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Jammu Kashmir News: कश्मीर की 3 यूनिवर्सिटी ने US की KCF के साथ एकेडमिक समझौते किए खत्म, MoU भी रद्द

Jammu Kashmir News In Hindi: कश्मीर की तीन प्रमुख यूनिवर्सिटी ने बीतें कुछ हफ्तों में औपचारिक आदेश जारी कर अमेरिका स्थित नॉन-प्रॉफिट संस्था कश्मीर केयर फाउंडेशन के साथ एकेडमिक समझौते खत्म कर दिए हैं.

कश्मीर की तीन प्रमुख यूनिवर्सिटी ने अमेरिका स्थित एक नॉन-प्रॉफिट संस्था, कश्मीर केयर फाउंडेशन (KCF), अटलांटा के साथ अपने एकेडमिक समझौते खत्म कर दिए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, अंदरूनी समीक्षा के दौरान कुछ 'प्रतिकूल इनपुट' सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है.

MoU को तत्काल प्रभाव से किया रद्द

इन संस्थानों में कश्मीर यूनिवर्सिटी, इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी ऑफ कश्मीर ने पिछले कुछ हफ्तों में औपचारिक आदेश जारी करके प्रतिकूल इंटेलिजेंस रिपोर्टों के बाद, मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) और संबंधित समझौतों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है. कश्मीर केयर फाउंडेशन (KCF) अटलांटा स्थित एक नॉन-प्रॉफिट संस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा, मेंटरशिप और स्वास्थ्य पहलों के जरिए कश्मीरी छात्रों और पेशेवरों को सशक्त बनाना है.

कश्मीर केयर फाउंडेशन की अपनी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, कश्मीर के छात्रों के लिए शिक्षा, टेक्नोलॉजी और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता तक पहुंच प्रदान करके उनके लिए मौजूद कमियों को दूर करने का दावा करता है. इसके मुख्य फोकस क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य, STEM और क्षमता निर्माण शामिल हैं.

तीनों यूनिवर्सिटी ने MoU रद्द करने के बताए अलग कारण

इन्होंने अपना KCF-MenTOR प्रोग्राम शुरू भी किया था, जो छात्रों को बैंकिंग, क्लिनिकल साइकोलॉजी और मीडिया जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों से जोड़ता है और स्वास्थ्य विषयों और करियर विकास पर नियमित वेबिनार आयोजित करने का वादा करता है. इस फाउंडेशन की स्थापना डॉ. अल्ताफ लाल ने की थी, और इसमें डॉ. मुश्ताक मार्गूब सदस्य के तौर पर और डॉ. राम ए. विश्वकर्मा सलाहकार के तौर पर शामिल थे. हालांकि, तीनों यूनिवर्सिटी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक दस्तावेजों में MoU रद्द करने के अलग-अलग कारण बताए गए हैं.

कश्मीर यूनिवर्सिटी के पत्र में कहा गया है कि उसने सक्षम अधिकारियों द्वारा की गई समीक्षा के बाद अपना MoU रद्द कर दिया, जिसमें यह निष्कर्ष निकला कि इस व्यवस्था को जारी रखना संस्थान के व्यापक हित में नहीं था. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि समझौते की अवधि के दौरान कोई वित्तीय या एकेडमिक देनदारी उत्पन्न नहीं हुई थी.

KCF से फैकल्टी ने खुद को किया अलग

इसी तरह, इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने MoU रद्द करने के लिए अपने समझौते के प्रावधानों का हवाला दिया और कहा कि दोनों पक्षों के बीच कोई संविदात्मक या वित्तीय दायित्व उत्पन्न नहीं हुआ था. SKUAST-K में, अप्रैल 2025 में हस्ताक्षरित एक 'लेटर ऑफ एग्रीमेंट' को इसके अनुसंधान निदेशालय द्वारा जारी एक आधिकारिक ज्ञापन के माध्यम से रद्द कर दिया गया, जो फाउंडेशन के साथ पूर्ण रूप से संबंध विच्छेद का संकेत है.

इस घटनाक्रम ने एकेडमिक हलकों में हलचल मचा दी है और इस सहयोग से जुड़े फैकल्टी सदस्यों ने औपचारिक रूप से खुद को KCF से अलग कर लिया है. न्यूज एजेंसी को मिले ईमेल्स से पता चलता है कि IUST के शिक्षाविदों ने फाउंडेशन को लिखकर बताया कि उनका जुड़ाव पूरी तरह से यूनिवर्सिटी के निर्देशों के मुताबिक था और इस सहयोग से पहले उन्हें इस संगठन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उन्होंने अपनी प्रोफाइल हटाने और सभी संचार माध्यमों को बंद करने की भी मांग की है.

यूनिवर्सिटीज ने कोई भी फंड का नहीं किया लेन-देन

हालांकि आधिकारिक आदेशों में खास बातों का विस्तार से जिक्र नहीं है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि समीक्षा प्रक्रियाओं के दौरान मिली कुछ प्रतिकूल जानकारियों और संवेदनशील टिप्पणियों के बाद इन समझौतों की जांच शुरू हुई, जिसके चलते यूनिवर्सिटीज ने एहतियात के तौर पर खुद को अलग कर लिया.

खास बात यह है कि तीनों यूनिवर्सिटीज ने इस बात पर जोर दिया है कि न तो किसी तरह के फंड का लेन-देन हो और न ही कोई देनदारी बनी. इससे पता चलता है कि ये सहयोग ज्यादातर अकादमिक पहुंच और प्रस्तावित पहलों तक ही सीमित रहे. कई संस्थानों द्वारा एक साथ खुद को अलग कर लेना इस बात को दिखाता है कि विदेशी अकादमिक सहयोगों को लेकर अब ज्यादा सावधानी बरती जा रही है, खासकर उन क्षेत्रों में जिनमें टेक्नोलॉजी, रिसर्च और डेटा के आदान-प्रदान का काम शामिल है.

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