अदालतों और चुनाव आयोग पर फारुक अब्दुल्ला के कॉमेंट से मचेगा बवाल! जानें- क्या कहा?
जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने कोर्ट्स और भारत निर्वाचन आयोग पर एक टिप्पणी की है जिसको लेकर सियासी बहस शुरू हो सकती है.

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने भारत निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका की कार्यप्रणाली को लेकर ऐसी टिप्पणी की है, जिस पर आने वाले दिनों में सियासी विवाद गहराने की संभावना है.
'वाइको इन पार्लियामेंट' नामक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि इतिहास में कई गलतियां हुई हैं. उनका कहना था कि चुनाव आयोग को पूरी तरह स्वायत्त बनाया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. उन्होंने न्यायपालिका का भी जिक्र करते हुए कहा कि यह आम लोगों के लिए न्याय की अंतिम उम्मीद होती है, इसलिए इसकी कार्यप्रणाली पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को और अधिक लोकतांत्रिक बनाया जाना चाहिए, न कि उसे सरकार या उस समय सत्ता में मौजूद सरकार की इच्छाओं पर निर्भर रहना चाहिए.
'20 जुलाई को राजधानी में अफरातफरी का माहौल था'
फारूक अब्दुल्ला ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन राजधानी में पूरी तरह अफरातफरी का माहौल था. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बेहद बेरहमी से व्यवहार किया गया, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता. उन्होंने कहा कि अब भारत को जागने की जरूरत है. जब तक लोग सरकार की कथित तानाशाही नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष नहीं करेंगे, तब तक भारत को महान नहीं बनाया जा सकता. उन्होंने कहा कि भारत को महान बनाने वाले उसके लोग हैं.
'विविधता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत'
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है, जहां अनेक भाषाएं, संस्कृतियां और जीवन जीने के अलग-अलग तरीके हैं. इसके बावजूद देश एकजुट है. उन्होंने कहा कि सभी लोग मिलकर देश की तरक्की कर सकते हैं और भारत को आगे बढ़ा सकते हैं. भारत की असली पहचान 'विविधता में एकता' है और इसी विविधता की रक्षा करना देश के भविष्य के लिए सबसे जरूरी है. उन्होंने कहा कि यदि विविधता सुरक्षित नहीं रहेगी, तो देश का भविष्य भी सुरक्षित नहीं रह पाएगा.






















