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Jharkhand: मानसून की सुस्त चाल से बढ़ी किसानों की चिंता, 60% कम बारिश से धान की बुवाई पर संकट

Jharkhand News: झारखंड में सामान्य से 60% कम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. कई जिलों में धान की बुवाई और नर्सरी का काम प्रभावित है, जबकि सरकार ने राहत की तैयारी शुरू कर दी है.

झारखंड में इस साल खरीफ फसल को लेकर किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. जून महीने में सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण कई जिलों में किसान अब तक धान की बुवाई की तैयारी भी शुरू नहीं कर पाए हैं. खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से खेती का काम प्रभावित हो रहा है और किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं.

अधिकारियों के अनुसार, राज्य में अब तक सामान्य से करीब 60 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है. अगर आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति नहीं सुधरती है तो यह कमी और बढ़ सकती है. ऐसे में धान आधारित खेती पर निर्भर किसानों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है.

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कई जिलों में नर्सरी तक तैयार नहीं हो सकी

कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से ही आकस्मिक सहायता योजना तैयार कर रखी है. हालांकि जमीनी स्तर पर किसानों की चिंता कम नहीं हुई है.

उन्होंने कहा, “कई जिलों में किसानों ने धान की बुवाई की तैयारी शुरू तक नहीं की है. जिन किसानों ने धान की पौध के लिए नर्सरी तैयार की थी, वे अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कम बारिश के कारण पौधे सूख सकते हैं.”

सामान्य तौर पर जून के अंत तक धान की नर्सरी और खेत तैयार हो जाते हैं, लेकिन इस बार बारिश की कमी ने पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर दिया है.

किसानों ने बताई अपनी परेशानी

गढ़वा जिले के किसान भूषण सिंह ने बताया कि जिले में अब तक बहुत कम बारिश हुई है, जिससे किसानों के बीच चिंता का माहौल है. उन्होंने कहा, “हम धान की पौध के लिए नर्सरी भी तैयार नहीं कर पाए हैं. आमतौर पर इस समय तक नर्सरी और खेत तैयार हो जाते हैं तथा जुलाई के पहले सप्ताह से रोपाई शुरू हो जाती है.”

वहीं लातेहार जिले के गारू प्रखंड के किसान मनोरंजन किशन ने भी खेती की तैयारियां प्रभावित होने की बात कही. उन्होंने बताया कि अभी तक खेत पूरी तरह तैयार नहीं हो सके हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को सरकार की ओर से धान के बीज भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं.

मानसून की रफ्तार रही धीमी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार दक्षिण-पश्चिमी मानसून 12 जून को झारखंड पहुंचा था, लेकिन कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई.

रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उपनिदेशक अभिषेक आनंद ने कहा, “फिलहाल झारखंड में मानसून कमजोर है. हमें उम्मीद है कि अगले दो-तीन दिनों में यह शेष दो जिलों-गढ़वा और पलामू को भी कवर कर लेगा. 26 जून के बाद मानसून के सक्रिय होने की संभावना है.” मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है, जिससे किसानों को कुछ राहत मिल सकती है.

बारिश के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं. राज्य में गढ़वा और साहिबगंज सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं, जहां बारिश 99 प्रतिशत और 98 प्रतिशत कम दर्ज की गई है. रांची और दुमका को छोड़कर बाकी सभी जिलों में 41 से 99 प्रतिशत तक कम वर्षा हुई है.

इनमें से 16 जिलों में बारिश की कमी 60 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है. आंकड़ों के अनुसार 23 जून तक राज्य में औसतन 122.6 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 49.5 मिलीमीटर वर्षा ही दर्ज की गई है.

कृषि विशेषज्ञों ने दी वैकल्पिक फसलों की सलाह

मौजूदा हालात को देखते हुए कृषि विशेषज्ञ भी चिंतित हैं. रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के शोध निदेशक पी.के. सिंह ने कहा, “मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए खरीफ सीजन किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है. हम उन्हें धान के बजाय कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों की खेती पर विचार करने की सलाह दे रहे हैं.”

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार के लिए इस स्थिति से निपटने हेतु एक आकस्मिक योजना भी तैयार की है. झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए मडुआ, मक्का और दलहन जैसी जलवायु-अनुकूल फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई जा रही है.

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उन्होंने कहा, “किसानों की आय में स्थिरता लाने और संभावित आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, मत्स्य पालन तथा वन-उत्पाद आधारित अन्य गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है.”

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ ऑनलाइन बैठक में तिर्की ने कम वर्षा वाले जिलों के किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज देने का आग्रह भी किया है. अब किसानों की नजर आने वाले दिनों की बारिश और सरकार की राहत योजनाओं पर टिकी हुई है.

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