाओं को 21 दिन में पूरा करना होगा. आंध्र प्रदेश की जगन मोहन रेड्डी सरकार ने विधानसभा में दिशा बिल 2019 पारित किया गया था. विधेयक ने फैसला सुनाने की समयसीमा को मौजूदा चार महीने से घटाकर 21 दिन किया.
'दिशा' कानून के तहत आईपीसी की धारा 354 और 376 में सुधार किया है. सीआरपीसी की भी कुछ धाराओं में सुधार कर महिला के खिलाफ किसी भी अपराध में सात दिनों के अंदर आरोप पत्र दायर की जानी है और उसके बाद 14 कार्यदिन में उसका मुकदमा पूरा कर आरोपी को सजा होनी चाहिए, ऐसा प्रावधान है.
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