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Hazratbal Controversy: महबूबा मुफ्ती ने वक्फ बोर्ड पर की कार्रवाई मांग की, CM उमर अब्दुल्ला ने भी उठाए सवाल

Jammu-Kashmir News: पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने हजरतबल दरगाह विवाद में वक्फ बोर्ड और उसके अध्यक्ष पर कार्रवाई की माँग की. CM उमर अब्दुल्ला ने धार्मिक स्थल पर सरकारी प्रतीक लगाने पर सवाल उठाए.

हजरतबल दरगाह में राज्य चिह्न वाली उद्घाटन पट्टिका लगाए जाने के मामले ने जम्मू-कश्मीर की सियासत को गरमा दिया है. पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इस घटना को मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं पर गहरा आघात बताते हुए वक्फ बोर्ड और उसके प्रमुख के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की. वहीं, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि धार्मिक स्थल पर सरकारी प्रतीक लगाने की कोई आवश्यकता ही नहीं थी.

महबूबा मुफ्ती का वक्फ बोर्ड पर हमला

महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से सीधे तौर पर आह्वान किया कि वे वक्फ बोर्ड को तुरंत निलंबित करें और बाद में उसे भंग कर उसका पुनर्गठन करें. उन्होंने कहा कि हजरतबल दरगाह जैसे पवित्र स्थल पर राज्य चिह्न का इस्तेमाल पूरी तरह अनुचित है.

महबूबा ने कहा, "धार्मिक भावनाओं के चलते प्रतीक चिह्न को खराब करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, सरकार को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और उन सदस्यों के ख़िलाफ प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए जिन्होंने ऐसा करने दिया. हजरतबल एक धार्मिक स्थल है, न कि राज्याभिषेक या राजनीतिक प्रतीकवाद का स्थल."

धारा 295-ए के तहत कार्रवाई की माँग

पीडीपी अध्यक्ष ने इस मामले को भारतीय दंड संहिता की धारा 295-ए से जोड़ा. यह धारा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से जानबूझकर की गई कार्रवाई से संबंधित है. महबूबा ने कहा कि इस मामले में वक्फ बोर्ड जिम्मेदार है और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.

महबूबा मुफ्ती ने वक्फ़ बोर्ड की अध्यक्ष दरख़्शां अंद्राबी की तीखी आलोचना की. उन्होंने कहा कि पट्टिका तोड़ने वालों पर PSA लगाने की माँग करना पूरी तरह गलत है.

महबूबा ने कहा, "स्थानीय लोगों पर पीएसए लगाने के लिए भारत के गृह मंत्री से आग्रह करना अस्वीकार्य है. असली सवाल यह है कि एक ऐसे धर्मस्थल पर प्रतीक चिन्ह लगाने की अनुमति किसने दी जहाँ मूर्ति पूजा का कोई विचार ही नहीं है."

उन्होंने कहा, "यह भाजपा का कार्यक्रम नहीं था. दुर्भाग्य से, इस तरह से हजरतबल की पवित्रता से समझौता किया गया. अगर मौजूदा बोर्ड अब भी काम करता रहा, तो भाजपा की मुस्लिम-विरोधी विचारधारा से प्रभावित ऐसी कार्रवाइयाँ मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुँचाती रहेंगी."

'धार्मिक स्थल पर प्रतीक क्यों?'- उमर अब्दुल्ला

इस विवाद पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों पर सरकारी प्रतीकों का इस्तेमाल कभी नहीं किया जाता और न ही इसकी कोई परंपरा है.

उमर अब्दुल्ला ने कहा, "पहला सवाल यह है कि क्या प्रतीक को नींव पत्थर पर उत्कीर्ण करना चाहिए था. मैंने कभी किसी धार्मिक कार्यक्रम में यह प्रतीक इस्तेमाल होते नहीं देखा. तो हजरतबल श्राइन के पत्थर पर इसे लगाने की आवश्यकता क्यों थी? पत्थर लगाने की क्या जरूरत थी? क्या सिर्फ काम करना पर्याप्त नहीं था? हजरतबल श्राइन को यह रूप शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने दिया. क्या उन्होंने कहीं ऐसा कोई पत्थर लगाया?"

उन्होंने कहा, "लोग शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के काम को याद रखते हैं, भले ही उन्होंने अपने लिए कोई पत्थर न लगाया हो. सरकारी प्रतीक केवल सरकारी कार्यक्रमों में इस्तेमाल किए जाते हैं. मस्जिदें, दरगाहें, मंदिर, गुरुद्वारे सरकारी स्थल नहीं हैं, ये धार्मिक स्थल हैं. वहां सरकारी प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता."

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