Morena News: चंबल नदी में जलस्तर बढ़ने से 91 गांव खतरे में, प्रशासन अलर्ट
Chambal River Flood Alert: अत्यधिक बारिश और कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण मुरैना में चंबल नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका है. प्रशासन ने 91 गांवों को सतर्क किया है.

अत्यधिक बारिश के कारण मुरैना जिले के जंगल की बरसाती नदियां जहां उफान पर हैं, वहीं राजस्थान के कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण चंबल नदी का जलस्तर लगभग 6 से 7 मीटर बढ़ने की संभावना है. अत्यधिक बारिश के कारण जंगल की बरसाती नदियां ग्रामीण क्षेत्रों में बने रपटों के ऊपर दो से तीन फीट चल रहे हैं.
इस वर्ष वर्षा के मौसम में 450 मिली मीटर से अधिक बारिश हो जाने से जिले के पगारा, कोतवाल ,पिलुआ बांध भी फुल हो गए हैं. आज के बाद जंगल क्षेत्र में बारिश होने पर पगारा बांध के गेट ऑटोमेटिक खुल सकते हैं. चंबल, कुंवारी , सांक, आसान एवं जंगल की बरसाती नदी कुरई ,सोएं, बांसुरई सहित अन्य नदियों का पानी गांव में पहुंचे उससे पहले ही प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए व्यवस्थाओं को अंजाम देना आरंभ कर दिया हैं.
चंबल नदी का जलस्तर मुरैना के राजघाट पर 123.5 मीटर पर है
जिला प्रशासन किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए तैयारी कर रहा है। राजस्व के साथ ग्रामीण अंचल में पदस्थ अमले को जिम्मेदारियां सौंप दी गई है। प्रशासन द्वारा 91 गांव चिन्हित किए हैं. जिनमें चंबल सहित अन्य नदियां उफान पर होने से पानी प्रवेश कर सकता है. अभी तक चंबल नदी का जलस्तर मुरैना के राजघाट पर 123.5 मीटर पर है.
ग्रामीण क्षेत्रों में नुकसान की संभावना कम ही है
कोटा बैराज से छोड़ा गया आगामी 36 घंटे में कल 15 जुलाई की देर शाम तक मुरैना के राजघाट पर पहुंच सकता है। इसका जल स्तर लगभग 6 मीटर बढ़कर 129 मीटर से अधिक होने की संभावना है. हालांकि इस नदी घाट पर खतरा का निशान 136 मीटर होने से ग्रामीण क्षेत्रों में नुकसान की संभावना कम ही है.
राजस्थान कोटा बैराज से चंबल नदी में 14 जुलाई की सुबह 10:30 बजे 1 लाख 73 हजार क्यूसेक पानी छोड़ना आरंभ किया गया था. इस बैराज के 12 गेट 15-15 फीट खोल दिए गए. यह गेट दोपहर तीन बजे तक इसी तरह खुले रहे. जिससे डिस्चार्ज 2 लाख 2 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया, लेकिन धीरे-धीरे गेटों की ऊंचाई कम कर दोपहर 3:00 बजे तक 45 हजार क्यूसेक पर स्थिर कर दिया.
आवागमन किया गया है प्रतिबंधित
चंबल में कल 15 जुलाई को पानी बढ़ने की संभावना को देखते हुए गांव-गांव में ग्रामीण अमले से सूचनाएं प्रसारित करवाई गई हैं ,जिससे लोग नदी तट पर न पहुंचे. मुरैना जिला प्रशासन नदियों में बढ़ रहे जलस्तर की लगातार निगरानी कर रहा है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में रपटों पर जंगल की बरसाती नदियों के पानी की स्थिति पर नजर रखने के लिए कर्मचारियों को तैनात कर दिया है. इन रपटों पर आवागमन प्रतिबंधित किया गया है.
मना करने के बावजूद भी कर रहे हैं आवागमन
हालांकि जिन रपटों पर धीमी गति से एक से डेढ़ फुट पानी निकल रहा है. वहां लोग मना करने के बावजूद भी आवागमन कर रहे हैं. इसे लेकर लोगों का कहना यह है कि रपटों पर पानी आने से आधा दर्जन से अधिक गांव प्रभावित हो जाते हैं. वहीं तहसील मुख्यालय पर पहुंचने के लिए लगभग 50 किलोमीटर का फेर (चक्कर ) लगाना पड़ता है.
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Source: IOCL





















