Jharkhand Politics: ED समन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे झारखंड CM हेमंत सोरेन, BJP बोली- 'ये डर अच्छा लगा'
Ranchi: झारखंड के राजा बाबू ने ईडी के सामने पेश नहीं होने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. जेल जाने के डर से कानून के दर पर दया की भीख मांग रहे हैं. ये डर अच्छा लगा.

Jharkhand News: जमीन घोटाला मामले में ईडी की ओर से दोबारा समन भेजे जाने के खिलाफ सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) सुप्रीम कोर्ट पहुंच गये हैं. उन्होंने ईडी के समन को चुनौती देते हुए रिट पिटीशन दायर किया है. सीएम के कोर्ट पहुंचते ही बीजेपी ने हेमंत सोरेन पर हमला बोलना शुरू कर दिया है. बीजेपी ने तंज कसते हुए कहा कि, विरोधी दल के नेताओं को गिरफ्तार कराने वाले अज जेल के डर से कानून के दर पर दया की भीख मांग रहे हैं.
'ये डर अच्छा लगा'
बाबूलाल मरांडी ने ट्वीट करते हुए कहा कि, 'झारखंड के राजा बाबू ने ईडी के सामने पेश नहीं होने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. विरोधी दलों के नेताओं, पत्रकारों और आम जनता पर फर्जी मुकदमें कर पुलिस के माध्यम से अरेस्ट करवाने वाले आज जेल जाने के डर से कानून के दर पर दया की भीख मांग रहे हैं. ये डर अच्छा लगा. राजा हो या रंक! कानून और जेल जाने का डर तो होना ही चाहिए हेमंत जी.'
झारखण्ड के राजा बाबू ने @dir_ed के सामने पेश नहीं होने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विरोधी दलों के नेताओं, पत्रकारों और आम जनता पर फर्जी मुकदमें कर पुलिस के माध्यम से अरेस्ट करवाने वाले आज जेल जाने के डर से कानून के दर पर दया की भीख मांग रहे हैं...
— Babulal Marandi (@yourBabulal) August 24, 2023
ये डर अच्छा…
'महापाप से जुड़े सवालों का जवाब नहीं'
वहीं इससे पहले पूछताछ के लिए ईडी ऑफिस न पहुंचने पर भी बाबूलाल मरांडी ने सीएम पर निशाना साधा था. बाबूलाल ने कहा था कि, 'झारखंड सोरेन राज(महाजन) परिवार के एक्सिडेंटल राजकुमार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी से एक सवाल, सुना है आदिवासियों की बेहिसाब जमीन-जायदाद हड़पकर खुद के नाम कर लेने से जुड़े मनी लॉंड्रिंग मामले में ईडी के दुबारा बुलावे पर भी आप डर के मारे ईडी के सवालों का जवाब देने नहीं गये. क्योंकि आदिवासी जमीन हड़पने के महापाप से जुड़े सवालों का कोई जवाब नहीं है आपके पास.'
'ये सुविधा सिर्फ आपके लिए ही क्यों?'
बीजेपी नेता ने आगे कहा, आपने ईडी को चिट्ठी लिखकर कहा है कि आप इस बुलावे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गये हैं, इसलिये फैसला आने तक कोई कार्रवाई/पूछताछ/सम्मन नहीं की जाए. सिर्फ कोर्ट चले जाने भर से कोई जांच एजेंसी/पुलिस से कोई कार्रवाई जारी नहीं रखने वाली यह सुविधा आपको सिर्फ खुद के साथ सोरने परिवार के लिये ही चाहिये, या आप झारखंड के उन पीड़ित लोगों को भी यह सुविधा देंगे जिन पर पुलिस का केश मुकदमा हुआ है और वे अग्रिम जमानत या स्टे के लिये कोर्ट में गये हुए हैं?
'जनता के बारे कभी कुछ सोचा है?'
'बेहतर होगा कि आप जैसी सुविधा कानून से हटकर खुद के लिये चाहते हैं. ठीक उसी तरह एक लोक कल्याणकारी आदेश निकाल दीजिये कि झारखंड में जो कोई भी किसी मामले में कोर्ट में चला जायेगा, उससे कोर्ट से कोई आदेश आने तक न तो पुलिस पूछताछ करेगी न कोई कार्रवाई करेगी. आपके इस नेक काम से न सिर्फ आपका बल्कि झारखंड के केश-मुकदमा और पुलिस प्रताड़ना से प्रभावित हजारों नहीं लाखों लोगों का कल्याण हो जायेगा.'
झारखंड सोरेन राज(महाजन) परिवार के एक्सिडेंटल राजकुमार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी से एक सवाल-
— Babulal Marandi (@yourBabulal) August 24, 2023
सुना है आदिवासियों की बेहिसाब ज़मीन-जायदाद हड़पकर खुद के नाम कर लेने से जुड़े मनी लॉंड्रिंग मामले में @dir_ed के दुबारा बुलावे पर भी आप डर के मारे ईडी के सवालों का जवाब देने नहीं गये।…
'आपके पास बेहिसाब पैसा है, आप अपने खिलाफ जांच को भटकाने, लटकाने के लिये देश के मंहगे वकीलों पर करोड़ों रुपये खर्च कर सुप्रीम कोर्ट चले जाते हैं. लेकिन कभी झारखंड के उन गरीब आदिवासियों को भी अपने जैसी करोड़ों के खर्च वाली यही सुविधा देने के बारे में आपने सोचा है जो कानूनी दांवपेंच में फंसे हैं, जेल में सड़ रहे हैं, पुलिस उनका जीना हराम किये हुए है, लेकिन पैसे के अभाव में वे यातना-प्रताड़ना की चक्की में पिस रहे हैं.'
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Source: IOCL






















