वंदे मातरम् विवाद: CM उमर अब्दुल्ला बोले, 'कांग्रेस ने अपनी...'
Vande Mataram Row: जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ये मेरा 8वां 15 अगस्त का परेड था जिसमें पहली बार वंदे मातरम् को शामिल किया गया. मुझे भी समझने में थोड़ा समय लगा.

स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को लेकर पैदा हुआ विवाद गहरा गया है. वंदे मातरम् विवाद पर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भी अपनी तरफ से इस मामले पर स्पष्ट किया है कि अगर आप वीडियो देखें, तो वहां 'वंदे मातरम्' के तीनों पद गाए गए थे तो फिर विवाद किस बात का है.
हमें इसकी आदत पड़ने में भी थोड़ा समय लगेगा- उमर अब्दुल्ला
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, "ये मेरा 8वां 15 अगस्त का परेड था जिसमें पहली बार वंदे मातरम्् को शामिल किया गया. मुझे भी समझने में थोड़ा समय लगा. शायद कांग्रेस को भी सामंजस्य बनाने में समय लगा और कांग्रेस ने भी अपनी तरफ से इस मामले पर साफ कहा है कि अगर आप वीडियो देखें, तो वहां 'वंदे मातरम्' के तीनों पद गाए गए थे. तो फिर, असल में विवाद किस बात का है? हमें इसकी आदत पड़ने में भी थोड़ा समय लगेगा."
क्या है वंदे मातरम् को लेकर विवाद?
दरअसल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम से जुड़े एक वायरल वीडियो के बाद विवाद शुरू हुआ. कार्यक्रम में वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के गायन के दौरान सोनिया गांधी को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से बात करते हुए देखा गया. इसे लेकर बीजेपी ने आपत्ति जताई. हालांकि कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी हर चीज में गलती निकालने के लिए जानी जाती है.
झारखंड में प्रदर्शन और सरकार से बातचीत पर क्या बोले अब्दुल्ला?
स्टूडेंट प्रोटेस्टर्स और झारखंड सरकार के बीच बातचीत के नए दौर पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, "अगर स्टूडेंट्स की मांगें या अनुरोध जायज हैं, तो उनसे बातचीत होनी चाहिए. अगर वे जायज नहीं हैं, तो साफ़ तौर पर कहा जाना चाहिए कि उनकी दलीलों में कोई दम नहीं है, उनमें कोई सच्चाई नहीं है और उनसे कोई बातचीत नहीं होगी.''
उन्होंने ये भी कहा कि हालांकि, अगर बातचीत का एक दौर पहले ही हो चुका है और दूसरे दौर पर चर्चा हो रही है, तो इसका मतलब है कि उनकी मांगों में कुछ दम है. उन्होंने कहा, ''अगर NEET सिस्टम नहीं होता, तो धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा नहीं देना पड़ता, क्योंकि परीक्षाएं राज्य स्तर पर होतीं, अगर किसी राज्य में कोई घोटाला होता, तो उस राज्य के मंत्री को ज़िम्मेदार ठहराया जाता, लेकिन सेंट्रलाइज़ेशन का नतीजा यह हुआ कि एक राज्य में लगे आरोप या घोटाले की वजह से केंद्रीय मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा."
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