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J&K: पुलिस ने बड़े आतंकवादी भर्ती मॉड्यूल का किया भंडाफोड़, लश्कर का शब्बीर अहमद लोन ऑपरेटर

Jammu Kashmir News in Hindi: शब्बीर अहमद लोन मूल रूप से कश्मीर के गांदरबल ज़िले के कंगन का रहने वाला है. इसने पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में हथियारों की व्यवस्थित ट्रेनिंग ली.

J&K पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) यूनिट का दावा है कि उसने एक बड़े आतंकवादी भर्ती मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. यह मॉड्यूल नियंत्रण रेखा (LoC) के पार पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के साथ तालमेल बिठाकर और बांग्लादेश में मौजूद एक नेटवर्क की मिलीभगत से काम कर रहा था. इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ तब हुआ, जब पुलिस ने श्रीनगर, गांदरबल और शोपियां जिले में कई जगहों पर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया.

कश्मीर घाटी में 10 जगहों पर ये तलाशी अभियान, NIA एक्ट के तहत नामित स्पेशल जज की अदालत द्वारा जारी सर्च वारंट के आधार पर चलाए गए. ये वारंट पुलिस स्टेशन CIK में दर्ज FIR नंबर 01/2026 से जुड़े थे. इसमें गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 13, 17, 18, 18-B, 20, 38 और 39 के तहत मामले दर्ज किए गए थे.

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लश्कर का आतंकी शब्बीर अहमद लोन चला रहा था मॉड्यूल

जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि इस मॉड्यूल को पाकिस्तान में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक आतंकवादी, शब्बीर अहमद लोन चला रहा है. शब्बीर मूल रूप से कश्मीर के गांदरबल ज़िले के कंगन का रहने वाला है और वह राजू और ज़फ़र सिद्दीकी जैसे कई नकली नामों (उपनामों) से काम करता है. यह हैंडलर बेहद कट्टरपंथी और प्रशिक्षित है. इसने पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में हथियारों की व्यवस्थित ट्रेनिंग (दौरा-ए-आम और दौरा-ए-खास) ली है.

बांग्लादेश सीमा के रास्ते भारत में घुसा था शब्बीर

शब्बीर ने शुरू में 1990 के दशक के आखिर में एक आतंकवादी संगठन के लिए 'ओवर-ग्राउंड वर्कर' (ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता) के तौर पर काम किया था, जिसके बाद 2000 के दशक की शुरुआत में वह आतंकवादी संगठन LeT में शामिल हो गया. बाद में वह बांग्लादेश सीमा के रास्ते भारत में घुस आया और तब से वह आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है, जिसमें कई बड़े हमलों की साज़िश रचना भी शामिल है.

भारत में पहले कानूनी कार्रवाई का सामना करने के बाद, वह चुपके से बांग्लादेश भाग गया. तब से वह वहीं से काम कर रहा है और आतंकवादियों की भर्ती व अपने नेटवर्क के विस्तार का तालमेल बिठा रहा है.

जांच में यह भी पता चला है कि शब्बीर अहमद लोन, प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के बड़े नेताओं के साथ लगातार संपर्क में है. उसने सीमा पार से चलने वाले आतंकवादी मॉड्यूल को फिर से सक्रिय करने में अहम भूमिका निभाई है, जिनमें हाल ही में देश के अलग-अलग हिस्सों में पकड़े गए मॉड्यूल भी शामिल हैं.

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अभी बांग्लादेश में मौजूद है शब्बीर लोन

माना जा रहा है कि वह इस समय बांग्लादेश में ही मौजूद है और अपने साथियों व ओवर-ग्राउंड वर्करों के नेटवर्क के ज़रिए अपनी गतिविधियों को अंजाम देता रहता है. इस तरह, वह विदेश की धरती से काम करने वाला एक 'मोस्ट वांटेड' (सबसे ज़्यादा वांछित) आतंकवादी है. इसी से जुड़े एक घटनाक्रम में, CIK ने इससे पहले उसके एक करीबी सहयोगी इरफ़ान अहमद वानी को गिरफ़्तार किया था. इरफ़ान अहमद वानी शोपियां के हीरपुरा का रहने वाला 45 वर्षीय व्यक्ति है, जो एक स्थानीय मस्जिद में धार्मिक कार्य करने वाले के तौर पर काम करता था.

शुरुआती जांच से पता चलता है कि आरोपी, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए अपने हैंडलर शब्बीर अहमद लोन और पाकिस्तान तथा अफ़गानिस्तान में मौजूद अन्य आतंकवादियों के साथ लगातार संपर्क में था. वह स्थानीय स्तर पर भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने में सक्रिय रूप से शामिल था.

एन्क्रिप्टेड संचार प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल

जांच में आगे यह भी पता चला है कि यह मॉड्यूल अपनी गतिविधियों को गुप्त रखने और सीमा पार मौजूद अपने हैंडलरों के साथ तालमेल बिठाने के लिए एन्क्रिप्टेड संचार प्लेटफ़ॉर्म और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहा था.

आज की गई तलाशी के दौरान, डिजिटल डिवाइस, सिम कार्ड, मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप और जांच से जुड़े अन्य दस्तावेज़ों सहित कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद कर ज़ब्त कर ली गई है.

इस जांच का उद्देश्य, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के भीतर और बांग्लादेश सहित विदेशी धरती से काम कर रहे ओवर-ग्राउंड वर्कर (OGW), मददगारों, बिचौलियों और हमदर्दों सहित, इस पूरे आतंकी तंत्र में शामिल सभी व्यक्तियों की पहचान करके उनके ख़िलाफ़ कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए इस पूरे आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करना है.

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