अमरनाथ यात्रा से पहले हाई अलर्ट, आतंकी खतरे के साथ खराब मौसम से निपटने के भी हाईटेक इंतजाम
Amarnath Yatra 2026: इस साल भी अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा और आतंकी खतरों के लिए यात्रा शुरू होने से पहले ही पूरे रास्ते पर आतंकवाद-रोधी नेटवर्क और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर लिया गया है.

अमरनाथ यात्रा के लिए इस साल भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम और नए आतंकी खतरों के बीच, अधिकारियों के सामने यात्रियों की सुरक्षा और हिफाजत की एक बड़ी चुनौती है. यह खतरा मौसम के अनिश्चित और अप्रत्याशित मिजाज की वजह से है, जिसने पिछले एक महीने में जम्मू-कश्मीर में भारी तबाही मचाई है.
हालांकि, नई धमकियों के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने यात्रा शुरू होने से पहले ही पूरे रास्ते पर आतंकवाद-रोधी नेटवर्क और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर लिया है. साथ ही, कैंपों और यात्रा के रास्ते पर AI-इनेबल्ड कैमरे और डिजिटल स्कैनिंग जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी किया जा रहा है.
अमरनाथ यात्रा से पहले मौसम और आपदा से निपटने के लिए तैयार
कश्मीर के IGP वी.के. बिरदी ने कहा, 'हां, नई धमकियों की जानकारी मिल रही है और जम्मू-कश्मीर पुलिस यात्रा को निशाना बनाने की आतंकवादियों की किसी भी कोशिश को नाकाम करने के लिए सभी एहतियाती कदम उठा रही है. हमने यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए अपनी सभी तैयारियों को व्यवस्थित किया है.' उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस साल की यात्रा में खराब मौसम भी एक चुनौती होगी. मौसम से जुड़े खतरों को देखते हुए, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 3 जुलाई से शुरू होने वाली सालाना अमरनाथ यात्रा से पहले मौसम की निगरानी और आपदा से निपटने के सिस्टम को मजबूत किया है.
जम्मू-कश्मीर सरकार ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए डॉपलर वेदर रडार, विशेष बचाव दल और एक इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम (समय से पहले चेतावनी देने वाला सिस्टम) तैनात किया है, क्योंकि बादल फटने और अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आने की वजह से पूरे रास्ते को 'संवेदनशील' घोषित किया गया है. ऐसा करने के पीछे कारण पिछले एक महीने में बादल फटने, ओलावृष्टि और भारी बारिश की दो दर्जन से ज्यादा घटनाएं हैं, जिसके बाद मौसम विभाग ने अमरनाथ यात्रा के दौरान भी इसी तरह का मौसम रहने की संभावना जताई है.
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मौसम की रियल-टाइम निगरानी के लिए डॉपलर वेदर रडार चालू
मौसम नेटवर्क को अपग्रेड करने और मौसम से जुड़ी आपातकालीन स्थितियों के लिए बेहतर तैयारी का कदम 2022 में अमरनाथ गुफा मंदिर के पास आई अचानक बाढ़ के बाद उठाया गया था. उस घटना ने तीर्थयात्रा के दौरान मौसम की बेहतर निगरानी और तेजी से आपातकालीन प्रतिक्रिया की जरूरत को उजागर किया था. कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर अंशुल गर्ग ने कहा, 'श्रीनगर, बनिहाल टॉप, जम्मू और लेह में डॉपलर वेदर रडार (DWRs) चालू कर दिए गए हैं, ताकि बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों के साथ-साथ जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर भी मौसम की स्थितियों की लगातार और रियल-टाइम निगरानी की जा सके.'
'मौसम का सटीक पूर्वानुमान देने के लिए श्रीनगर और बनिहाल में लगे डॉपलर रडार का इस्तेमाल किया जाता है और इन्हीं अनुमानों के आधार पर हम तय करते हैं कि यात्रा सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सकती है या नहीं. इस साल हम उसी प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं और इसे और भी बेहतर बना रहे हैं. हमारे अधिकारी IMD के साथ मिलकर चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं और हम नियमित रूप से तैयारी से जुड़ी एक्सरसाइज कर रहे हैं. यात्रा के रास्ते पर लगे डिस्प्ले बोर्ड भी तीर्थयात्रियों को मौसम की स्थिति के बारे में पहले से जानकारी देते रहेंगे.' कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर अंशुल गर्ग ने कहा.
रडार नेटवर्क बादल फटने, भारी बारिश पर अलर्ट जारी करने में सक्षम
यह रडार नेटवर्क बादल फटने, भारी बारिश, आंधी-तूफान, ओलावृष्टि और तेज हवाओं जैसी स्थानीय स्तर की मौसम संबंधी घटनाओं का पता लगाने में सक्षम है, जिससे अधिकारी समय पर अलर्ट जारी कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर तीर्थयात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित कर सकते हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जारी मौसम संबंधी अलर्ट एक इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन सिस्टम के जरिए कैंप कमांडरों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और श्रीनगर में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर तक पहुंचाए जाते हैं. तीर्थयात्रियों को जानकारी देने के लिए बालटाल और नुनवान जैसे प्रमुख बेस कैंपों में भी मौसम की ताजा जानकारी दिखाई जा रही है.
प्रशासन ने पवित्र गुफा क्षेत्र और भूस्खलन की आशंका वाले अन्य इलाकों सहित यात्रा मार्गों पर 25 अहम जगहों पर 45 विशेष माउंटेन रेस्क्यू टीमें भी तैनात की हैं. इन टीमों को बचाव के आधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है और अचानक बाढ़, भूस्खलन तथा दुर्घटनाओं जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए एडवांस्ड ट्रेनिंग दी गई है.
NDRF, SDRF और पुलिस की टीमें संवेदनशील जगहों पर तैनात
'मौसम विभाग हमें मौसम की पल-पल की जानकारी देता रहता है. उन अनुमानों के आधार पर हम योजना बनाते हैं, तैयारी करते हैं और उसी के अनुसार अपनी कार्रवाई करते हैं. नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) ने यात्रा मार्ग पर खतरे वाली सभी जगहों की पहचान कर उनकी मैपिंग की है. NDRF, SDRF, जम्मू-कश्मीर पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की टीमों को इन संवेदनशील जगहों पर रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई की जा सके और तुरंत मदद पहुंचाई जा सके.' कश्मीर पुलिस के IGP वी.के. बिरदी ने कहा.
आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू के लिए कई स्तरों पर व्यवस्था की गई है, जिसमें SDRF, NDRF, सेना, CRPF, BSF और जम्मू-कश्मीर पुलिस की QRT (क्विक रिस्पॉन्स टीमें) शामिल हैं. ये सभी टीमें यात्रा के दौरान पहाड़ी रास्तों पर तैनात रहेंगी, ताकि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सहायता सुनिश्चित की जा सके. जम्मू-कश्मीर सरकार सालाना अमरनाथ यात्रा को सुचारू और सफल बनाने के लिए दिन-रात काम कर रही है. यह यात्रा 3 जुलाई से शुरू होने वाली है. तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सरकार और सुरक्षा एजेंसियों, दोनों की सबसे बड़ी प्राथमिकता है.
आपदा प्रतिक्रिया कर्मी पूरी तीर्थयात्रा के दौरान रहेंगे तैनात
तीर्थयात्रा मार्ग पर संवेदनशील जगहों की पहचान कर उनकी मैपिंग की गई है. किसी भी आपात स्थिति में तुरंत बचाव और सहायता सुनिश्चित करने के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को अहम जगहों पर तैनात किया गया है. अधिकारियों ने कहा कि आपदा प्रतिक्रिया कर्मी पूरी तीर्थयात्रा के दौरान तैनात रहेंगे और सालाना यात्रा के लिए पहले से की गई बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करेंगे.
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