CM उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की तारीफ की, 'आपको मामा...'
Jammu Kashmir News: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्रीनगर में PMGSY-IV (बैच-II) का शुभारंभ किया, जिससे जम्मू-कश्मीर में 8000 करोड़ रुपये के ग्रामीण विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ.

राजनीति में अक्सर तीखे वार-पलटवार देखने को मिलते हैं, लेकिन मंगलवार (28 अप्रैल) को जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से एक बेहद खास और सकारात्मक सियासी तस्वीर सामने आई. अवसर था श्रीनगर के SKICC में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा PMGSY-IV (बैच-II) की लॉन्चिंग का.
इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार के बीच गजब की जुगलबंदी देखने को मिली. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने न सिर्फ शिवराज सिंह चौहान की जमकर तारीफ की, बल्कि उन्हें मध्य प्रदेश के उनके मशहूर उपनाम 'मामा' कहकर भी संबोधित किया.
'आप जम्मू-कश्मीर के सच्चे दोस्त और हमदर्द हैं'
मंच से केंद्रीय मंत्री का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक मजबूत राजनीतिक संदेश दिया. उन्होंने खुले तौर पर कहा, "आप न केवल जम्मू-कश्मीर के दोस्त हैं, बल्कि एक सच्चे शुभचिंतक भी हैं. मध्य प्रदेश में लोग आपको 'मामा' कहते हैं, और आपकी यह स्वीकार्यता उस सम्मान को दर्शाती है जो आपने अपने काम से कमाया है." उमर ने भरोसा जताया कि केंद्र से जो भी मंजूरियां मिली हैं, राज्य सरकार उन्हें जल्द से जल्द जमीन पर उतारेगी.
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कश्मीर के लिए 8000 करोड़ का बड़ा ऐलान
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर का भारत के लिए एक विशेष भावनात्मक और विकासात्मक महत्व है. उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में ही जम्मू-कश्मीर में ग्रामीण विकास की विभिन्न पहलों के तहत लगभग 8,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई गई है. चौहान ने जोर देते हुए कहा:
- सड़कें ही विकास का रास्ता हैं: PMGSY-IV (बैच-II) से पूरे केंद्र शासित प्रदेश में ग्रामीण कनेक्टिविटी का जाल बिछेगा.
- पक्के घर का वादा: कोई भी पात्र गरीब परिवार पक्के घर से वंचित नहीं रहेगा, यह सरकार की मुख्य प्राथमिकता है.
- महिला सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों (SHG) के जरिए ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी बनाया जाएगा.
किसानों के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगा नया मास्टरप्लान
शिवराज सिंह चौहान ने जम्मू-कश्मीर की कृषि और बागवानी की तस्वीर बदलने के लिए कई अहम घोषणाएं कीं. उन्होंने कहा कि यहाँ की छोटी जोत वाली जमीनों के लिए एक विशेष रणनीति की जरूरत है:
- एकीकृत खेती (Integrated Farming): किसानों को सिर्फ खेती नहीं, बल्कि बागवानी, मत्स्य पालन, पशुधन और मधुमक्खी पालन को एक साथ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि आय के कई रास्ते खुल सकें.
- क्लीन प्लांट प्रोग्राम (Clean Plant Programme): सेब और अखरोट की घटिया रोपण सामग्री से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए जम्मू-कश्मीर विश्वविद्यालय के साथ मिलकर यह प्रोग्राम शुरू होगा. इससे किसानों को रोग-मुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले पौधे मिलेंगे.
- आएगी ICAR की विशेष टीम: कश्मीर की मिट्टी, पानी और जलवायु का वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम जल्द ही जम्मू-कश्मीर भेजी जाएगी. यह टीम यहाँ की खेती के लिए एक लंबा रोडमैप तैयार करेगी.
केंद्रीय मंत्री ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं की प्रतिभा पर भी पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि अगर इन युवाओं को सही अवसर और मंच मिले, तो वे वैश्विक स्तर पर अपनी कामयाबी का डंका बजा सकते हैं. इस भव्य कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और जन प्रतिनिधि मौजूद रहे.
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