Hajj 2027: जम्मू-कश्मीर में हज यात्रा के लिए सिर्फ 29% आवेदन, पिछले साल के मुकाबले भारी गिरावट
Jammu Kashmir News In Hindi: जम्मू-कश्मीर में हज 2027 (Hajj 2027) के आवेदनों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. 8,000 सीटों के कोटे के मुकाबले अब तक सिर्फ 2,300 फॉर्म आए हैं.

क्या ईरान-अमेरिका युद्ध का असर जम्मू-कश्मीर के लोगों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है? या खाड़ी देशों तक मौजूदा युद्ध के फैलने का डर सता रहा है? या फिर हज यात्रा का बढ़ता खर्च और भीषण गर्मी इसके लिए जिम्मेदार है? वजह चाहे जो भी हो, लेकिन इसका सीधा असर जम्मू-कश्मीर में हज 2027 (Hajj 2027) की तैयारियों और आवेदनों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है.
हज आवेदन की समय-सीमा खत्म होने में अब एक हफ़्ते से भी कम समय बचा है, लेकिन जम्मू-कश्मीर हज कमेटी (जम्मू-कश्मीर Hajj Committee) को हज यात्रा के लिए सिर्फ़ 29 प्रतिशत आवेदन ही मिले हैं. यह पिछले साल के मुकाबले 48% से ज़्यादा की भारी गिरावट है.
8,000 के कोटे पर सिर्फ 2,300 आवेदन
हज 2027 के लिए जम्मू-कश्मीर को 8,000 सीटों का कोटा मिला है, लेकिन अब तक इसके मुकाबले सिर्फ़ 2,300 के करीब ही आवेदन प्राप्त हुए हैं. जम्मू-कश्मीर हज कमेटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. शुजात अहमद कुरैशी ने चिंता जताते हुए कहा कि लोगों का रिस्पॉन्स उम्मीद से बहुत कम रहा है. हज आवेदन फ़ॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख 20 जुलाई, 2026 है. डॉ. कुरैशी ने वैध पासपोर्ट वाले सभी योग्य और इच्छुक लोगों से अपील की है कि वे आखिरी तारीख का इंतज़ार किए बिना अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी करें. साथ ही उन्होंने लोगों से जागरूकता फैलाने की भी अपील की ताकि कोई भी योग्य व्यक्ति इस मौके से न चूके.
'मुस्लिम बहुल राज्य होने के बाद भी हम हिन्दू...' कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज का विवादित बयान
आवेदनों में कमी के 4 मुख्य कारण
अधिकारियों और टूर ऑपरेटरों के अनुसार, हज आवेदनों में आई इस भारी गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण माने जा रहे हैं. पिछले कुछ सालों की तुलना में सरकारी हज का खर्च काफी बढ़ गया है. एक हज टूर ऑपरेटर के मुताबिक, सरकारी हज में अधिक खर्च के बावजूद सुविधाएं कम मिलती हैं, जबकि उसी कीमत पर प्राइवेट ऑपरेटर बेहतर डील दे रहे हैं. कुछ सालों में हज के दौरान भीषण गर्मी का मौसम रहा है, जिससे कई लोग आवेदन करने से हिचक रहे हैं. ईरान-अमेरिका और खाड़ी देशों में मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव व युद्ध फैलने की आशंका ने भी लोगों को यात्रा करने से रोका है.
खतरे में पड़ सकता है अतिरिक्त कोटा
हज कमेटी के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर आवेदनों में कमी का यह ट्रेंड जारी रहता है, तो भविष्य में जम्मू-कश्मीर को मिलने वाले कोटे पर कैंची चल सकती है. वर्तमान में जम्मू-कश्मीर को जनसंख्या के आधार पर 6,000 का कोटा मिलता है और 2,000 सीटों का अतिरिक्त कोटा दिया गया है. आवेदन न बढ़ने पर यह 2,000 का अतिरिक्त कोटा हमेशा के लिए खत्म हो सकता है.
पिछले सालों का क्या रहा है ट्रेंड?
- साल 2025: जम्मू-कश्मीर से 4,200 के कोटे पर 6,862 आवेदन मिले थे और कुल 4,351 यात्रियों ने हज किया था.
- साल 2026: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से 8,000 के कोटे पर सिर्फ़ 4,200 आवेदन मिले थे, जिनमें से 3,624 यात्रियों ने हज किया था.























