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ईरान से भारत लौटे कश्मीरी छात्रों के लिए बेकार बसें, विपक्ष ने घेरा तो CM अब्दुल्ला ने लिया ये एक्शन

Iran Israel War: युद्ध प्रभावित ईरान से बुधवार को निकाले गए 110 लोगों में जम्मू-कश्मीर के 90 छात्र भी शामिल थे. उन्हें पहले आर्मेनिया ले जाया गया और यहां से ये कतर की राजधानी से दिल्ली पहुंचे.

Iran Israel War: ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग के बीच गुरुवार (19 जून) को सुबह ईरान से छात्रों का पहला जत्था सुरक्षित रूप से दिल्ली लौट आया, लेकिन कश्मीर में खराब व्यवस्था के कारण छात्रों को 10 घंटे से अधिक समय तक इंतजार करने के बाद वाकयुद्ध शुरू हो गया है. इंडिगो की फ्लाइट से 94 छात्र नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे, लेकिन उन्हें लेने और कश्मीर में उनके घरों तक पहुंचने के लिए उपयुक्त परिवहन की व्यवस्था करने के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार का कोई अधिकारी मौजूद नहीं था.

दिल्ली एयरपोर्ट से एक पीड़ित छात्र ने एक वीडियो संदेश में कहा, "हम सुबह-सुबह यहां उतरे और यहां कोई अधिकारी मौजूद नहीं था और हमें जो बसें मुहैया कराई गई हैं, वे जम्मू-कश्मीर सड़क परिवहन विभाग की हैं, जो खराब हालत में हैं." उन्होंने आगे कहा, "हम तीन देशों से होकर आए हैं और पिछले चार दिनों से सड़क पर हैं और अब हमें इन क्षतिग्रस्त बसों में 20 घंटे की बस यात्रा करने के लिए कहा जा रहा है." 

सीएम अब्दुल्ला ने किया डीलक्स बसों का इंतजाम 
वीडियो के वायरल होने के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घोषणा की कि ईरान से निकाले गए छात्रों को डीलक्स बसों में दिल्ली से केंद्र शासित प्रदेश ले जाया जाएगा. मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि रेजिडेंट कमिश्नर को छात्रों को ले जाने के लिए जम्मू और कश्मीर सड़क परिवहन निगम की डीलक्स बसों की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है.

मुख्यमंत्री के ऑफिस की तरफ से कहा गया कि कार्यालय ने कहा, "मुख्यमंत्री ने ईरान से निकाले गए छात्रों के दिल्ली से जम्मू-कश्मीर ले जाने के लिए व्यवस्थित बसों की क्वालिटी के बारे में अनुरोध पर ध्यान दिया है." दरअसल, रेजिडेंट कमिश्नर को छात्रों के साथ समन्वय करने और उचित डीलक्स बसों की व्यवस्था सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया, जिसमें 10 घंटे से अधिक समय लगा, जिससे जम्मू-कश्मीर सरकार की छवि खराब हुई.

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दी ये सफाई
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने व्यवस्था में हुई गड़बड़ी को स्वीकार करने में जल्दबाजी दिखाई. नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक और प्रवक्ता तनवीर सादिक ने स्वीकार किया कि छात्रों को दिल्ली से कश्मीर ले जाने में कुछ समस्याएं 'गलत कम्यूनिकेशन' के कारण थीं. तनवीर ने आगे कहा कि छात्र आज देर रात या कल सुबह श्रीनगर पहुंचेंगे. सबसे बड़ी चुनौती उन्हें सुरक्षित भारत लाना था और सीएम ने सरकारी स्तर पर समन्वय की कमी को गंभीरता से लिया है.

विपक्ष ने सरकार को घेरा
वहीं इससे पहले विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रवक्ता इकबाल त्रंबू ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 'युद्ध के आघात' का सामना करने वाले छात्रों को उम्मीद होगी कि सरकार के अधिकारी उनका स्वागत करेंगे. त्रंबू ने कहा "हमारी अपनी सरकार अपने लोगों के प्रति असंवेदनशील है और दिल्ली से बच्चों को हवाई जहाज से घर लाने के बजाय उन्हें बसों में भरकर ले जाया गया है." 
 
बीजेपी ने क्या कहा?
वहीं बीजेपी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा, "मोदी सरकार यूक्रेन, बांग्लादेश से हजारों लोगों को वापस ला चुकी है और यहां तक कि ईरान-इजराइल युद्ध के दौरान भी वह लोगों को सुरक्षित वापस ला रही है और यहां उमर अब्दुल्ला सरकार है जो 90 छात्रों को संभालने में सक्षम नहीं है. जम्मू-कश्मीर सरकार उन्हें उचित बसें भी उपलब्ध कराने में विफल रही है."
 
ईरान से आए 110 लोगों में 90 लोग कश्मीरी
बता दें कि बुधवार को युद्ध प्रभावित ईरान से निकाले गए 110 लोगों में जम्मू-कश्मीर के 90 छात्र भी शामिल थे. उन्हें दोहा ले जाने से पहले आर्मेनिया ले जाया गया और यहां से छात्र गुरुवार की सुबह कतर की राजधानी से दिल्ली पहुंचे. 

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