हिमाचल में मानसून से तबाही, 181 लोगों की मौत; करोडों का नुकसान
Himachal Pradesh News: सड़क दुर्घटनाओं में चंबा और सिरमौर में सबसे ज्यादा 16-16 लोगों की मौत हुई है. इसके बाद कुल्लू में 14, शिमला में 11, कांगड़ा और सोलन में 10-10 तथा ऊना में 9 लोगों की जान गई है.

शिमला: हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून ने भारी तबाही मचाई है. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की 14 अगस्त 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून सीजन के दौरान प्रदेश में विभिन्न आपदाओं और सड़क हादसों में 181 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 283 लोग घायल हुए हैं. राज्य को अब तक 957.74 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है.
SEOC की रिपोर्ट के अनुसार, आपदा संबंधी घटनाओं में 78 लोगों की जान गई, जबकि प्रतिकूल मौसम और सड़क दुर्घटनाओं में 103 लोगों की मौत हुई है. आपदा जनित मौतों में सबसे ज्यादा 27 लोगों की जान पेड़, चट्टान या खड़ी ढलान से गिरने की घटनाओं में गई. इसके अलावा 14 मौतें भूस्खलन, 8 सर्पदंश, 7 करंट लगने, 5 डूबने, एक फ्लैश फ्लड और एक आग लगने की घटना में दर्ज की गई हैं. आपदाओं से सबसे ज्यादा मौतें लाहौल-स्पीति में 14, कांगड़ा में 13 और शिमला में 11 हुई हैं. वहीं कुल्लू और चंबा में 9-9 तथा मंडी और सिरमौर में 7-7 लोगों की मौत हुई है.
चंबा और सिरमौर में सड़क हादसों का सबसे ज्यादा कहर
सड़क दुर्घटनाओं में चंबा और सिरमौर में सबसे ज्यादा 16-16 लोगों की मौत हुई है. इसके बाद कुल्लू में 14, शिमला में 11, कांगड़ा और सोलन में 10-10 तथा ऊना में 9 लोगों की जान गई है. मानसून के दौरान प्रभावित परिवारों को 7.24 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि वितरित की जा चुकी है.
मकानों और निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान
मानसून की आपदा में प्रदेश में 31 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 302 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है. इसके अलावा 189 दुकानें और फैक्ट्री भवन, 258 गौशालाएं तथा कई श्रमिक शेड और अन्य संरचनाएं भी प्रभावित हुई हैं. जिलेवार आर्थिक नुकसान की बात करें तो कांगड़ा में 139.85 करोड़ रुपये, चंबा में 138.01 करोड़ रुपये, शिमला में 112.25 करोड़ रुपये और मंडी में 87.81 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है.
PWD को 717 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
सार्वजनिक संपत्तियों को भी मानसून से व्यापक क्षति पहुंची है. रिपोर्ट के अनुसार लोक निर्माण विभाग (PWD) को 717.15 करोड़ रुपये, जल शक्ति विभाग को 216.40 करोड़ रुपये और बिजली क्षेत्र को 5.30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. कृषि और बागवानी क्षेत्र में भी भारी नुकसान दर्ज किया गया है. SEOC की शाम 5 बजे जारी जिला-वार सार्वजनिक उपयोगिता रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 114 सड़कें बंद हैं. इसके अलावा 10 डीटीआर यानी ट्रांसफार्मर और 250 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं.
मंडी सबसे ज्यादा प्रभावित, 39 सड़कें बंद
मंडी जिला इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित है. यहां 39 सड़कें बंद हैं और 212 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक हैं. कुल्लू में 33 सड़कें बंद हैं और 2 डीटीआर प्रभावित हुए हैं. चंबा में 9 सड़कें बंद हैं, जबकि एक डीटीआर और 16 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं. शिमला में 13 सड़कें बंद हैं, 7 डीटीआर और 7 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं. अन्य जिलों में कांगड़ा की 6, सिरमौर की 5, ऊना की 6, किन्नौर की 1 और लाहौल-स्पीति की 2 सड़कें बंद हैं. सिरमौर में 5 पेयजल योजनाएं और हमीरपुर में 10 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं.
114 सड़कें बंद, 250 पेयजल योजनाएं प्रभावित
प्रदेशभर में फिलहाल 114 सड़कें बंद हैं. हालांकि कोई राष्ट्रीय राजमार्ग बंद नहीं है. कुल 10 डीटीआर और 250 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं. बिलासपुर और सोलन में कोई सड़क, डीटीआर या पेयजल योजना प्रभावित नहीं बताई गई है. राज्य सरकार और जिला प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों में जुटे हैं. वहीं, मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे प्रशासन की चुनौतियां बढ़ सकती हैं.



















