झारखंड: BJP का प्रदर्शन, छात्रों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग
झारखंड में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने तथा भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच को लेकर कई जिलों के प्रशासनिक मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया.

झारखंड में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार (11 सितंबर) को कई जिलों के प्रशासनिक मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया और छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने तथा भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की. इस प्रदर्शन के साथ ही बीजेपी का चार दिवसीय चरणबद्ध आंदोलन समाप्त हो गया जो 8 सितंबर से शुरू हुआ था.
रामगढ़ में बीजेपी के जिला अध्यक्ष संजीव कुमार सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग-23 से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला और उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव किया. इस दौरान उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. बाद में उन्होंने रामगढ़ के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा.
पूर्व सीएम ने युवाओं की आकांक्षाओं को कुचलने का लगाया आरोप
प्रदर्शन में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने राज्य सरकार पर युवाओं की आकांक्षाओं को कुचलने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि रोजगार का इंतजार कर रहे झारखंड के युवाओं के साथ अन्याय किया जा रहा है. उन्होंने मांग की कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए.
बड़कागांव के विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि बीजेपी छात्रों के अधिकारों के लिए सड़क से लेकर विधानसभा तक संघर्ष करेगी. देवघर में शिवलोक परिसर से एक बड़ा जुलूस निकाला गया, जो शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए जिला कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया.
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23 अगस्त विरोध मार्च में 1,100 से अधिक प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज
धनबाद के विधायक राज सिन्हा, पूर्व कृषि मंत्री रणधीर सिंह और देवघर के पूर्व विधायक नारायण दास समेत अन्य नेता प्रदर्शन में शामिल हुए. सिन्हा ने कहा कि सरकार जब तक छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. खूंटी और गोड्डा जिलों में भी इसी तरह के प्रदर्शन किए गए.
गौरतलब है कि 23 अगस्त को रांची, गिरिडीह और हजारीबाग में विरोध मार्च के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच हुई झड़प के बाद 50 से अधिक नामजद और 1,100 से अधिक अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कम से कम छह प्राथमिकी दर्ज की गई थीं.
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