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उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार को दे दी चेतावनी, बोले- 'हम लोगों के धैर्य का गलत मतलब न निकालें'

Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र को चेताया कि राज्य का दर्जा बहाल करना लोगों का अधिकार है. अब्दुल्ला ने कहा कि यह मुद्दा शांतिपूर्ण तरीके से उठाया जाएगा.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा बहाल करना लोगों का मौलिक अधिकार है, और सरकार को लोगों के धैर्य का गलत मतलब नहीं निकालना चाहिए, क्योंकि हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं.

गांदरबल में पत्रकारों से बात करते हुए अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए वादों को पूरा करके, लद्दाख में फैली अशांति जैसी स्थिति को जम्मू-कश्मीर में भी न पनपने देने के प्रति आगाह किया.

यहां हालात पलभर में बदल सकते हैं - उमर अब्दुल्ला

अब्दुल्ला ने जोर देकर कहा कि यहां हालात पलभर में बदल सकते हैं, लेकिन हम नहीं चाहते कि यह उस स्तर तक पहुंचे जो हम लद्दाख में देख रहे हैं. राज्य का दर्जा हमारा अधिकार है. लद्दाख के लोगों ने केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मांगा था, फिर भी इससे उनके जीवन में कोई सुधार नहीं आया.

उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि यहां निर्दोष लोगों को कष्ट सहना पड़े. उनकी पार्टी इस मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से उठाती रहेगी. मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि भारत सरकार पहले ही राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है और सर्वोच्च न्यायालय को भी यह आश्वासन दे चुकी है.

परिसीमन और चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी

मुख्यमंत्री ने कहा कि परिसीमन और चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. आगे राज्य का दर्जा बहाल करना है, जो भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में वादा किया है. लोगों ने अब तक उल्लेखनीय धैर्य दिखाया है, लेकिन अब इस वादे को पूरा करने का समय आ गया है, और उनके धैर्य का गलत मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए.

लद्दाख के अनुभव पर विचार करते हुए, उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर सरकार ने उन्हें चेतावनी दी थी कि केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मांगने के अनपेक्षित परिणाम हो सकते हैं.

लद्दाख में सुधार न होने पर उठाया राज्य दर्जा मुद्दा

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हमने हमेशा लद्दाख के लोगों से कहा है कि वे जो मांग कर रहे हैं, वह उनके लिए महंगी पड़ सकती है. दुख की बात है कि नई व्यवस्था के तहत उनके जीवन में कोई सुधार नहीं आया है.

उनकी यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर छिड़ी बहस के बीच आई है कि केंद्र पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में ठोस कदमों की घोषणा कब करेगा.

अब्दुल्ला ने संवैधानिक हस्तक्षेप और संयम का आग्रह किया

विपक्षी नेताओं और नागरिक समाज समूहों ने बार-बार तत्काल समय-सीमा की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि लंबे समय तक केंद्र के शासन ने जवाबदेही को खत्म कर दिया है और लोगों को शक्तिहीन महसूस कराया है.

अब्दुल्ला ने संयम और संवैधानिक हस्तक्षेप का आह्वान दोहराते हुए अपनी बातचीत समाप्त की. उन्होंने कहा कि हम इस मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से उठाएंगे. हमारी मांग न्यायसंगत और वैध है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए.

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