शिमला: कोर्ट के आदेश पर संजौली मस्जिद पर चलेगा बुलडोजर, वक्फ के वकील नहीं पेश कर पाए कागज
Sanjauli Mosque: संजौली मस्जिद मामले में शिमला कोर्ट ने निचली दो मंजिलों को भी तोड़ने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने वक्फ से जमीन के कागज और नक्शा पेश करने को कहा था, लेकिन वक्फ कागजात दे पाया.

Sanjauli Masjid News: हिमाचल प्रदेश की विवादित संजौली मस्जिद मामले की सुनवाई आज (शनिवार, 3 मई) शिमला नगर निगम आयुक्त कोर्ट में हुई. सुनवाई के बाद नगर निगम आयुक्त ने बाकी बची निचली दो मंजिलों को तोड़ने के आदेश जारी कर दिए हैं.
वक्फ बोर्ड को मस्जिद की जमीन पर मालिकाना हक के कागज और नक्शा अदालत में पेश करने के आदेश दिए थे. हालांकि, वक्फ के वकील न तो सही कागजात दे पाए न ही मजबूती से अपना पक्ष रख पाए. वक्फ बोर्ड के वकील ने कहा कि इस जगह मस्जिद साल 1947 से पहले की थी, जिसको तोड़कर बनाया गया.
कोर्ट ने वक्फ पक्ष से पूछे सवाल
नगर निगम कोर्ट ने पूछा कि अगर मस्जिद 1947 से पहले की थी तो पुरानी मस्जिद को तोड़कर नई बनाने के लिए नगर निगम से नक्शा सहित अन्य जरूरी अनुमति क्यों नहीं ली गई? नियमों को ताक पर रखकर सारी मस्जिद बनाई गई. 45 मिनट तक चली बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया. दोपहर 1.00 बजे के बाद नगर निगम आयुक्त भूपिंदर अत्री ने फैसला सुनाया, जिसमें साफ कहा कि पूरी मस्जिद अवैध है जिसे गिराया जाए.
सभी मंजिलों को गिराने के आदेश
हिमाचल हाई कोर्ट ने संजौली मस्जिद के 15 साल से चल रहे केस को 8 मई से पहले निपटाने के आदेश दे रखे थे. ऐसा न करने पर नगर निगम के खिलाफ ही अवमानना की कार्रवाई होने की बात कही गई थी, लेकिन इससे पहले ही नगर निगम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए समूची मंजिल को गिराने के आदेश जारी कर दिए.
नगर निगम आयुक्त कोर्ट ने बीते साल 5 अक्टूबर को संजौली मस्जिद की ऊपर की 3 मंजिल गिराने के आदेश दिए थे. इन आदेशों पर मस्जिद को तोड़ने का काम कछुआ चाल से चल रहा है. अभी तक सिर्फ मस्जिद की छत्त ही हटाई गई है, जबकि तीसरी और चौथी मंजिल की दीवारें हटाई गई हैं.
अब निचली 2 मंजिल को लेकर मामला अभी नगर निगम आयुक्त कोर्ट में चल रहा था. यह केस 15 साल से विचाराधीन है. इसे जल्दी निपटाने की मांग को लेकर संजौली मस्जिद के आसपास के लोकल रेजिडेंट ने बीते साल हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. बीते साल भी 21 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने 8 हफ्ते के भीतर निगम आयुक्त को केस निपटाने के आदेश दिए थे, मगर तब निगम आयुक्त ऐसा नहीं कर पाए.
इसके खिलाफ लोकल रेजिडेंट ने एक्जीक्यूशन पेटिशन दायर की. इसका निपटारा करते हुए हाई कोर्ट ने दूसरी बार 8 मई तक की डेडलाइन दी थी. जिस पर आज फाइनल फैसला आ गया.
शिमला के संजौली में मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर पिछले साल विवाद शुरू हुआ था. 29 अगस्त 2024 को शिमला जिले के मल्याणा में दो गुटों के बीच झड़प हुई, जिसमें एक समुदाय विशेष के लोगों ने तेजधार हथियारों से एक शख्स को घायल कर दिया था. टना ने तूल पकड़ा और 1 सितंबर 2024 को संजौली में मस्जिद के बाहर लोगों का गुस्सा भड़क उठा. हिंदू संगठनों ने इसके खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. यहीं से संजौली मस्जिद मामला शुरू हुआ जिसपर आज बड़ा फैसला आया है.
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Source: IOCL





















