अमरनाथ यात्रा 2026 से पहले संवेदनशील इलाकों की होगी पहचान, यात्रियों की सुरक्षा पर फोकस
Amarnath Yatra 2026: मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने यहां आयोजित एक बैठक में अनंतनाग और गांदरबल के उपायुक्तों और संबंधित मंडलीय प्रशासन को जोखिम भरे क्षेत्रों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं.

जम्मू और कश्मीर के हिमालयी क्षेत्र में स्थित अमरनाथ गुफा मंदिर तक जाने वाले दोनों मार्गों पर आपदा की दृष्टि से निशानदेही की जाएगी. अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले संवेदनशील और जोखिम भरे क्षेत्रों की पहचान भी पहले ही कर ली जाएगी. अधिकारियों ने यह जानकरी आज 29 जनवरी 2026 को दी.
उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में तंबू सुविधाएं की सुविधा नहीं
अधिकारियों के अनुसार, मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने यहां आयोजित एक बैठक में अनंतनाग और गांदरबल के उपायुक्तों और संबंधित मंडलीय प्रशासन को इन क्षेत्रों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं. मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि उच्च जोखिम वाले, आपदा की दृष्टि से संवेदनशील और कमजोर क्षेत्रों में तंबू और अस्थायी ढांचों सहित किसी भी प्रकार की सुविधाएं स्थापित न की जाएं. ये निर्देश अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे लेकिन अधिक खड़ी चढ़ाई वाले बालटाल मार्ग पर लागू होंगे.
जुलाई-अगस्त से शुरू होती है अमरनाथ की यात्रा
अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) की 15वीं उच्चस्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने बुधवार (28 जनवरी 2026) को संबंधित विभागों और हितधारकों से कहा कि वार्षिक यात्रा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से काफी पहले सुनिश्चित की जानी चाहिए. आमतौर पर अमरनाथ की यात्रा जुलाई-अगस्त में होती है, जिसमें देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र गुफा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
उन्होंने अग्रिम योजना और समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर देते हुए पर्यटन विभाग, लोक निर्माण विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों को आगामी एक माह के भीतर सभी निविदा, खरीद और अनुबंध संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि यात्रा शुरू होने से पहले निर्बाध व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए कार्यों को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाना अत्यंत आवश्यक है.
तीर्थयात्रियों के लिए पर्याप्त और आवश्यक सुविधाएं होंगी मौजूद
मुख्य सचिव ने भी उपायुक्तों से सेवा प्रदाताओं को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि प्रत्येक स्थान पर तीर्थयात्रियों और सेवा कर्मियों के लिए पर्याप्त, उपयुक्त और आवश्यक सुविधाएं मौजूद हों. उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और उपलब्ध कार्य अवधि का सर्वोत्तम उपयोग करने का आग्रह किया है, ताकि यात्रा की निर्धारित तिथियों से पहले सभी आधारभूत ढांचे और सेवाएं पूरी तरह तैयार हो सकें.
अधिकारियों के अनुसार, स्वास्थ्य तैयारियों को भी एक प्रमुख प्राथमिकता बताया गया है. इसके तहत चंदनवाड़ी और बालटाल स्थित आधार शिविरों के अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सकीय स्टाफ की तैनाती और उनकी पूर्ण कार्यशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा, यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सुविधाओं को और सुदृढ़ करने पर भी जोर दिया गया है.
वैध स्वास्थ्य प्रमाण पत्र रखने वाले श्रद्धालुओं को ही यात्रा की अनुमति
स्वास्थ्य विभाग को, स्थापित प्रक्रिया के अनुसार बाहरी क्षेत्रों से अतिरिक्त चिकित्सकीय कर्मियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए. बैठक में यह भी विचार-विमर्श किया गया कि केवल आरएफआईडी-पंजीकृत और वैध स्वास्थ्य प्रमाण पत्र रखने वाले श्रद्धालुओं को ही यात्रा की अनुमति दी जाए.
बैठक के दौरान श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनदीप कुमार भंडारी ने पिछले साल की यात्रा के बाद किए गए सुधारों, वर्तमान में जारी कार्यों और अमरनाथ यात्रा-2026 से पहले प्रस्तावित कार्यों की जानकारी दी. उन्होंने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) से जुड़े ट्रैक उन्नयन कार्यों, बिजली और पानी की निर्बाध आपूर्ति, आपदा न्यूनीकरण उपायों, प्रीपेड किराया प्रणालियों, शिविरों की क्षमता, श्रमिकों और टट्टू सेवाओं के पंजीकरण से संबंधित व्यवस्थाओं पर भी प्रकाश डाला है.























